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वास्तु के इन उपायों से घर पर आती है सुख और समृद्धि
Wed, 30 Dec 2020 05:17 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 30 Dec 2020 05:17 PM IST
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वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
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वास्तुशास्त्र के अनुसार अगर घर में कुछ चीजें सही दिशा में नहीं हैं या फिर वास्तु में जो चीजें वर्जित है उनका इस्तेमाल किया जा रहा है तो घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास बना रहता है। घर में नकारात्मक ऊर्जा होने पर बीमारियां और कार्यों में असफलता प्राप्त होती है। वास्तु में कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं, जिनको अपनाने से जीवन में परेशानियों को दूर किया जा सकता है।
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देवी-देवता, महापुरुषों के चित्र हमें प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा देते हैं। इन्हें दक्षिण-पश्चिम में लगाना अच्छा होता है। लेकिन भूलकर भी शयन कक्ष में देवी-देवताओं के चित्र नहीं लगाने चाहिए।
शयनकक्ष में बेड का सिरहाना पूर्व अथवा दक्षिण दिशा में होना चाहिए। जिन घरों में शयनकक्ष में सामने की ओर दरवाजा होता है वहां रोग अथवा क्लेश रहता है अर्थात सोते समय पैर दरवाजे की तरफ न रहें ।
वास्तु के अनुसार पूर्व अथवा उत्तर की ओर मुख करके भोजन करने से आरोग्यता प्राप्त होती है,दक्षिण की ओर मुख करके भोजन करना शास्त्र सम्मत नहीं है।
यदि घर के मुख्य द्वार पर गणेशजी की प्रतिमा लगा दी जाए तो अतिशुभ होता है
छत पर पानी की टंकी को पश्चिम अथवा भवन के नैऋत्य कोण के क्षेत्र में रखें। हानि से बचने के लिए छत पर रखी हुई पानी की टंकी कभी भी ओवर फ्लो या टपकनी नहीं चाहिए ।
बाथरूम और रसोई के पानी की निकासी के पाइप का मुहं उत्तर,पूर्व या उत्तर-पूर्व में होना चाहिए।
वास्तु में दक्षिण-पूर्व कोण को आग्नेय कोण कहा गया है,क्योंकि इसका संबंध अग्नि-कोण से है। ज्वलनशील वस्तुएं जैसे ओवन, गैस चूल्हा आदि हमेशा आग्नेय कोण में ही होना चाहिए।
लकड़ी का फर्नीचर सर्वथा उपयुक्त रहता है। जहां तक हो सके फर्नीचर में धातु या शीशे का प्रयोग कम से कम करना चाहिए।
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बाथरूम और रसोई के पानी की निकासी के पाइप का मुहं उत्तर,पूर्व या उत्तर-पूर्व में होना चाहिए।
वास्तु में दक्षिण-पूर्व कोण को आग्नेय कोण कहा गया है,क्योंकि इसका संबंध अग्नि-कोण से है। ज्वलनशील वस्तुएं जैसे ओवन, गैस चूल्हा आदि हमेशा आग्नेय कोण में ही होना चाहिए।
लकड़ी का फर्नीचर सर्वथा उपयुक्त रहता है। जहां तक हो सके फर्नीचर में धातु या शीशे का प्रयोग कम से कम करना चाहिए।