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इन धार्मिक वस्तुओं को जमीन पर रखना पड़ सकता है भारी, जानिए क्या होते हैं नियम
Mon, 31 Aug 2026 06:30 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 31 Aug 2026 06:30 PM IST
सार
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा-पाठ से जुड़ी वस्तुएं सामान्य वस्तुओं की तरह नहीं होतीं, इसलिए इन्हें रखने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कुछ धार्मिक वस्तुओं को सीधे जमीन पर रखना शुभ नहीं माना जाता।
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पूजा घर के नियम
- फोटो : Amar Ujala
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वास्तु शास्त्र में घर की दिशाओं और कमरों के साथ-साथ वहां रखी वस्तुओं के स्थान का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा-पाठ से जुड़ी वस्तुएं सामान्य वस्तुओं की तरह नहीं होतीं, इसलिए इन्हें रखने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कुछ धार्मिक वस्तुओं को सीधे जमीन पर रखना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इन्हें उचित और पवित्र स्थान पर रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
पूजा थाली
- फोटो : adobe
पूजा की सामग्री
पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जैसे शंख, घंटी, दीपक, धूपदानी, पूजा की थाली और अन्य पूजन सामग्री को सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इन्हें पूजा की चौकी, पट या किसी स्वच्छ ऊंचे स्थान पर रखना शुभ माना जाता है। पूजा सामग्री को सम्मानपूर्वक रखने से पूजा स्थल की पवित्रता भी बनी रहती है।
शंख और घंटी
शंख और घंटी को भगवान की पूजा में विशेष महत्व दिया गया है। इन्हें जमीन पर रखने के बजाय पूजा स्थल में उचित स्थान पर रखना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार शंख को भगवान विष्णु और घंटी को देवपूजन से जोड़ा जाता है, इसलिए इनके प्रति सम्मान बनाए रखना आवश्यक माना गया है।
धार्मिक ग्रंथ
गीता, रामायण, पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों को कभी भी सीधे फर्श पर नहीं रखना चाहिए। इन्हें स्वच्छ कपड़े में लपेटकर पूजा स्थान या साफ अलमारी में ऊंचाई पर रखना उचित माना जाता है। ग्रंथों को सम्मान देने की परंपरा सनातन धर्म में विशेष महत्व रखती है।
पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री जैसे शंख, घंटी, दीपक, धूपदानी, पूजा की थाली और अन्य पूजन सामग्री को सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इन्हें पूजा की चौकी, पट या किसी स्वच्छ ऊंचे स्थान पर रखना शुभ माना जाता है। पूजा सामग्री को सम्मानपूर्वक रखने से पूजा स्थल की पवित्रता भी बनी रहती है।
शंख और घंटी
शंख और घंटी को भगवान की पूजा में विशेष महत्व दिया गया है। इन्हें जमीन पर रखने के बजाय पूजा स्थल में उचित स्थान पर रखना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार शंख को भगवान विष्णु और घंटी को देवपूजन से जोड़ा जाता है, इसलिए इनके प्रति सम्मान बनाए रखना आवश्यक माना गया है।
धार्मिक ग्रंथ
गीता, रामायण, पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों को कभी भी सीधे फर्श पर नहीं रखना चाहिए। इन्हें स्वच्छ कपड़े में लपेटकर पूजा स्थान या साफ अलमारी में ऊंचाई पर रखना उचित माना जाता है। ग्रंथों को सम्मान देने की परंपरा सनातन धर्म में विशेष महत्व रखती है।
कलश पूजा
- फोटो : adobe
भगवान की मूर्तियां
देवी-देवताओं की मूर्तियों और चित्रों को जमीन पर रखना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। पूजा घर में मूर्तियों के लिए चौकी या उचित आसन होना चाहिए। खंडित या पुरानी मूर्तियों को भी इधर-उधर जमीन पर रखने के बजाय धार्मिक विधि के अनुसार विसर्जित या मंदिर में समर्पित करना चाहिए।
दीपक और दीप पात्र
दीपक को भी सीधे फर्श पर रखने के बजाय पूजा की चौकी या दीप रखने के लिए निर्धारित स्थान पर रखना चाहिए। पूजा के दौरान दीपक को स्वच्छ स्थान पर रखना शुभ माना जाता है। दीपक को रखने का स्थान ऐसा हो जहां उसकी लौ सुरक्षित रहे और पूजा स्थल भी स्वच्छ बना रहे।
कलश को रखें ऊंचे स्थान पर
पूजा में स्थापित कलश को सीधे जमीन पर रखने की बजाय उसके नीचे चौकी, लकड़ी का पट या अन्य स्वच्छ आसन रखना चाहिए। कलश को मंगल और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए उसकी स्थापना पूरे सम्मान के साथ की जाती है।
देवी-देवताओं की मूर्तियों और चित्रों को जमीन पर रखना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। पूजा घर में मूर्तियों के लिए चौकी या उचित आसन होना चाहिए। खंडित या पुरानी मूर्तियों को भी इधर-उधर जमीन पर रखने के बजाय धार्मिक विधि के अनुसार विसर्जित या मंदिर में समर्पित करना चाहिए।
दीपक और दीप पात्र
दीपक को भी सीधे फर्श पर रखने के बजाय पूजा की चौकी या दीप रखने के लिए निर्धारित स्थान पर रखना चाहिए। पूजा के दौरान दीपक को स्वच्छ स्थान पर रखना शुभ माना जाता है। दीपक को रखने का स्थान ऐसा हो जहां उसकी लौ सुरक्षित रहे और पूजा स्थल भी स्वच्छ बना रहे।
कलश को रखें ऊंचे स्थान पर
पूजा में स्थापित कलश को सीधे जमीन पर रखने की बजाय उसके नीचे चौकी, लकड़ी का पट या अन्य स्वच्छ आसन रखना चाहिए। कलश को मंगल और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है, इसलिए उसकी स्थापना पूरे सम्मान के साथ की जाती है।
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शिवलिंग
- फोटो : AI
शालिग्राम और शिवलिंग
शालिग्राम शिला और शिवलिंग को भी सीधे जमीन पर रखने से बचना चाहिए। इन्हें पूजा स्थल में उचित आसन या पात्र पर स्थापित करना चाहिए। विशेष रूप से शिवलिंग की पूजा करते समय उसके नीचे स्वच्छ पात्र या जलहरी का होना आवश्यक माना जाता है।
तुलसी दल और पूजा के फूल
तुलसी दल और भगवान को अर्पित किए जाने वाले फूलों को जमीन पर गिरा हुआ या बिखरा हुआ नहीं रखना चाहिए। इन्हें स्वच्छ पात्र में रखना चाहिए। पूजा के लिए लाए गए फूल और तुलसी को सम्मानपूर्वक रखने की परंपरा धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
शालिग्राम शिला और शिवलिंग को भी सीधे जमीन पर रखने से बचना चाहिए। इन्हें पूजा स्थल में उचित आसन या पात्र पर स्थापित करना चाहिए। विशेष रूप से शिवलिंग की पूजा करते समय उसके नीचे स्वच्छ पात्र या जलहरी का होना आवश्यक माना जाता है।
तुलसी दल और पूजा के फूल
तुलसी दल और भगवान को अर्पित किए जाने वाले फूलों को जमीन पर गिरा हुआ या बिखरा हुआ नहीं रखना चाहिए। इन्हें स्वच्छ पात्र में रखना चाहिए। पूजा के लिए लाए गए फूल और तुलसी को सम्मानपूर्वक रखने की परंपरा धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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माला जाप के नियम
- फोटो : Amar Ujala
पूजा की माला
रुद्राक्ष, तुलसी या मंत्र जाप की माला को भी जमीन पर रखने से बचना चाहिए। इन्हें स्वच्छ कपड़े या माला रखने वाले पात्र में सुरक्षित रखना चाहिए। धार्मिक मान्यता में जाप की माला को साधना का माध्यम माना गया है, इसलिए इसकी पवित्रता बनाए रखना जरूरी है।
पूजा के आसन का रखें ध्यान
पूजा या मंत्र जाप के लिए इस्तेमाल होने वाले आसन को सीधे गंदे फर्श पर डालने के बजाय स्वच्छ स्थान पर बिछाना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा के लिए अलग आसन रखने से साधना में एकाग्रता और पवित्रता बनी रहती है।
रुद्राक्ष, तुलसी या मंत्र जाप की माला को भी जमीन पर रखने से बचना चाहिए। इन्हें स्वच्छ कपड़े या माला रखने वाले पात्र में सुरक्षित रखना चाहिए। धार्मिक मान्यता में जाप की माला को साधना का माध्यम माना गया है, इसलिए इसकी पवित्रता बनाए रखना जरूरी है।
पूजा के आसन का रखें ध्यान
पूजा या मंत्र जाप के लिए इस्तेमाल होने वाले आसन को सीधे गंदे फर्श पर डालने के बजाय स्वच्छ स्थान पर बिछाना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा के लिए अलग आसन रखने से साधना में एकाग्रता और पवित्रता बनी रहती है।