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Hindi News ›   Astrology ›   Predictions ›   Saturn Transit 2025 Shani Vakri For 138 Days Know Effect On Aries Zodiac Signs

Shani Vakri 2025: शनि मीन राशि में हुए वक्री, जानें मेष राशि पर कैसा पड़ेगा प्रभाव

Sun, 13 Jul 2025 04:22 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 13 Jul 2025 04:22 PM IST
सार

शनि अब मीन राशि में गोचर रहते हुए वक्री हो गए हैं। शनि वक्री अवस्था में करीब 138 दिनों तक रहेंगे। शनि के वक्री होने से जानते हैं मेष राशि पर किस तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा। 

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Saturn Transit 2025 Shani Vakri For 138 Days Know Effect On Aries Zodiac Signs
शनि वक्री और इसका प्रभाव - फोटो : adobe stock

विस्तार

शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद चाल से चलने वाला ग्रह हैं। यह एक से दूसरी राशि में प्रवेश करने के लिए ढाई साल तक का समय लगाते हैं। इस तरह से पूरी राशि चक्र का एक चक्कर लगाने में शनिदेव को 30 वर्षों का समय लगता है। शनिदेव को पापी और क्रूर ग्रह माना जाता है। यह व्यक्ति को उसके कर्म के आधार पर शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। शनिदेव अभी गुरु के स्वामित्व वाली राशि मीन में हैं और 13 जुलाई 2025 को वक्री हो गए हैं। शनि मीन राशि में करीब 4 महीनों तक वक्री अवस्था में रहेंगे, फिर मीन राशि में ही रहते हुए मार्गी हो जाएंगे। आइए जानते हैं शनि के मीन राशि में वक्री होने से मेष राशि के लोगों के जीवन में किस तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा।

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शनि वक्री और मेष राशि पर प्रभाव
13 जुलाई को शनि का वक्री आपके द्वादश भाव में हो रहा है। मेष राशि के जातकों के लिए शनिदेव कुंडली के दशम और लाभ भाव के स्वामी होते हैं। शनि का द्वादश भाव में चंद्र राशि के अनुसार देखने पर यह आपके लिए साढ़ेसाती का प्रभाव रहेगा। जो नकारात्मक प्रभाव को दिखाता है। ऐसे में शनि ग्रह के नकारात्मकता में कमी का सामना करना पड़ सकता है। शनि की वजह से मेष राशि के जातकों को जो परेशानियां मिल थी अब उसमें कमी देखने को मिलेगी। आपके खर्चों में कमी आ सकती है। जो लोग विदेश संबंधी काम करना चाहते हैं उनके लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण होगा। शनि के वक्री होने से आपके नकारात्मकता में कमी आती है। 
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ज्योतिष में शनि ग्रह 
- ज्योतिष में शनि ग्रह को बहुत ही खास महत्व महत्व दिया जाता है। कालपुरुष की कुंडली न्याय के कारक शनिदेव मकर और कुंभ राशि के स्वामी ग्रह हैं। जहां पर यह दसवें और एकादश भाव पर अधिकार रखते हैं। ज्योतिष शास्त्र में कुंडली का दशम भाव कर्म का और इससे अगला भाव फल को दिखाता है। इस कारण से शनिदेव को कर्म फल दाता माना जाता है। 
- कुंभ राशि शनिदेव की मूल त्रिकोण राशि होत है। मेष राशि में नीच के और तुला राशि में उच्च के होते हैं। 
- शनिदेव मेहनत करने वाले श्रमिक और गरीबों के देवता हैं। जो व्यक्ति गरीबों और कमजोर वर्ग की मदद करते हैं उनको शनिदेव परेशान नहीं करते हैं। 
- शनिदेव लोहा, खदान, खनिज, तेल, कबाड़ और  औजारों के कारक ग्रह होते हैं।  शनिदेव अनुराधा, पुष्य  और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी होते हैं। 

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