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अशुभ नहीं, इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति होते हैं कामयाब

राकेश/इंटरनेट डेस्क

ज्योतिषशास्त्र में 27 नक्षत्रों में से छह नक्षत्रों को अशुभ नक्षत्र माना गया है। इन नक्षत्रों में बच्चे का जन्म होना बच्चे एवं परिवार के सदस्यों के लिए अशुभ माना जाता है। ज्योतिषशास्त्र की भाषा में इन नक्षत्रों को गण्डमूल नक्षत्र कहा जाता है। इन्हीं अशुभ नक्षत्रों में से एक है 'ज्येष्ठा नक्षत्र'। आकाश मंडल में इस नक्षत्र का स्थान अठारहवां है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार घर में किसी बच्चे का जन्म इस नक्षत्र में होने पर उसकी मूल शांति जरूर करा लेनी चाहिए अन्यथा यह बच्चे अथवा परिवार के किसी सदस्य के लिए कष्टकारी हो सकता है। मूल शांति होने के बाद नक्षत्र का दोष समाप्त हो जाता है। ऐसा व्यक्ति व्यक्तिगत तौर पर बहुत ही भाग्यशाली होता है।

यह नौकरी करे अथवा व्यवसाय दोनों ही क्षेत्र में कामयाब होते हैं। इसका कारण यह है कि ऐसे व्यक्ति बड़े ही फुर्तीले और सजग होते हैं। बुध इस नक्षत्र का स्वामी होता है जो इन्हें बुद्धिमान और व्यापारिक योग्यताएं प्रदान करता है इसलिए विशेषतौर पर व्यापार में इन्हें अच्छी सफलता मिलती है।

ज्येष्ठा नक्षत्र में पैदा हुए व्यक्ति किसी विचारधारा में बंधकर रहने की बजाय समय के साथ चलना पसंद करते हैं और मौके एवं परिस्थितियों का भरपूर लाभ उठाते हैं। इस नक्षत्र के चारों चरण वृश्चिक राशि में होते हैं जिसके स्वामी मंगल हैं। यही कारण है कि इस ज्येष्ठा नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति जमीन एवं भवन की खरीद बिक्री में रूचि रखते हैं। ऐसे व्यक्ति कई स्रोतों से धन अर्जित करते हैं।

परिवार के प्रति यह अपने उत्तरदायित्व को बखूबी समझते हैं और सगे-संबंधियों का ख्याल रखते हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं की इनमें बड़ी चाहत रहती है और अपनी इन चाहतों को पूरा करने में यह सफल भी होते हैं। ऐसे व्यक्ति उतावलेपन में कई बार अपना ही नुकसान कर लेते हैं। इनके व्यक्तित्व की एक बड़ी कमी यह होती है कि जो दिल में होता है उसे साफ-साफ कह देते हैं जिसके कारण मित्रों की संख्या कम होती है।
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