नरेन्द्र मोदी चौथी बार मुख्यमंत्री पद के लिए रेस में शामिल हैं। लेकिन इस बार स्थिति कठिनाईपूर्ण है। मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने के लिए इन्हें काफी संघर्ष करना होगा। विपक्षियों का पलड़ा भारी रहेगा जनता ऐन मौके पर समर्थन से हाथ पीछे खींच सकती है। अगर नरेन्द्र मोदी जीतते भी हैं तो इसमें भाग्य का बड़ा हाथ रहेगा। विपक्षियों के साथ कांटे की टक्कर रहेगी। यह कहना है ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा का।
नरेन्द्र मोदी की कुण्डली में इस समय चंद्रमा की महादशा चल रही। चुनाव के समय गुरु की प्रत्यन्तर दशा चल रही होगी। गुरु इनकी कुण्डली में तीसरे भाव और छठे भाव के स्वामी हैं। तीसरा भाव प्रराक्रम तो छठा प्रतिस्पर्धा का है। इस समय इन्हें सामान्य से अधिक प्रयास करने पड़ सकते हैं और इनके शत्रु इन पर अत्यधिक हावी होने का और इन्हें दबोचने का प्रयास करेंगे। इसकी वजह यह है कि गोचर में गुरु राहु-केतु के अक्ष पर गोचर कर रहे हैं क्योंकि गुरु वृष राशि में केतु के साथ स्थित है।
इनकी वर्ष कुण्डली में गुरु बारहवें भाव में केतु के साथ हैं। वर्ष कुण्डली में मुंथेश गुरू है और मुंथा जनता के घर अर्थात सप्तम भाव में है। इसलिए जनता के मन में इस बार इनके विरुद्ध भाव भी पैदा हो सकते हैं। जन्म कुण्डली में देखा जाए तो महादशानाथ चंद्रमा दशम भाव का स्वामी होकर दूसरे भाव में नीच राशि में है।
शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव भी आरंभ हो गया है। जन्म का चंद्रमा गोचर में राहु के प्रभाव में है। इन्हें थोड़ा सावधान रहना चाहिए क्योंकि धोखा मिल सकता है। इस समय चुनाव में इन्हें अत्यधिक कड़े मुकाबले से गुजरना पड़ सकता है। यदि मोदी चुनाव जीत भी जाते हैं तब बाद में भी इन्हें कठिनाईयों का सामना करते रहना पड़ सकता है।
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