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कांग्रेस 100 का आंकड़ा पार कर पाएगी?

ज्योतिषशास्त्री/ जयगोविंद शास्त्री

राजनीतिक भविष्य कथन क्रिकेट कमेंट्री से भी अधिक लोकप्रिय हो गई है। चार राज्यों में हुए विधान सभा चुनाव और उनके परिणामों के बाद कांग्रेस के राजनैतिक भविष्य की चर्चा फिर मुखर है। मौजूदा कांग्रेस पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस से भिन्न है। इसका गठन कार्तिक शुक्लपक्ष चतुर्दशी तदनुसार 22 नवंबर 1969 को सुबह 09 बजकर 58 मिनट पर भरणी नक्षत्र एवं धनु लग्न मे बैंगलोर मे हुआ।

धनु लग्न की कुंडली मे लग्न से दूसरे भाव मे उच्चराशिगत मंगल, तीसरे भाव मे राहू, पंचम भाव मे शनि-चन्द्र और नवम भाग्यभाव मे केतु बैठे हैं, जबकि एकादश लाभ भाव गुरु-शुक्र एवं द्वादश हानि भाव मे सूर्य-बुध बैठे हैं। कुंडली मे विषयोग, बाहुबली योग, चन्द्र-मंगल के केंद्र संबंध से रुचक योग, गजकेशरी, गुरु घंटाल योग सहित शुभाशुभ मिलाकर शताधिक योग बने हैं जिनका लाभ कांग्रेस पार्टी आजतक उठा रही है।

कांग्रेस के गठन के समय शुक्र की महादशा चल रही थी और इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री के रूप मे कार्यकाल देख रही थीं। जबतक शुक्र की महादशा चली इंदिरा जी ने देश और पार्टी का बेहतरीन नेतृत्व किया, चूकी शुक्र शत्रुभाव के भी स्वामी हैं। इसलिए शत्रुओं ने हमेशा शीर्ष पार्टी नेतृत्व को नई-नई चुनौतियां पेश की जिनमे पार्टी की हार भी शामिल है।

कांग्रेस पार्टी पर 27 मई 1983 से 27 मार्च 1986 तक के मध्य शत्रुभाव के स्वामी शुक्र की महादशा मे जब मरण तुल्य कष्ट देनेवाले मारकेश बुध की अंतरदशा आई, और उसमे भी हानि भाव के स्वामी मंगल की प्रत्यंतर दशा 24 अक्टूबर 1984 से 25 दिसंबर 1984 आई, तो षष्ठेश, मारकेश और द्वादशेश के कुयोग ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व इंदिरा जी की हत्या करवा दी।

उसके बाद भाग्यभाव के स्वामी सूर्य की महादशा 21 मई 1987 से 21 मई 1993 तक रही जो पार्टी के हित मे रही, किन्तु कांग्रेस पार्टी पर दोबारा मारकेश बुध की अंतर्दशा 9 मार्च 1991 से जनवरी 1992 के मध्य आई उसमे भी शत्रुभाव के स्वामी शुक्र की प्रत्यंतरदशा 16 मई 1991 से 07 जुलाई 1991 के मध्य रही जिसमे पुनः शत्रुओं ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की हत्या कर दी।

मई 1993 से 10 वर्ष के लिए मृत्युभाव के स्वामी चंद्र की महादशा आई, चन्द्र नीच राशिगत शनि के साथ शुक्र के नक्षत्र मे बैठकर विष योग बनाए हुए हैं परिणाम स्वरूप इस दशा ने कांग्रेस पार्टी की जड़ें खोखली कर दीं। वर्तमान समय मे इस पार्टी पर मई 2010 से राहू की महादशा चल रही है जो मई 2028 तक चलेगी।

राहु की महादशा मे राहु की ही अंतरदशा 3 फ़रवरी 2013 तक रही। इस अवधि मे पार्टी भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करने मे नाकाम रही और मनमोहन सरकार भ्रष्टाचार एवं घोटालों का पर्याय बन गई। अभी पार्टी पर राहू की महादशा मे गुरु की अंतर्दशा जून 2015 तक चलेगी। लोकसभा चुनाव 2014 में अप्रैल-मई तक होने की संभावना है।

वर्तमान मे शनिदेव गोचर से तुला राशि मे राहु के साथ भ्रमण कर रहे हैं मेष राशि पर नीच दृष्टि पड़ रही है जो पार्टी के लिए अभिशाप बनी हुई है चुनाव के समय लग्नेश गुरु वृद्धावस्था मे रहेंगें जो लग्न से मारक भाव मे चल रहे हैं! गुरु के अष्टकवर्ग मे मिथुन राशि के गोचर मे 4 बिंदु हैं अतः इनसे कोई चमत्कार की उम्मीद न करें शनिदेव तुला राशि के गोचर के समय 3 बिंदु के साथ हैं अतः यह समय इस पार्टी के लिए पतन की सुनामी हैं। आने वाले चुनाव मे कांग्रेस 100 के आंकड़े के नीचे सिमट जाए तो हैरानी की बात नहीं।
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