समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुभाष राजभर ने महिला आयोग की सदस्य पूनम मौर्या के बयान को लेकर भाजपा पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने महिला सम्मान के सवाल को सीधे महंगाई और केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना से जोड़ते हुए कहा कि महिलाओं के हित और सम्मान की बात करने वाली भाजपा को यह भी बताना चाहिए कि उज्ज्वला योजना के तहत मिले गैस सिलेंडर महंगाई के कारण कितने परिवार नियमित रूप से इस्तेमाल कर पा रहे हैं। डॉ. राजभर ने कहा कि उज्ज्वला योजना को गरीब महिलाओं को धुएं से राहत दिलाने और रसोई गैस उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण योजना के तौर पर पेश किया गया था। लेकिन समय बीतने के साथ गैस सिलेंडर की कीमत और घरेलू बजट का दबाव बड़ा सवाल बन गया है। उनका दावा है कि जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि उज्ज्वला योजना से लाभान्वित कई परिवारों के लिए सिलेंडर दोबारा भरवाना आर्थिक चुनौती बना हुआ है। सपा प्रवक्ता ने इसी मुद्दे को भाजपा के महिला सशक्तीकरण के दावों से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि यदि गैस सिलेंडर महंगा होने के कारण गरीब परिवार उसे नियमित रूप से नहीं भरवा पा रहे हैं तो फिर योजना का वास्तविक लाभ महिलाओं तक कितना पहुंच रहा है? उन्होंने कहा कि योजना की घोषणा और उसके जमीनी असर के बीच के अंतर को समझने के लिए सरकार को ग्राउंड रिपोर्ट सामने रखनी चाहिए। महंगाई के मुद्दे पर भी उन्होंने भाजपा सरकार को घेरा। डॉ. राजभर ने कहा कि रसोई से जुड़े सामान की कीमतें बढ़ने का सीधा असर महिलाओं के घरेलू बजट पर पड़ता है। हाल में चीनी के दाम बढ़ने का जिक्र करते हुए उन्होंने भाजपा नेताओं की ओर से चीनी कम खाने की अपील पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि महंगाई पर नियंत्रण करने के बजाय जनता को कम इस्तेमाल करने की सलाह देना समस्या का समाधान नहीं है। महिला आयोग की सदस्य पूनम मौर्या के बयान पर उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी नेता ने सपा सांसद डिंपल यादव के खिलाफ टिप्पणी की है तो महिला आयोग ने उस पर क्या कार्रवाई की? उन्होंने कहा कि महिला आयोग को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय महिलाओं से जुड़े मामलों पर निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। सपा का यह हमला दरअसल महिला सम्मान से आगे बढ़कर रसोई के बजट और महंगाई की राजनीति को केंद्र में लाने की कोशिश है। उज्ज्वला योजना को भाजपा की प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं में गिनाया जाता है, ऐसे में सपा अब इसके जरिए सरकार से यह सवाल पूछ रही है कि सिलेंडर देना उपलब्धि है या उसे गरीब परिवार के लिए लगातार सुलभ बनाए रखना भी सरकार की जिम्मेदारी है?