वाराणसी इंस्टीट्यूट ऑफ हिस्ट्री के आजीवन सदस्य प्रोफेसर डॉ. कुलदीप कुमार मिश्र ने कहा कि इतिहास का अर्थ सिर्फ सच है, लेकिन वर्तमान समय में बिना तथ्यों को जाने इतिहास को गढ़ने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी विशेषकर जेन जी को इतिहास समझने के लिए सबसे पहले प्राथमिक स्रोतों का अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास को भारतीय दृष्टिकोण से समझने की जरूरत है, न कि यूरोप की परिभाषाओं के आधार पर। 1857 में हुई प्रथम स्वतंत्रता की लड़ाई भारत की धरती पर हुई, लेकिन इतिहास को समझने में भी हम अक्सर यूरोपीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने लगते हैं। डॉ. मिश्र ने कहा कि इतिहास के अध्ययन में क्षेत्रीयता का विशेष महत्व है। लोक और मौखिक परंपराओं का भी इतिहास के साथ व्यापक तालमेल होना चाहिए। इन स्रोतों और परंपराओं के समन्वय से ही इतिहास का बेहतर संग्रह तैयार किया जा सकता है। उन्होंने जेन जी से भारत के इतिहासकारों की पुस्तकों को पढ़ने का आह्वान किया। कहा कि युवाओं को केवल मोबाइल पर उपलब्ध छोटे-छोटे पाठों और अधूरी जानकारियों पर निर्भर रहने के बजाय पुस्तकों और मूल स्रोतों का अध्ययन करना चाहिए। इससे इतिहास को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर समझने में मदद मिलेगी।