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जौहर सिर्फ आग में कूदना नहीं, पानी में डूबने के भी मिलते हैं प्रमाण, VIDEO

‘रानी पद्मिनी की ऐतिहासिकता...एक अध्ययन’ विषय पर शोध कर रहीं डॉ. दरक्शा ने जौहर प्रथा से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि अपने समय में जौहर को महिलाओं की प्रताड़ना के रूप में नहीं, बल्कि युद्ध के दौरान आत्मसम्मान की रक्षा से जोड़कर देखा जाता था। उनके अनुसार, जौहर की घटनाओं में महिलाओं के साथ बच्चों के भी आग में जाने के उल्लेख मिलते हैं। डॉ. दरक्शा ने बताया कि युद्ध के समय किले और नगर के पुरुष राजा या महाराजा के साथ युद्ध के मैदान में चले जाते थे। पुरुष सैनिकों की इस टुकड़ी को ‘साका’ कहा जाता था। युद्ध में पुरुषों के जाने के बाद किले के भीतर महिलाओं और बच्चों के सामने जौहर की स्थिति बनती थी। उन्होंने कहा कि इतिहास में जौहर के लिए केवल आग में प्रवेश करने के ही उल्लेख नहीं मिलते, बल्कि पानी में डूबकर जान देने के तथ्य भी सामने आते हैं। रणथंभौर के युद्ध का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि ‘जलदुर्ग’ नामक किले में रहने वाली महिलाएं किले के चारों ओर मौजूद पानी में कूद गई थीं। डॉ. दरक्शा के अनुसार, जौहर की ऐतिहासिक घटनाओं को उस दौर की सामाजिक, राजनीतिक और युद्ध परिस्थितियों के संदर्भ में समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों के अध्ययन में लोक परंपराओं के साथ उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों का भी गंभीरता से परीक्षण किया जाना चाहिए।

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