रॉबर्ट्सगंज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की तिथि का स्मरण नहीं, बल्कि आंतरिक पांच महाविकारों और अज्ञानता की जंजीरों से मुक्त होकर दिव्य चेतना को जागृत करने का पर्व है। यह बातें प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विवि के विकासनगर स्थित सेवाकेंद्र की मुख्य संचालिका बीके सुमन दीदी ने विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहीं। इस दौरान राधा-कृष्ण के रुप में सजे बच्चे आकर्षण का केंद्र रहे। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन जब भय, अहंकार, सत्ता और सामाजिक दबाव से घिर जाता है, तब उसके भीतर दिव्य चेतना के जन्म की संभावना पैदा होती है। श्रीकृष्ण का जीवन हमें हर परिस्थिति में समभाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है। यही जन्माष्टमी का आध्यात्मिक संदेश है। बीके सुमन दीदी ने कहा कि वर्तमान जीवन और समाज की परिस्थितियां सकारात्मक मनोवृत्ति के निर्माण के लिए प्रेरणा का माध्यम बन सकती हैं। ईश्वरीय ज्ञान और राजयोग के नियमित अभ्यास से मनुष्य अपने विचारों को सकारात्मक बनाकर जीवन में शांति, संतुलन और आत्मबल विकसित कर सकता है। बीके दीपशिखा बहन ने भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आध्यात्मिक रहस्य पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को इसके वास्तविक उद्देश्य से अवगत कराया। इस मौके पर डॉ.अनुपमा सिंह समेत अन्य श्रद्धालु शामिल रहे।