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श्रावस्ती में राप्ती का रौद्र रूप: कटान से नदी में समाते जा रहे किसानों के खेत

श्रावस्ती में राप्ती नदी का घटता जलस्तर किसानों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। हर दिन किसानों के खेत व फसल राप्ती की धारा में समाते जा रहे हैं। ऐसे में किसान बेबस नजर आ रहा है। वह अपनी कच्ची फसलों को काटकर मवेशियों के लिए चारा बनाने के लिए मजबूर है। वहीं, प्रशासन की ओर से कटान रोकने के लिए कोई इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं। तराई में राप्ती नदी के किनारे बसे गांव के किसानों को हर वर्ष बाढ व कटान की त्रासदी झेलनी पडती है। इस बार बारिश अच्छी न होने से किसान बाढ़ की विभीषिका से अब तक बचे हुए हैं, लेकिन राप्ती की धारा किसानों पर कहर बरपा रही है। विगत वर्षों की भांति इस बार भी किसानों के खेत राप्ती की धारा में विलीन होते जा रहे हैं। जमुनहा क्षेत्र में रविवार को ग्राम हसनापुर के पास राप्ती नदी का कटान होता दिखा। राप्ती के प्रवाह की ध्वनि में खेत के बड़े-बड़े टुकड़े छपाक की ध्वनि के साथ नदी में समाते जा रहे थे। वहीं, खेत को कटते देख किसानों की आंखे भी नम नजर आ रही थीं। हसनापुर निवासी करताराम ने बताया कि 10 वर्ष पूर्व आई बाढ में हसनापुर गाव पूरी तरह कट गया था। तभी से ग्रामीण सड़क की पटरी को ही अपना बसेरा बनाए हुए हैं। प्रशासन की ओर से अब तक ग्रामीणों को किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली है। इससे लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। करताराम, लल्लन प्रसाद, पहलवान, रिक्खी राम,अन्नू, रामउजागर, गिरवर प्रसाद, मोतीलाल सहित अन्य किसानों का करीब 15 बीघा खेत फसल सहित कट गया है। सलारू गांव निवासी सियाराम ने बताया कि उनका व उनके परिवार का करीब 10 से 12 बीघा खेत कट चुका है। प्रशासन की ओर से बीते वर्ष विभाग की ओर से महज बांस के जाल बनाकर उसमें रोड़े भरने का काम किया गया था। इसके बाद से अब तक कोई भी नहीं आया है। अब कटान से खेत तो नहीं बचा सकते लेकिन कच्ची फसलों को ही काटकर मवेशियों के लिए चारा बना रहे हैं। एसडीएम जमुनहा रवि प्रताप सिंह ने बताया कि टीम बनाकर कटान क्षेत्र का सर्वे कराया जा रहा है। संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर कटान का स्थाई समाधान कराया जाएगा।

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