रायबरेली के बछरावां क्षेत्र में सई नदी में उफान से लगभग डेढ़ दर्जन गांव पानी से घिर गए गए हैं। बाढ़ आने से रायबरेली और उन्नाव का संपर्क टूट गया है। घरों में पानी घुस गया है। हाल यह है कि स्कूल जाने वाले बच्चे अपने स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इस भयावह स्थिति से ग्रामीण दहशत में आ गए हैं। सई नदी के पानी ने बछरावां तथा उन्नाव जनपद के सीमावर्ती गांव में तबाही मचा रखी है। बढ़ते जलस्तर ने बछरावां क्षेत्र के लगभग एक दर्जन और उन्नाव जनपद के डेढ़ दर्जन गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है। हालत यह हो गए हैं कि सैकड़ो बीघे फसलें डूब गई है। गांव में पानी घुस गया है ग्रामीण इस विभीषिका से जूझ रहे थे। मजबूरन उन्हें सड़क पर अपने जानवर बांधने पड़ रहे हैं। सई नदी के बढ़ते जलस्तर से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। कंजेश्वर धाम से जुड़े गांव लोहरा मऊ की रहने वाली ज्ञानवती ने बताया कि उसकी भेंसै चरने गई थी और सई नदी के तेज बहाव में बह गईं। इसी तरह गांव के तमाम मवेशी अभी गायब है उनका पता नहीं चल सका है। नदी ने जो विकराल रूप दिखाया है उसकी वजह से सड़क में लगभग दो-दो फीट पानी भर गया है। सड़क कहां पर है यह दिखाई नहीं दे रही है अगर इसमें कोई भी राहगीर हिम्मत कर आ भी जाता है तो उसकी जान का खतरा है । क्षेत्र सहित अन्य गांव के तमाम छात्र-छात्राएं राजामऊ पढ़ने आते हैं लेकिन सड़क में पानी भर जाने के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। लोहरा मऊ का रहने वाले छात्र शिवा , राजू, मयंक ने बताया कि राजामऊ गांव में स्थित एक इंटर कॉलेज में वह लोग पढ़तेहैं। पानी भरने के कारण एक सप्ताह से वह स्कूल नहीं जा पा रहा है उसके अन्य साथी भी स्कूल नहीं आ पा रहे हैं। क्षेत्र का बरचंदा गांव चारों तरफ पानी से घिर चुका है। इसी तरह सिकंदर खेड़ा ,कुरी, मदा खेड़ा मैनाहारकटरा , कंजेश्वर, मुसाही खेड़ा, सिकंदरपुर खेड़ा, उदरहरा , कालूखेड़ा, सिंघन खेड़ा गांव में नदी का पानी भरने से विषैले जंतुओं ने गांव की ओर रुख कर दिया है। गांव के रहने वाले राम आधार गंगा प्रसाद गुरु भजन सहित मोहम्मद राजू ने बताया कि वह लोग रात भर दहशत के बीच रात बिता रहे हैं। अभी तक कोई अधिकारी गांव नहीं पहुंचा है।