जन्म से ही मूक-बधिर। शब्द और आवाज से पूरी तरह अनजान। ऐसे में कॉक्लियर इम्प्लांट ने जिंदगी बदल दी। अब ये बच्चे भी बोल-सुन सकते हैं। ये तकनीक भी बेहद आधुनिक हो गई है। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में शुरू हुई नाक, कान और गला रोग की सिजीकॉन-2026 में इम्प्लांट की नई विधियों के बारे में व्याख्यान होंगे। आयोजन अध्यक्ष डॉ. राजीव पचौरी ने बताया कि 1000 बच्चों में से 3-5 मूक-बधिर मिल रहे हैं। कॉक्लियर इम्प्लांट से बच्चे सुन और बोल सकते हैं। एक साल तक की उम्र तक सर्जरी होने से शत-प्रतिशत परिणाम हैं। वैसे 3 साल तक भी ये सर्जरी करा लेनी चाहिए। इसमें कान के अंदर डिवाइस लगाते हैं और बाहर इसका दूसरा पार्ट लगाते हैं। निजी अस्पतालों में इसका खर्च 8 लाख रुपये से अधिक है। केंद्र और राज्य सरकार की योजना में ये पूरी तरह से निशुल्क है और आगरा में सुविधा मिल रही है। इन्होंने बताया कि 203 बच्चों के ये इम्प्लांट कर चुके हैं। कोषाध्यक्ष डॉ. गौरव खंडेलवाल ने बताया कि इम्प्लांट में अब नई तकनीक और उपकरण आ गए हैं। इससे सर्जरी आसान होने के साथ ही आवाज, उच्चारण और सटीक सुनाई दे रहा है। सचिव मीनाक्षी बढ़ेरा ने बताया कि सर्जरी के बाद बच्चों की स्पीच थेरेपी की जाती है। इससे धीरे-धीरे बच्चा सामान्यतौर पर बोलने और सुनने लगता है। आयोजन अध्यक्ष डॉ. राजीव पचौरी ने बताया कि 2010 में पहली बार आगरा में 9 महीने की बच्ची का कॉक्लियर इम्प्लांट किया था। कक्षा 10 की छात्रा वह बच्ची सामान्य लोगों की तरह सुन और बोल सकती है। कार्यशाला में वह अपने अनुभव भी साझा करेगी। 6 सितंबर तक चलने वाली कार्यशाला में देश-विदेश के 500 विशेषज्ञ व्याख्यान देंगे।