महिलाओं में बांझपन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें 30 की उम्र के बाद शादी बड़ी वजह बनती जा रही है। महिलाओं में बढ़ती अन्य बीमारियों से भी डॉक्टर चिंतित हैं। ऑब्सटेट्रिक एंड गाइनोकोलाॅजिस्ट सोसाइटी की ओर से हरीपर्वत स्थित होटल में क्रिटिकल केयर इन ऑब्सटेट्रिक्स विषय पर हुई कार्यशाला में आगरा, अलीगढ़ मंडल की 500 से अधिक विशेषज्ञ शामिल हुईं। मुख्य वक्ता इंडियन कॉलेज ऑफ ऑब्सटेट्रिशियन एंड गाइनोकोलाॅजिस्ट की अध्यक्ष डॉ. शीला माने ने बताया कि बांझपन से करीब 20 फीसदी महिलाएं जूझ रही हैं। इसमें 50 फीसदी में अंडे कम बनने, उनकी खराब गुणवत्ता है। 15 फीसदी में पुरुष साथी के शुक्राणुओं से संबंधी परेशानी है। इसके अलावा संक्रमण एवं अन्य परेशानी हैं। अंडे कम बनने में देर से शादी बड़ी वजह है। शहरों में अधिकांश 30 की उम्र के बाद शादी हो रही है। इसके बाद एक-दो साल परिवार नियोजन करते हैं। इनका खानपान, फिटनेस भी खराब है। इससे अंडाणु कम बनते हैं, उनकी गुणवत्ता बेहतर नहीं है। इसके चलते गर्भधारण करने में दिक्कत हो रही है। 15 फीसदी पुरुष साथी की वजह से बांझपन है। इसमें उनके शुक्राणु कम-खराब होने, धूम्रपान, अल्कोहल समेत अन्य वजह से ये परेशानी बन रही है। डॉ. साधना गुप्ता और डॉ. ऋचा सिंह ने प्रसव बाद आने वाले अधिक रक्तस्राव में दवाओं के बारे में बताया। डॉ. सरोज सिंह, डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा और डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप में इलाज के बारे में जानकारी दी। अध्यक्ष डॉ. रजनी पचौरी, सचिव डॉ. मीनल जैन, डॉ. शिखा सिंह और डॉ. निधि गुप्ता ने एक्यूट फैटी लिवर, थायराइड, मधुमेह समेत अन्य बीमारियां बढ़ने पर भी चिंता जताते हुए महिलाओं को बीमारी के नजरअंदाज न करने पर जोर दिया। डॉ. सविता त्यागी, डॉ. सीमा सिंह, डॉ. रुचिका गर्ग, डॉ. आरती गुप्ता, डॉ. संगीता पंजवानी, डॉ. किया पाराशर आदि मौजूद रहीं।