शिमला के शांकली क्षेत्र में ढाई साल की मासूम बच्ची पर आवारा कुत्तों द्वारा किए गए गंभीर हमले के विरोध में आज महापौर कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया गया। बच्ची को हमले में गंभीर चोटें आई हैं और वह उपचाराधीन है। धरने में गदर फ्रंट के संयोजक रवि कुमार दलित, मदद सेवा ट्रस्ट के संयोजक विकास तथा मासूम बच्ची के दादा सहित अन्य लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर गदर फ्रंट ने कहा कि यह घटना केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं है, बल्कि शिमला शहर में नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर सवाल है। शिमला के सिमिट्री सहित विभिन्न क्षेत्रों में कुत्तों और बंदरों के हमलों की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। ऐसे में नगर निगम और प्रशासन को इस समस्या का स्थायी समाधान तलाशने की आवश्यकता है। गदर फ्रंट ने कहा कि बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और आम नागरिकों को अपने ही मोहल्लों में भय के माहौल में नहीं रहना चाहिए। आवारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए मानवीय दृष्टिकोण के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। गदर फ्रंट के संयोजक रवि कुमार दलित ने कहा कि किसी भी घटना के बाद केवल आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। नगर निगम को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर प्रभावी कदम उठाने चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में किसी अन्य मासूम को ऐसी घटना का शिकार न होना पड़े। धरने के दौरान मासूम बच्ची के दादा ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए प्रशासन और नगर निगम से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। गदर फ्रंट ने मांग की कि शिमला शहर में कुत्तों और बंदरों के हमलों से प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक सर्वेक्षण किया जाए, आक्रामक पशुओं के संबंध में तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए तथा दीर्घकालिक समाधान के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए। गदर फ्रंट ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी पशु के खिलाफ नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और प्रशासन की जवाबदेही के लिए है। मांग स्पष्ट है—शिमला के नागरिकों और खासकर मासूम बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जमीन पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।