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मोगा सरकारी अस्पताल में 8 साल से बंद फायर सिस्टम, हाइड्रेंट से सामान गायब

Nivedita Updated Fri, 04 Sep 2026 03:03 PM IST

पंजाब सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं और मरीजों की सुरक्षा को लेकर मोगा सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले के प्रमुख अस्पतालों में शामिल मोगा सिविल अस्पताल में मोगा के अलावा आसपास के क्षेत्रों और जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। मरीजों की सुविधा के लिए अलग-अलग विभागों की अलग-अलग बिल्डिंग हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा के लिए लगाया गया ऑटोमेटिक फायर सेफ्टी सिस्टम लंबे समय से बंद पड़ा है।सवाल है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा यह सिस्टम कब चालू होगा और किसी हादसे की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी। जानकारी के अनुसार, पंजाब हेल्थ कॉरपोरेशन सिस्टम की ओर से करीब 7-8 साल पहले लाखों रुपये की लागत से अस्पताल में ऑटोमेटिक फायर सेफ्टी सिस्टम लगाया गया था। इमरजेंसी वार्ड, जच्चा-बच्चा वार्ड समेत कई विभागों में पाइप, नोजल और हाइड्रेंट प्वाइंट लगाए गए थे। वर्तमान में कई जगह पाइप और नोजल तो दिखाई देते हैं, लेकिन सिस्टम को संचालित करने के लिए जरूरी हैंडल और कई हाइड्रेंट प्वाइंट की फिटिंग तक गायब है। ऐसे में आग लगने की स्थिति में यह सिस्टम कितना कारगर होगा, इस पर सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल शहर के मुख्य बाजार के बीच स्थित है, जहां दिनभर भारी ट्रैफिक रहता है। आपात स्थिति में एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड को अस्पताल तक पहुंचने में भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में अस्पताल का फायर सेफ्टी सिस्टम पूरी तरह चालू और कार्यशील होना बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि वर्ष 2025 में पंजाब के सेहत मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने मोगा सिविल अस्पताल का दौरा किया था। इस दौरान मीडिया की ओर से अस्पताल के बंद पड़े ऑटोमेटिक फायर सिस्टम को लेकर सवाल किया गया था। मंत्री ने 2 महीने में सिस्टम चालू करवाने की बात कही थी, लेकिन करीब डेढ़ साल बीतने के बाद भी स्थिति में बदलाव नहीं आया। फायर अधिकारी रविंदर सिंह ने बताया कि करीब दो महीने पहले सिविल अस्पताल की ओर से उनके कार्यालय को पत्र भेजकर अस्पताल में लगे फायर सेफ्टी सिस्टम की जांच करवाने की मांग की गई थी। इसके बाद फायर विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पूरे सिस्टम की जांच की। जांच के दौरान फायर सेफ्टी सिस्टम में कई कमियां पाई गईं। कई जगहों पर जरूरी सामान मौजूद नहीं था, जबकि कुछ उपकरण टूटे हुए मिले। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन को पूरी जानकारी दे दी गई है और जो भी सामान कम या खराब है, उसे पूरा करवाने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि जब अस्पताल प्रशासन की ओर से सभी कमियां दूर कर दी जाएंगी, उसके बाद फायर सेफ्टी सिस्टम को दोबारा चालू कर इसकी टेस्टिंग की जाएगी। इसके साथ ही मॉकड्रिल करवाने के बाद ही आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर फायर सेफ्टी एनओसी जारी की जाएगी। इस मामले में जब अस्पताल के उच्च अधिकारियों से जानकारी लेने की कोशिश की गई तो कोई भी अधिकारी इस संबंध में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ। वहीं, संबंधित अधिकारी अपने दफ्तर से गैरहाजिर मिले।

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