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Punjab Power Crisis: बिजली संकट गहराया, 16,500 MW के पार मांग; कोयले की कमी से लंबे कट

Mon, 14 Sep 2026 02:11 PM IST
Chandra Prakash Neeraj Video Desk Amar Ujala Dot Com

पंजाब में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी और यूनिटों में तकनीकी खराबी से उत्पादन प्रभावित है। मानसून की बारिश कम होने से खेतों में ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ी है। उमस भरी गर्मी के कारण घरेलू बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर है। मांग और उपलब्धता में बड़े अंतर के कारण उद्योगों से लेकर खेतीबाड़ी क्षेत्र और शहरों व गांवों में लंबे कट लगाए जा रहे हैं। इससे उद्योगपतियों किसानों और आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है।छह सितंबर को छोड़कर सितंबर में बिजली की मांग लगातार 16 हजार मेगावाट से अधिक रही। एक सितंबर को 16116 मेगावाट, दो को 16530, तीन को 16485, चार को 16182, पांच को 16254, सात को 16219, आठ और नौ को 16505, 10 को 16432, 11 को 16619 और 12 सितंबर को 16519 मेगावाट मांग रही। शनिवार को 16519 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग के मुकाबले पावरकाम को सभी स्रोतों से केवल 4503 मेगावाट बिजली उपलब्ध हुई। करीब 2173 मेगावाट उत्पादन प्रभावित रहा। तकनीकी खराबी से राजपुरा का 700 मेगावाट का एक नंबर और तलवंडी साबो का 660 मेगावाट का दो नंबर यूनिट बंद रहा। 840 मेगावाट क्षमता वाले रोपड़ थर्मल से केवल 488 मेगावाट बिजली मिली। 920 मेगावाट क्षमता वाले लहरा मुहब्बत प्लांट से 804 मेगावाट उत्पादन हुआ। पावरकाम अधिकारियों के अनुसार सर्दियों में रोपड़ और लहरा मुहब्बत थर्मलों का सालाना रखरखाव नहीं हुआ था। अब तकनीकी खराबी के कारण यूनिट पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे। बांधों में पानी की कमी से रणजीत सागर के 300 मेगावाट के दो और यूबीडीसी के 45 मेगावाट के तीन यूनिट बंद हैं।

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