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'10 करोड़ मिलें, फिर भी तानपुरा नहीं दूंगा’: सिद्धपुर पहुंचे गायक सुनील लोधी ने सुनाई संघर्ष की कहानी, जानें

Sun, 06 Sep 2026 08:51 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर

सिद्धपुर में भव्य प्रादेशिक मटकी फोड़ आयोजन की तैयारियों के बीच उस समय माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया, जब ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई’ से देशभर में पहचान बनाने वाले सागर जिले के कलाकार सुनील लोधी ने अपनी आवाज में भक्ति के सुर छेड़े। अपने पुराने वाद्य यंत्र के साथ हनुमान भक्ति से जुड़ी पंक्तियां गाते ही वहां मौजूद लोग श्रद्धा और भावनाओं से भर उठे। इस दौरान उन्होंने अपनी जिंदगी के संघर्ष, संगीत सीखने के अनूठे सफर और सफलता के पीछे हनुमान जी की कृपा की कहानी भी साझा की।

'जो कुछ हुआ, हनुमान जी की कृपा से हुआ'
सुनील लोधी ने कहा कि सिद्धपुर आने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने बताया कि ‘हनुमान अंश’ फिल्म में उनका गाना आने के पीछे संघर्ष और सीख से भरी एक लंबी कहानी है। आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे हनुमान जी की कृपा, उनका आशीर्वाद और दर्शकों का प्रेम है। उन्होंने देशवासियों और अपने सभी श्रोताओं का दिल से आभार जताया।

न संगीत की क्लास ली, न कोई गुरु रहा
अपनी संगीत यात्रा के बारे में सुनील ने बताया कि उन्होंने संगीत सीखने के लिए कभी कोई औपचारिक क्लास नहीं ली और न ही उनका कोई संगीत गुरु रहा। उन्होंने महान गायिका लता मंगेशकर को अपनी प्रेरणा बताया। सुनील ने कहा कि लता जी के गीतों से उनका गहरा लगाव रहा और उन्हीं को सुनते-सुनते उन्होंने गायकी की बारीकियां सीखीं।

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उन्होंने बताया कि स्टारमेकर ऐप और यूट्यूब पर कराओके संगीत सुनकर गीतों के बोल, गायकी का अंदाज और सुरों को समझने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भले ही उन्होंने ज्यादा पढ़ाई नहीं की, लेकिन संगीत के प्रति लगाव ने उन्हें लगातार सीखने और अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया। उनके लिए संगीत का सफर किसी औपचारिक प्रशिक्षण से ज्यादा निरंतर अभ्यास और लगन का रहा।

जब सुनील ने छेड़ा 'हनुमान' का सुर
प्रेस से चर्चा के दौरान आग्रह किए जाने पर सुनील लोधी ने अपना चर्चित भजन गाकर सुनाया। अपने साथ रखे पारंपरिक वाद्य यंत्र के साथ उन्होंने ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई’ की प्रस्तुति दी। उनकी आवाज और वाद्य यंत्र की धुन ने माहौल को आध्यात्मिक बना दिया। भजन में भक्त का अपने आराध्य पर पूर्ण विश्वास और जीवन की नैया भगवान के हवाले करने की भावना झलकती है।

'10 करोड़ मिलें, फिर भी तानपुरा नहीं दूंगा'
अपने पारंपरिक वाद्य यंत्र के प्रति सुनील का जुड़ाव भी भावुक करने वाला रहा। जब उनसे पूछा गया कि क्या आज भी वही साउंड और बाजा उनके पास है, तो उन्होंने कहा कि यह यंत्र उनके लिए सिर्फ संगीत का साधन नहीं, बल्कि बचपन से जुड़ी उनकी साधना का हिस्सा है। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि यदि कोई इसके बदले उन्हें 10 करोड़ रुपये भी दे, तब भी वह अपना तानपुरा नहीं देंगे। उनके लिए यह वाद्य यंत्र धन से कहीं अधिक अनमोल है।

'बुंदेलखंड की माटी का छोटा-सा कलाकार हूं'
अपनी पहचान को लेकर भी सुनील लोधी बेहद विनम्र नजर आए। उन्होंने खुद को बुंदेलखंड की माटी से निकला एक छोटा-सा कलाकार बताया। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में उनसे कहीं बड़े और स्थापित गायक हैं और वह उनकी बराबरी करने की बात भी नहीं कर सकते। उनके अनुसार उनकी सबसे बड़ी ताकत दर्शकों का प्रेम और हनुमान जी का आशीर्वाद है।

जन्माष्टमी पर सिद्धपुर आने का जताया आभार
सुनील ने जन्माष्टमी आयोजन के लिए बजरंग दल के प्रांत टोली सदस्य विवेक राठौर और नपा अध्यक्ष प्रिंस राठौर का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यहां बुलाया जाना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने सीहोरवासियों को भी धन्यवाद दिया। सुनील ने कहा कि सिद्धपुर का यह आयोजन उनके लिए केवल मंच पर प्रस्तुति देने का अवसर नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और हनुमान जी की भक्ति से जुड़ने का भी अवसर है।

'महोत्सव का उद्देश्य हिंदुओं को एक छत के नीचे लाना'
आयोजन से जुड़े बजरंग दल के प्रांत टोली सदस्य विवेक राठौर ने कहा कि यह केवल मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं है। इसका उद्देश्य हिंदुओं और सनातनियों को एक छत के नीचे लाना है। उन्होंने सहस्त्र महाचंडी यज्ञ का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी विभिन्न समाजों के लोगों को एक साथ लाने का प्रयास किया गया था। इसी क्रम में जन्माष्टमी के इस आयोजन को भी सामाजिक एकता से जोड़ा गया है।

'अलग-अलग जातियां, लेकिन हम सब हिंदू एक'
विवेक राठौर ने कहा कि समाज में अलग-अलग जातियों के लोग हैं, लेकिन सभी हिंदू एक हैं। इसी भावना के साथ सुनील लोधी को आयोजन में आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि कई अन्य कलाकारों से भी बातचीत चल रही थी, लेकिन सुनील लोधी को इसलिए चुना गया क्योंकि उनकी कला और भक्ति लोगों को जोड़ने का काम करती है।

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