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दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर पत्थरबाजी: पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा, रात का सफर हुआ जोखिमभरा

Thu, 24 Sep 2026 07:28 PM IST
झाबुआ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झाबुआ

दिल्ली-मुंबई 8 लेन एक्सप्रेस-वे पर रात के समय सफर करना अब वाहन चालकों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। दो जिलों के पुलिस अधीक्षकों और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उच्च स्तरीय बैठकें करने के बावजूद, बदमाशों के हौसले बुलंद हैं और पत्थरबाजी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

एक्सप्रेस-वे पर रात के समय यात्रा करना अब जोखिमभरा हो गया है। वाहन चालकों पर पत्थरबाजी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। दो जिलों के पुलिस अधीक्षकों और एनएचएआई अधिकारियों द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे की रणनीति बनाने के बावजूद पत्थरबाजी करने वालों में कार्रवाई का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है। रात के अंधेरे में एक्सप्रेस-वे से गुजरने वाले वाहनों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

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बीती रात एक बार फिर गुजरात की कार पर पत्थर फेंकने की घटना सामने आई है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। रतलाम जिले के बड़ोदा निवासी लखन जाट बुधवार की रात अपनी कार से एक्सप्रेस-वे से गुजर रहे थे, इसी दौरान अज्ञात बढ़माशों ने उनकी कार पर पत्थर फेंके। पत्थर लगने से कार के पीछे का शीशा टूट गया। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। घटना के तुरंत बाद पीड़ित ने धामनोद टोल प्लाजा पहुंचकर इसकी शिकायत दर्ज कराई, जिससे रात में सफर करने वाले यात्रियों में दहशत का माहौल है। उल्लेखनीय है कि 8 लेन एक्सप्रेसवे सीसीटीवी कैमरो से भी निगरानी की जाती है, बावजूद इसके आज तक कोई भी बदमाश सीसीटीवी से भी पकड़ में नहीं आया है।

प्रशासन के दावों के विपरीत, इस आधुनिक 8 लेन एक्सप्रेस-वे पर जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद आज तक एक भी बदमाश कैमरे की पकड़ में नहीं आ सका है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस गंभीर मुद्दे पर सोशल मीडिया के जरिए सरकार को घेरा है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि झाबुआ-रतलाम बॉर्डर के हिस्से में ऐसी घटनाएं आम हो चुकी हैं और ठोस कार्रवाई न होने के कारण अब इनके वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लगता है पहले दोनों राज्यों के गृहमंत्री मिलेंगे, फिर बैठक होगी और रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी, तब जाकर शायद कोई रणनीति बनेगी।

झाबुआ जिले में इस एक्सप्रेसवे की स्थिति प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी हो गई है, इस एक्सप्रेस वे पर आसानी से बच्चों को खेलते देखा जा सकता है। मवेशी को घूमते देखा जा सकता है, वहीं प्रतिबंधित दोपहिया वाहनों को भी चलते हुए देखा जा सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि लगातार हो रही इन वारदातों के पीछे किसका हाथ है और पुलिस प्रशासन कब तक इन बदमाशों को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेज पाता है।

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