फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एमपी: बैतूल में अल्पवृष्टि के बाद आंधी-बारिश की मार, सैकड़ों एकड़ में मक्का की फसल जमीन पर बिछी

Sat, 19 Sep 2026 09:04 PM IST
बैतूल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बैतूल

बैतूल जिले के किसान इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ अल्पवृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा रखी है, वहीं दूसरी ओर बेमौसम आंधी-बारिश ने बची-खुची फसल को भी नुकसान पहुंचा दिया है। जिले में इस साल मानसून कमजोर रहा है। आंकड़ों के अनुसार, बैतूल में अब तक औसत से करीब 15 इंच कम बारिश दर्ज की गई है। कम बारिश के कारण खरीफ की फसलें पहले से ही कमजोर स्थिति में थीं। किसानों को उम्मीद थी कि जो थोड़ी-बहुत फसल बची है, उससे किसी तरह सालभर का गुजारा हो जाएगा, लेकिन प्रकृति की मार ने उनकी यह उम्मीद भी तोड़ दी। ताजा मामला महाराष्ट्र सीमा से सटे कावला गांव का है। बताया जा रहा है कि अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। आंधी इतनी तेज थी कि देखते ही देखते सैकड़ों एकड़ में खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई। आंधी-बारिश का सबसे ज्यादा असर मक्का की फसल पर पड़ा है। कावला और आसपास के गांवों में मक्का की फसल पकने की कगार पर थी, लेकिन तेज हवा के कारण पूरे खेतों में फसल तबाह हो गई। खेतों में मक्का के पौधे जड़ सहित उखड़ गए या बीच से टूटकर गिर गए।

पढे़ं: 'भ्रष्ट परीक्षा व्यवस्था का खामियाजा बच्चे भुगत रहे', राहुल के भाषण की पांच बड़ी बातें किसानों का कहना है कि इस बार उन्हें प्रति एकड़ 30 से 35 हजार रुपये तक का नुकसान हुआ है। कुल नुकसान लाखों रुपये में बताया जा रहा है। किसानों के मुताबिक, यह स्थिति सिर्फ कावला गांव तक सीमित नहीं है। खंडवृष्टि के कारण बैतूल के कई इलाकों में इसी तरह फसलों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आ रही है। जहां बारिश हो रही है, वहां जरूरत से ज्यादा बारिश हो रही है, जबकि कई इलाकों में अब भी सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। बारिश के इस असमान वितरण ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। अब प्रभावित किसान प्रशासन से राहत की मांग कर रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि राजस्व और कृषि विभाग की टीम जल्द से जल्द गांव पहुंचकर फसलों का सर्वे करे। उनका कहना है कि समय पर सर्वे और मुआवजा नहीं मिला तो उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा, क्योंकि उनकी पूरे साल की मेहनत और लागत इसी फसल पर लगी हुई है। अब किसानों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। देखना होगा कि फसल नुकसान के सर्वे की प्रक्रिया कितनी जल्दी शुरू होती है और किसानों को मुआवजे के रूप में कितनी राहत मिल पाती है।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें