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चीनी के बढ़ते दाम पर ये क्या बोल गए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय?

Thu, 27 Aug 2026 01:33 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने चीनी की बढ़ती-घटती कीमतों को लेकर ऐसा बयान दिया है, जो इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। बुधवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने चीनी की कीमतों पर अपनी राय रखते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि चीनी के दाम और बढ़ें। विजयवर्गीय ने यह बात कुछ हद तक मजाकिया अंदाज में कही, लेकिन इसके पीछे उन्होंने स्वास्थ्य से जुड़ी अपनी सोच भी बताई। उन्होंने कहा कि आजकल बहुत से लोग मीठा खाना पसंद नहीं करते और वह खुद भी मीठा नहीं खाते हैं। चीनी के मौजूदा दामों का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि कुछ दिन पहले चीनी की कीमत करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, लेकिन अब यह घटकर लगभग 60 रुपये प्रति किलो हो गई है। उन्होंने संभावना जताई कि आने वाले दिनों में चीनी के दाम और कम हो सकते हैं। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “अच्छा है, मैं तो कहता हूं कि खूब महंगी हो जाए।” उनके इस बयान के बाद चीनी की कीमतों को लेकर उनकी टिप्पणी सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई। हालांकि, कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी बात को केवल महंगाई या बाजार की कीमतों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने बच्चों और उम्रदराज लोगों के लिए चीनी के सेवन को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए राशन की दुकानों पर चीनी सस्ती मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें जरूरत के मुताबिक चीनी उपलब्ध हो सके। वहीं, 40 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए उन्होंने ज्यादा चीनी का सेवन उचित नहीं माना। उनके बयान का एक प्रमुख संदेश यह था कि उम्र बढ़ने के साथ लोगों को अपने खान-पान और खासकर मीठे के सेवन पर नियंत्रण रखना चाहिए। विजयवर्गीय ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि वह मीठा नहीं खाते हैं। उनके बयान को एक तरफ चीनी की कीमतों पर टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ इसे लोगों को अत्यधिक चीनी के सेवन से बचने की सलाह के रूप में भी देखा जा सकता है। हालांकि, “चीनी खूब महंगी हो जाए” वाली उनकी टिप्पणी ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। आम तौर पर जहां उपभोक्ता आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमत कम होने की उम्मीद करते हैं, वहीं किसी मंत्री का चीनी महंगी होने की इच्छा जताना अलग तरह की प्रतिक्रिया पैदा करता है। यही वजह है कि उनका यह बयान मीडिया में सुर्खियों में आया और लोग इसके अलग-अलग अर्थ निकाल रहे हैं। कुल मिलाकर, कैलाश विजयवर्गीय की टिप्पणी में चीनी की कीमतों, बच्चों के लिए सस्ती उपलब्धता और 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों द्वारा सीमित चीनी सेवन—तीनों मुद्दों का जिक्र हुआ। उनके बयान ने चीनी की कीमतों के साथ-साथ स्वस्थ खान-पान और उम्र के अनुसार आहार में बदलाव की जरूरत पर भी बहस छेड़ दी है।



 

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