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मंडी: गंभीर बीमारी के बीच 104 परिवारों को हर माह तीन हजार की मदद, सहारा योजना बनी राहत

गंभीर बीमारी का इलाज लंबे समय तक चले तो दवाइयों और देखभाल का खर्च परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती है। ऐसे परिवारों के लिए मुख्यमंत्री सहारा योजना आर्थिक संबल का काम कर रही है। मंडी जिले के सरकाघाट उपमंडल में कैंसर, पक्षाघात और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 104 मरीजों को इस योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को उपचार और देखभाल के लिए 3,000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। सहायता की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाती है। मुख्यमंत्री सहारा योजना के तहत निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले लोगों को विभिन्न गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों के लिए सहायता मिल सकती है। इनमें पार्किन्सोनिज्म, घातक कैंसर, पक्षाघात से स्थायी दिव्यांगता, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया और गंभीर गुर्दे की बीमारी जैसी स्थितियां शामिल हैं। योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को आर्थिक सहारा देना है, जिन्हें बीमारी के उपचार के साथ नियमित देखभाल और दवाइयों पर भी खर्च करना पड़ता है। सरकाघाट तहसील के कंडयोल निवासी रतन सिंह की पत्नी कमला देवी कैंसर से पीड़ित हैं। आईजीएमसी शिमला में उपचार के दौरान उनकी बीमारी का पता चला। रतन सिंह के अनुसार, योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता से परिवार को दवाइयों और मरीज की देखभाल से जुड़े खर्च में मदद मिल रही है। नवाही की सुमन कुमारी की ननद सरोज पक्षाघात से पीड़ित हैं। परिवार को मुख्यमंत्री सहारा योजना के बारे में आशा कार्यकर्ता के माध्यम से जानकारी मिली। इसके बाद पात्रता पूरी होने पर परिवार को योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ। ऐसे परिवारों के लिए नियमित मिलने वाली राशि उपचार के दौरान होने वाले छोटे-बड़े खर्चों को संभालने में मददगार साबित हो रही है। तहसील कल्याण अधिकारी पूनम शर्मा के अनुसार, सरकाघाट उपमंडल में योजना के कुल 104 लाभार्थियों में 56 बलद्वाड़ा और 48 सरकाघाट तहसील से हैं। उन्होंने बताया कि निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले परिवार इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। चार लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले पात्र परिवार भी योजना के दायरे में आ सकते हैं। गंभीर बीमारी से जूझ रहे परिवारों के लिए हर महीने मिलने वाली यह सहायता भले ही इलाज का पूरा खर्च न उठाती हो, लेकिन दवाइयों और रोजमर्रा की देखभाल के खर्च में नियमित आर्थिक सहारा जरूर देती है।

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