मायके की दहलीज पर बेटियों की वापसी और माता के दरबार में आस्था का संगम। कुल्लू के माता पार्वती चोंगासन चौंग मंदिर में पारंपरिक धूप देने की रस्म श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाई गई। इस विशेष अवसर पर क्षेत्र की विवाहित बेटियां भी मायके पहुंचीं और सजी हुई पूजा की थालियां लेकर माता पार्वती के दरबार में पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। महिलाएं और बेटियां पारंपरिक तरीके से पूजा की थालियां सजाकर मंदिर पहुंचीं। माता के दरबार में धूप अर्पित करने के बाद महिलाओं ने माता पार्वती की स्तुति की और परिवार की सुख-शांति, खुशहाली और समृद्धि की कामना की। इस धार्मिक परंपरा की सबसे खास बात यह है कि शादी के बाद दूसरे क्षेत्रों में रहने वाली बेटियां भी इस अवसर पर मायके लौटती हैं। इसके बाद परिवार की अन्य महिलाओं के साथ माता के दरबार में पहुंचकर परंपरा में भाग लेती हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार माता पार्वती को धूप अर्पित करने की परंपरा परिवार की खुशहाली और सुख-समृद्धि से जुड़ी हुई है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता पार्वती अपने भक्तों और उनके परिवार की रक्षा करती हैं। इसी आस्था के चलते इस रस्म में महिलाओं और बेटियों की विशेष भागीदारी रहती है। माता पार्वती को क्षेत्र की आराध्य देवी माना जाता है, जबकि भगवान महादेव बिजली महादेव में विराजमान हैं। इसी धार्मिक मान्यता और परंपरा के चलते बिजली महादेव क्षेत्र की महिलाएं भी चौंग मंदिर पहुंचती हैं और माता पार्वती को धूप अर्पित करती हैं। मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान माहौल पूरी तरह भक्तिमय रहा। श्रद्धालुओं ने माता के समक्ष परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। आस्था, परंपरा और मायके से बेटियों के भावनात्मक जुड़ाव ने इस धार्मिक आयोजन को खास बना दिया।