सोनीपत। हाइटेंशन लाइनों से प्रभावित किसानों ने मुआवजे और जमीनों के बाजार मूल्य में संशोधन की मांग को लेकर बुधवार को जिला मुख्यालय पर पड़ाव शुरू कर दिया। किसानों ने छोटूराम धर्मशाला के सामने एकत्रित होकर थालियां बजाते हुए जिला मुख्यालय तक मार्च निकाला। किसानों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए मांगों पर जल्द कार्रवाई करने की मांग की। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों का समाधान नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों का आरोप है कि केंद्र सरकार की ओर से हाइटेंशन बिजली लाइनों के मुआवजे को लेकर नई गाइडलाइंस जारी किए जाने के बावजूद सरकार ने अभी तक इनके अनुरूप अधिसूचना जारी नहीं की है। इसके अलावा नरेला-सीकर और सिवानी-सोनीपत हाइटेंशन लाइनों से प्रभावित जिले के गांवों की जमीनों के बाजार मूल्य में भी सुधार नहीं किया गया है। किसानों का कहना है कि इससे प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा मिलने में परेशानी हो रही है। केंद्रीय मंत्री के सामने रखी थीं 10 मांगें किसान नेता अभिमन्यु कुहाड़ ने बताया कि 3 सितंबर को किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुग्राम में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल से मुलाकात की थी। इस दौरान हाइटेंशन लाइनों के लिए उचित मुआवजे सहित खेती-किसानी से जुड़ी 10 मांगें रखी गई थीं। किसान नेताओं के अनुसार, बैठक में केंद्रीय मंत्री ने हाइटेंशन लाइनों के मुआवजे के लिए नई नीति लाने व सोनीपत, जींद और भिवानी सहित विभिन्न जिलों में जमीनों का बाजार मूल्य निर्धारित करने की प्रक्रिया में हुई त्रुटियों को दूर कराने का आश्वासन दिया था। किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार ने 6 अक्तूबर को हाइटेंशन लाइनों के मुआवजे के संबंध में नई गाइडलाइंस जारी की थीं। उनके अनुसार, नई व्यवस्था से मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सकती है। इसके बावजूद राज्य सरकार की ओर से नई गाइडलाइंस के अनुरूप अधिसूचना जारी नहीं की गई। किसानों ने मांग की कि सरकार बिना देरी किए नई व्यवस्था लागू करे, ताकि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा मिल सके। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप किसान नेताओं ने बताया कि 7 अक्तूबर को किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखी थीं। उस दौरान मुख्यमंत्री ने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था। किसानों का आरोप है कि इसके बाद भी जमीनों के बाजार मूल्य में संशोधन को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। किसान नेताओं ने कहा कि प्रभावित गांवों की जमीनों का बाजार मूल्य निर्धारित करने में हुई त्रुटियों को दूर करना जरूरी है। उन्होंने राज्य सरकार से केंद्र की नई गाइडलाइंस के अनुरूप अधिसूचना जारी करने और बाजार मूल्य संशोधित करने के लिए आवश्यक निर्देश देने की मांग की। पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र लौटाने की घोषणा सरकार के रवैये से नाराज किसानों ने अपने सम्मान लौटाने का भी ऐलान किया। प्रगतिशील किसान युद्धविंदर सिंह ने कहा कि वह चार वर्ष पहले अच्छी बागवानी के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की ओर से दिया गया 51 हजार रुपये का पुरस्कार वापस लौटाएंगे। वहीं, बुजुर्ग किसान सुंदर कोहाड़ ने भी सरकार और प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए अपना प्रशस्ति पत्र लौटाने की घोषणा की। किसान नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाना और जमीनों के बाजार मूल्य में विसंगतियों को दूर कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। पड़ाव में बेदी दहिया, शक्ति दहिया, प्रवीण दहिया, इंद्रजीत राणा, देवेंद्र गहलावत, रविंद्र मलिक, विकास राणा, बलराज दहिया, बिजेंद्र दहिया, दिलबाग भी मौजूद रहे।