पानीपत। शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन मंगलवार को सुबह पांच बजे ही श्रद्धालु देवी मंदिर में पहुंचे और मां चंद्रघंटा के दर्शन कर पूजन किया। देवी मंदिर सुबह से रात तक माता के जयकारों से गूंजता रहा। मंदिर में हर रोज माता का ताजा फूलों से श्रृंगार किया जा रहा है और फूल बंगले बन रहे हैं। श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर मनोकामना पूर्ण होने के लिए विशेष पूजा की और मन्नत के धागे बांधे। वहीं मंदिर में महिला मंडली द्वारा भजन कीर्तन किया जा रहा है और रात को रामलीला मंचन हो रहा है और मेला लगा हुआ है जो विशेष रूप से बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मंदिर के पुजारी आचार्य लालमणि पांडेय ने बताया कि मां चंद्रघंटा शांति और संगीत का प्रतीक मानी जाती हैं। मंदिर के कपाट सुबह पांच बजे श्रद्धालुओं के लिए खोले गए और आरती की गई। उसके बाद दोपहर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही रही और 12 बजे मंदिर के कपाट बंद किए गए। उसके बाद शाम को चार बजे कपाट खोले और छह बजे आरती की गई। आरती से पहले महिला मंडली ने भजन-कीर्तन किया। इस दौरान मंदिर में पहुंच रहे श्रद्धालुओं ने मन्नतपूरी होने के लिए धागे बांधे और कुछ ने मन्नत पूरी होने के बाद धागे भी खोले। मंदिर के प्रधान काकू बंसल ने बताया कि मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था के लिए समिति के सदस्य और पुलिसकर्मी पूरा दिन-रात मंदिर में तैनात रहते हैं। नवरात्र में सप्तमी और अष्टमी को ज्यादा भीड़ रहती है। इन दिनों गांव से भी लोग पूजा करने के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में रात को रामलीला का मंचन किया जा रहा है और मंदिर के बाहर मेला लगा हुआ है जिसमें बच्चों के लिए खिलौने और अन्य कई प्रकार का सामान बिक रहा है। रामलीला देखने के लिए सैंकड़ों लोग हर रोज मंदिर पहुंच रहे हैं।