केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम में मानसून के दौरान हुए जलभराव को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखा है। उन्होंने सिंचाई विभाग पर गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए तत्काल विजिलेंस जांच की मांग की है। मंत्री ने कहा कि विभाग की गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली के कारण शहर के बड़े हिस्से में जलभराव हुआ, जिससे सरकार की छवि धूमिल हुई है। 2 सितंबर, 2026 को गुरुग्राम में जलभराव की समस्या पर एक बैठक हुई थी। इस बैठक में जीएमडीए, नगर निगम, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे। शहरी विकास सलाहकार और पूर्व मुख्य सचिव डीएस देसी से चर्चा के दौरान यह जानकारी सामने आई कि गुरुग्राम के प्राकृतिक बरसाती नालों और जल निकासी के रास्तों को अतिक्रमण मुक्त रखने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। बैठक में अधिकारियों ने बताया था कि सिंचाई विभाग के पास प्राकृतिक मुख्य नालों और ड्रेन का भू-स्वामित्व है। पिछले सात वर्षों में विभाग ने कैनल ड्रेनेज एक्ट के तहत विभिन्न बिल्डरों को सैकड़ों नोटिस जारी किए। हालांकि, इन नोटिसों के बावजूद विभाग ने कब्जों को हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की।