गुरुग्राम में पराली और खुले में कचरा जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने किसानों को जागरूक किया। किसान भवन में आयोजित अभियान के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि धान और गेहूं की पराली जलाना प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। किसानों को पराली जलाने के बजाय आधुनिक मशीनों से उसके प्रबंधन के तरीके भी बताए गए। अभियान में किसान एसोसिएशन के सदस्यों के साथ हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड (एचएसएएमबी) और मार्केट कमेटी के अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने बताया कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को खराब करता है। इससे सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा, खेतों में पराली जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व और उसकी उर्वरता बनाए रखने वाले सूक्ष्मजीव भी प्रभावित होते हैं।