AI से पीएचडी थीसिस लिखने वालों की खैर नहीं: UGC ने उठाया बड़ा कदम, दर्जनों छात्रों पर हुआ एक्शन

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Sun, 08 Feb 2026 07:16 PM IST
सार

AI PhD Thesis UGC Action:

पीएचडी रिसर्च में एआई टूल्स का गलत इस्तेमाल अब भारी पड़ने लगा है। यूजीसी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई पीएचडी थीसिस लौटा दी हैं। जांच में इनमें 40% से ज्यादा सामग्री एआई से ली गई पाई गई।

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एआई (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : AI

    विस्तार

    अब पीएचडी रिसर्च में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का गलत इस्तेमाल करने वाले छात्रों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई शुरू हो चुकी है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने छात्रों की दर्जनों पीएचडी थीसिस लौटा दी हैं। इन थीसिस में AI टूल्स से ली गई सामग्री को बिना सही तरीके से इस्तेमाल किए कॉपी-पेस्ट किया गया था।

    UGC की जांच में सामने आया कि कई थीसिस में 40 प्रतिशत से अधिक समानता पाई गई। यह शिक्षण संस्थान का दूसरा मामला है, जब UGC ने प्लेजरिज्म के चलते PhD थीसिस स्वीकार करने से इनकार किया है।

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    क्या गड़बड़ी सामने आई?

    यह मामला बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU), मुजफ्फरपुर का है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने शोध छात्रों द्वारा जमा कराई गई पीएचडी थीसिस में पाया कि इन्हें ChatGPT और अन्य AI टूल्स से तैयार किया गया था। जांच में पता चला कि कॉन्टेंट को सीधे कॉपी-पेस्ट किया गया था। सामग्री न तो मौलिक थी और न ही उसे सही ढंग से साइट किया गया था।

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    UGC ने सभी संदिग्ध थीसिस लौटा दी हैं और छात्रों को इन्हें पूरी तरह से दोबारा लिखने के निर्देश दिए गए हैं। भविष्य में ऐसी गलती न हो, इसके लिए अब थीसिस जांच में प्लेजरिज्म डिटेक्शन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है।

    हिंदी और अंग्रेजी थीसिस की जांच में फर्क

    शिक्षकों और सूत्रों का कहना है कि AI से की गई नकल ज्यादातर अंग्रेजी में लिखी थीसिस में पकड़ी गई। वजह यह है कि एंटीज प्लेजरिज्म सॉफ्टवेयर अंग्रेजी कंटेंट में प्लेजरिज्म को ज्यादा सटीक तरीके से पकड़ते हैं, जबकि हिंदी में जांच प्रणाली अभी उतनी मजबूत नहीं है।

    शिक्षकों का मानना है कि हिंदी में प्लेजरिज्म पकड़ने की तकनीक को बेहतर बनाने पर काम चल रहा है। UGC के पास देशभर की थीसिस का केंद्रीय डेटा मौजूद है, जिससे इस तरह की गड़बड़ियों का पता लगाया जा रहा है।

    AI और PhD को लेकर UGC का सख्त रुख

    UGC पहले ही साफ कर चुका है कि पीएचडी में एआई का बिना स्वीकारोक्ति इस्तेमाल करना प्लेजरिज्म माना जाएगा। हालांकि 2018 के प्लेजरिज्म नियम अभी लागू हैं, लेकिन अब AI से जनरेट कंटेंट भी उसी दायरे में लाया जा रहा है।

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