खतरे में प्राइवेसी: हैक हो सकते हैं प्रत्येक 10 में से 4 स्मार्टफोन, रिसर्च में हुआ खुलासा

प्रदीप पाण्डेय
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीप्रदीप पाण्डेय
Wed, 14 Apr 2021 04:11 PM IST
सार

46 फीसदी संस्थाओं के कम-से-कम एक कर्मचारी ने वायरस वाले एप को अपने फोन में डाउनलोड किया है।

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Check Point Mobile Security Report 2021 Says Four Out of 10 Mobiles Are Vulnerable to be hack
smartphone - फोटो : pixabay

    विस्तार

    सभी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां अपने फोन के साथ हाई लेवल की सिक्योरिटी का दावा करती हैं लेकिन एक रिसर्च में स्मार्टफोन की सिक्योरिटी को लेकर होने वाले सभी दावे फेल हो गए हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रत्येक 10 में से 4 स्मार्टफोन को हैकर्स आराम से हैक कर सकते हैं। यह दावा सिक्योरिटी फर्म चेकप्वाइंट ने अपनी एक रिपोर्ट में किया है।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2020 में दुनिया के 97 फीसदी संस्थाओं पर मोबाइल साइबर अटैक हुए हैं और 46 फीसदी संस्थाओं के कम-से-कम एक कर्मचारी ने वायरस वाले एप को अपने फोन में डाउनलोड किया है। वर्क फ्रॉम होम ने हैकर्स का काम आसान कर दिया है।

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    रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया के 40 फीसदी स्मार्टफोन के चिपसेट में कमियां हैं जिसका फायदा उठाकर हैकर्स फोन को हैक कर सकते हैं। साल 2020 में बैंकिंग ट्रोजन में 15 फीसदी का इजाफा हुआ है जिसके कारण लोगों के बैंक की निजी जानकारी चोरी हुई है।

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    COVID-19 की जानकारी देने के नाम पर कई सारे एप्स हैं जो लोगों को चूना लगा रहे हैं। ऐसे ऐप्स लोगों के फोन में वायरस फैला रहे हैं और मोबाइल रिमोट एक्सेस ट्रोजन (MRATs), बैंकिंग ट्रोजन और प्रीमियम डायलर जैसे एप्स लोगों के फोन में उनकी मर्जी के बिना इंस्टॉल करवा रहे हैं।

    रिपोर्ट में कहा गया है कि COVID-19 के कारण वर्क फ्रॉम होम में इजाफा हुआ है और साल 2024 तक 60 फीसदी कामगार मोबाइल पर शिफ्ट हो जाएंगे यानी इनका अधिकतर काम स्मार्टफोन के जरिए ही होगा। रिपोर्ट के मुताबिक मैलवेयर फैलाने के लिए इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन मोबाइल डिवाइस मैनेजमेंट (MDM) सिस्टम का इस्तेमाल हुआ है जिसके जरिए 75 फीसदी मोबाइल डिवाइस को मैनेज किया गया है।

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