'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- श्रीहीन, जिसका अर्थ है- जो तेज से हीन हो या जिसमें तेज न हो। प्रस्तुत है जगदीश गुप्त की कविता- हो गयी सांझ जीवन में
जिस दिन से संज्ञा आई
छा गयी उदासी मन में
ऊषा के दृग...और पढ़ें
कि उद्यमी अब तो सुन लो जरा ज्यादा अब ना वार करो।
मेहनत कर हारे छात्रों पर, कुछ तो तुम उपकार करो।
त्याग घमंड को नीचे उतरो जन-जन का कल्याण करो।
दिन-रात पढ़ते बच्चों का, जीवन ना तुम पाषाण करो।
सूख गया है कंठ ह...और पढ़ें
हम थे नादान जो दुनिया पे एतबार किये।
एक मासूम सा चेहरा, कई किरदार जिये।
सामने था कोई इंसान, जो हैवान भी था,
सबकी खातिर था वो भगवान का अवतार लिये।
उसके हाथों से जहर सबने पिया, हँसके पिया,
पी के कहते हैं सुधा हम सरेबा...और पढ़ें
प्रथा जब एक बार धर्म का रूप धारण करके खड़ी हो जाती है, फिर कोई भी निष्ठुरता असाध्य नहीं रह जाती, बल्कि कार्य जितना भी अधिक निष्ठुर होता है और जितना ही अधिक बीभत्स होता है, पुण्य का वज़न भी उतना ही बढ़ जाता है।
~ शरत चंद्र चट्टोपाध्याय...और पढ़ें
नवीन सी० चतुर्वेदी एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं। साहित्य-लेखन में चाहे विविध विधाओं का सृजन हो अथवा विभिन्न भाषाओं का, चतुर्वेदी जी की क़लम सबको साधती है। वे अलग-अलग भाषाओं-विधाओं में केवल लिखते भर नहीं, बल्कि पूर्ण अधिकार के साथ रचना करते हैं। हिन्दी क...और पढ़ें
तिरा वुजूद ही सब से बड़ी हक़ीक़त है
तुझे भुला नहीं सकता यही मोहब्बत है
गिला नहीं है तिरी बे-त'अल्लुक़ी से मुझे
मैं जानता हूँ तुझे भूलने की 'आदत है
दिल-ए-हज़ीं को बड़ी देर में हुआ मा'लूम...और पढ़ें
गर हो तुमसे वफ़ा तो वफ़ा कीजिए।
राह-ए-उल्फ़त में ख़ुद को फ़ना कीजिए।
ग़ैर की बात पर ग़ौर मत कीजिए,
दिल की आवाज़ पर दिल दिया कीजिए।
वक़्त के हर सितम को हँसी में छुपा,
मुस्कुराकर भी अपना गिला कीजिए।...और पढ़ें
छोड़ देने को उम्र भर के लिए
देखना भी था एक नजर के लिए
कुछ भी करने की दरकार न थी
होना तेरा ही बहुत था असर के लिए
तुम कुल्हाड़ भी लेकर आए
हवा काफी थी सूखे शज़र के लिए
जाने कैसे चला आता था वो
थम गई हवा भी र...और पढ़ें
कोंकण रेलवे के बेलापुर, मुंबई स्थित प्रेक्षागृह में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के दौरान साहित्यकार एवं कवि कमलेश राजहंस (उत्तर प्रदेश) को ‘कोंकण रेलवे सरस्वती सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कोंकण रेलवे के सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी) संतोष कुमार झा न...और पढ़ें
प्रेम चुनाव नहीं, विवशता है
प्रेम कोई चुनाव नहीं होता,
कि चाहा तो कर लिया,
न चाहा तो छोड़ दिया।
अगर प्रेम सच्चा है,
तो वह तुम्हारी विवशता होगा—
तुम चाहकर भी उससे
दूर नहीं जा पाओगे।...और पढ़ें
सम्मान अगर मैं तुमको दूं तो,
लौटकर मुझे सम्मान मिलेगा,
करूं नमन अगर तुमको मैं,
प्रभु प्रसाद आशीर्वाद मिलेगा।
ये रीति जगत की ऐंसी है
करनी का फल देती है,
करें कर्म हम जैसे आज,
कल वैंसा ही प्रतिफल...और पढ़ें
सुनो, सुनाती हूँ मैं सबको
गौरव गाथा बिहार की,
यह वह धरती है जहाँ नींव पड़ी
प्रथम अखंड साम्राज्य की।
प्राचीन मगध की गाथाएँ
इतिहास यहाँ की गढ़ती हैं,
वीरों से सजी इस माटी में
ज्ञान की गंगा बहती ह...और पढ़ें
वो आगोश-ए-सुकून में हैं, और यहाँ कोई चैन गँवाने लगा है,
जो बस मुँह धो कर निकलता था, वो नादान अब खुद को सजाने लगा है।
एक शख्स ने ज़िंदगी को इस क़दर मुतास्सिर किया है आख़िर,
फ़क़त काम से मतलब रखने वाला, दफ़्तर के बाद वक़्त...और पढ़ें
सच में ,
ये जिंदगी हमें - -
कदम - कदम पर,
अपना महत्व या - -
मोल (कीमत )से,
वाकिफ करवाती है - -
कभी तो ,
ये बरदान स्वरूप में - -
बहुत कुछ दे देती है ,
तो कभी - -
सब कुछ से ,
...और पढ़ें
अब शफ़क़ में ही असर ना चाँद में रहता कोई।।
दिल में ही कुछ शोर है ना आँख में रहता कोई।।
हर तरफ़ तन्हाई है बस ग़म की चादर ओढ़कर,,
हर कोई ख़ामोश है यां ना बात पे हंसता कोई।।
जल गया जो ज़िस्म था कल रात उसकी याद में...और पढ़ें
गंगा के तट पे वो मुझे मिलने बुला रहे
ह्रदय की शुष्क अवनि पे प्रणय खिला रहे
मन के भुवन में घोर तिमिर रात छाई थी
वो हर दिशा में प्रेम के दीपक जला रहे
— त्रिशिका धरा...और पढ़ें
किसान की जिंदगानी से जोड़ी ना माटी।
किसान की रव्ह् से जोड़ी पर माया मोठी।
पोरा ला याद आव् से वा नांदया जोड़ी।
पोरा ला याद आव् से उनकी घोलर घाटी।।
याद आव् से नांदया की जोड़ी की माया।
याद आव् से नांदया की जोड़...और पढ़ें
आपसी सामंजस्य ने रिश्ता निभाना नहीं
बल्कि जीना सिखा दिया ।
-सरिता...और पढ़ें
ऐसा प्रतीत,
होता है कि - -
रुठे - रुठे से ,
लगते हो - -
यदि तुम्हारी ,
इजाज़त हो तो - -
मना के ,
दिखाऊँ - -
क्या ?
सच में - -
दिल का ,
बुरा हाल - -
हो गया है...और पढ़ें
जवाल से निकले हम, सफल हो गए हैं,
जटिल प्रश्न भी हमसे हल हो गए हैं।
आज के जदीद इंसान में उलझन बहुत है,
जेहन में मसलों के जंगल हो गए हैं।
किसे दोष दें और किसको बेदाग़ कहें,
आज के सारे चेहरे कल हो गए है...और पढ़ें