आइना सामने रख्खोगे तो याद आऊँगा
अपनी ज़ुल्फ़ों को सँवारोगे तो याद आऊँगा
रंग कैसा हो ये सोचोगे तो याद आऊँगा
जब नया सूट ख़रीदोगे तो याद आऊँगा
भूल जाना मुझे आसान नहीं है इतना
जब मुझे भूलना चाहोगे तो याद...और पढ़ें
हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है धृति जिसका अर्थ है - 1. धारण करने का गुण 2. धैर्य। कवि अज्ञेय ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है।
आज तुम शब्द न दो, न दो, कल भी मैं कहूँगा।
तुम पर्वत हो अभ्र-भेदी शिला...और पढ़ें
हमें आज के ज़माने में भी किरदार-पेशी की क्या ज़रूरत है भला...
हमने तो भरी जवानी में भी अपने जिस्म को उसकी ही ज़रूरत से महरूम रखा...
क्योंकि उस पर हक़ उनका था जिन्होंने हमारी ज़ुल्फ़ों को तक नहीं छुआ थाऔर पढ़ें
बिछड़े अपने, रूह में मेरी समाते हैं
चाह कर भी हम भुला उनको न पाते हैं
आज तक भी हम बिछड़ कर उनसे ज़िंदा है
जिस्म का क्यूँ बोझ हम अब भी उठाते हैं
ख़ामुशी की इस ज़ुबाँ में यादें हैं उनकी
यादों के ग़म र...और पढ़ें
हे मेरे उदास मन! मेरे कुछ सुझाव, कुछ यत्न सुन
सह ले यह संघर्ष ,कुछ और समय, कुछ और दिन
सह लो कुछ और कष्ट,
बिता लो कुछ और कष्टभरी रातें, तारे गिन-गिन
जल्दी ही बीत जायेंगे बुरे दिन,अच्छे दिनों का होगा आगमन
सह लो यह संघ...और पढ़ें
कहते है पाप के विनाश के लिए भगवान प्रकट होते।
इंसानियत कायम करने को 'उपदेश' आंदोलित होते।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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भाषा को सौंदर्य बढ़ावन
प्राण सींचित करके लिखू।
मातृभाषा को उत्कर्ष साती,
मी,समर्पण भाव लक लिखू।।
सागर ला गहराई मांगू।
बादलों ला ऊंचाई मांगू।
मातृभाषा को उत्कर्ष साती,
मी,बहारों ला सौंदर्य मांग...और पढ़ें
पशु पक्षी के झुंड से, गाँव, देश, परिवार।
एक स्वार्थ की डोर से, आज जुड़े हैं यार।
-पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु'...और पढ़ें
आज अपने जन्मदिन पर मन उदास क्यों है,
जो चला गया छोड़कर, उसकी तलाश क्यों है।
आज तो खुशियों का दिन है, फिर आँखें नम क्यों हैं,
दिल में दबी हुई यादें आज इतनी संग क्यों हैं।
उम्र का एक और पड़ाव पार कर लिया मैंने,
न जाने...और पढ़ें
हमदर्द समझा जिसे, आखिर दिल वही पत्थर हुआ,
फिर दर्द टूटे दिल का, मौत से बदतर हुआ।
वादे किए थे साथ चलने के, हर एक तूफान में,
तन्हा मुझे वो छोड़ आया, दर्द के वीरान में।
कागज के फूलों सा रहा, उसका हर एक इकरार भ...और पढ़ें
ख़्वाहिशों के शहर में एक ख़ास मिला,
वो अजनबी था, फिर भी एक एहसास मिला।
न मिलने की होड़, न बिछड़ने का दुःख,
कुछ क्षणों के लिए ख़ुशियों का कारवाँ मिला…!!
-. हेमप्रिया...और पढ़ें
संविधान के रक्षक आदेश मानकर चिंतित नही।
चाहते जन ज़न माने 'उपदेश' मनमानी करे नही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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खुशियाँ तो, मुझे भी प्यारी थी,
मगर मै क्या करता, बहुत जिम्मेदारी थी !!
मुस्कुराना-चहकना, किसे पसंद नहीं,
मगर मेरे हिस्से,रोने की बीमारी थी,
खुशियाँ तो, मुझे भी प्यारी थी,
मै क्या करता, बहुत जिम्मेदारी थी !!
ह...और पढ़ें
हर कोई चाहता है तेरे दिल में रहना
पर तू, हर किसी को कहाँ नसीब होता है।।
जैसे हर गुलसिता चाहता है एक गुलाब
पर उसे गुलाब कहाँ नसीब होता है
दिल चाहता है तेरी मुस्कुराहट की वजह बनू
पर तेरी मुस्कुराहट के पीछे तो, एक राज...और पढ़ें
माँ-पापा…
आप बहुत याद आते है,
काश! वक्त को थोड़ा पीछे ले जा पाता,
आपकी गोद में सिर रखकर
फिर से बच्चा बन पाता।
आज भी दिल आपको ही पुकारता है,
हर खुशी में आपका चेहरा नज़र आता है।
आप पास नहीं हैं, फिर भी द...और पढ़ें
यूंही भटकते जिंदगी की भूली बिसरी गलियों में,
खुद को पाया मैंने धुंधली यादों की देहरियों में।
सूनसान राह थी, था घनघोर अंधियारा
कोई जुगनू था, ना कोई टिमटिमाता तारा,
ना लालिमा थी भोर की, ना दिन का उजियारा।
बस सामने थी...और पढ़ें
फ़न और हुनर तो बस एक यही है सीखने का
कि क्या सीखना है और क्या नहीं है सीखने का
-एन. आर. कस्वाँ...और पढ़ें
बड़ी घुटन सी है दिल में
कोई राब्ता निकले
दिल-ए-दर्द बयां करने का
कोई रास्ता निकले।
बेक़रार सी है रातें दिन
बेतरतीब हो चली
दिल का सुकून से कोई तो
कभी वास्ता निकले।
कभी ख़्वाबों के गलीचे कभी
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न धूप की तेजी
न अंधेरे का साया
मैं वो रंग हूँ
जो सबके मन को भाया
शाम भी मुस्कुराकर कहती है
न दिन हूँ न रात हूँ
मैं सबसे खास हूँ
मैं शाम हूँ
न मैं अंधेरा हूँ
न मैं उजाला हू...और पढ़ें
यार क्यूँ हम भी प्यार कर बैठे
दिल तुम्हीं पर निसार कर बैठे
कुछ न हासिल हुआ मोहब्बत में
दिल ही अपना फ़िगार कर बैठे
तुम पे कितना यकीं था हमको तो
झूठ पर ए'तिबार कर बैठे
तुम न अहद-ए-व...और पढ़ें