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नासिर काज़मी: गली गली आबाद थी जिन से कहाँ गए वो लोग

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    गली गली आबाद थी जिन से कहाँ गए वो लोग
दिल्ली अब के ऐसी उजड़ी घर घर फैला सोग

सारा सारा दिन गलियों में फिरते हैं बेकार
रातों उठ उठ कर रोते हैं इस नगरी के लोग

सहमे सहमे से बैठे हैं रागी और फ़नकार
भोर भए...और पढ़ें
10 hours ago

दाग़ देहलवी: मोहब्बत का असर जाता कहाँ है

काव्य डेस्क

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                                                    मोहब्बत का असर जाता कहाँ है
हमारा दर्द-ए-सर जाता कहाँ है

दिल-ए-बेताब सीने से निकल कर
चला है तू किधर जाता कहाँ है

अदम कहते हैं उस कूचे को ऐ दिल
इधर आ बे-ख़बर जाता कहाँ है

कहूँ किस मुँह...और पढ़ें
9 hours ago

Urdu Poetry: आप का ख़त नहीं मिला मुझ को

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
                                                
12 hours ago

क़तील शिफ़ाई: ये किस ने कहा तुम कूच करो बातें न बनाओ इंशा-जी

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    ये किस ने कहा तुम कूच करो बातें न बनाओ इंशा-जी
ये शहर तुम्हारा अपना है इसे छोड़ न जाओ इंशा-जी

जितने भी यहाँ के बासी हैं सब के सब तुम से प्यार करें
क्या उन से भी मुँह फेरोगे ये ज़ुल्म न ढाओ इंशा-जी

क्या सोच...और पढ़ें
9 hours ago

शिवमंगल सिंह ‘सुमन’की कविता- मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ।

चल रहा हूँ, क्योंकि चलने से थकावट दूर होती,
जल रहा हूँ क्योंकि जलने से तिमिस्रा चूर होती,
गल रहा हूँ क्योंकि हल्का बोझ हो जाता हृदय का,
ढल रहा हूँ क्योंकि ढलकर साथ...और पढ़ें
5 hours ago

आज का विचार: हरमन हेस

काव्य डेस्क

Aaj Ka Vichar
                                                                
                                                    आपके भीतर एक शांति और आश्रय है जहाँ आप किसी भी समय वापस जा सकते हैं और स्वयं बन सकते हैं।
- हरमन हेस 
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3 hours ago

वीरेन्द्र खरे अकेला: लोग भी क्या हैं किसी का दिल दुखा कर ख़ुश हुए

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    लोग भी क्या हैं किसी का दिल दुखा कर ख़ुश हुए
फूल पर बैठी हुई तितली उड़ा कर ख़ुश हुए

प्यास हम अपनी बुझा लें ये इजाज़त है कहाँ
फिर भी ऐ दरिया तिरे नज़दीक आकर ख़ुश हुए

मर्ज़ को पाले हुए रखना समझदारी नहीं
...और पढ़ें
5 hours ago

Urdu Poetry: निगाह-ए-नाज़ का इक वार कर के छोड़ दिया

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    निगाह-ए-नाज़ का इक वार कर के छोड़ दिया
दिल-ए-हरीफ़ को बेदार कर के छोड़ दिया

हुई तो है यूँही तरदीद-ए-अहद-ए-लुत्फ़-ओ-करम
दबी ज़बान से इक़रार कर के छोड़ दिया

छुपे कुछ ऐसे कि ता-ज़ीस्त फिर न आए नज़र
रहीन...और पढ़ें
5 hours ago

संजय भट्ट: होती है ज़िंदगी से शिकायत कभी कभी

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    
होती है ज़िंदगी से शिकायत कभी कभी
याद आती है किसी की रफ़ाक़त कभी कभी

वैसे तो हम नहीं हैं तिरी बात के ख़िलाफ़
मर जाती है मगर ये शराफ़त कभी कभी

इतना न ख़ुद को देख ज़माने की आँख से
दे दे कुछ अपन...और पढ़ें
11 hours ago

आज का शब्द: निरावरण और नरेन्द्र शर्मा कविता- धरती पर धरो चरण

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
                                                                
                                                    'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- निरावरण, जिसका अर्थ है- आवरणरहित, खुला हुआ। प्रस्तुत है नरेन्द्र शर्मा कविता- धरती पर धरो चरण

जीवन की अंधियारी
रात हो उजारी!
धरती पर धरो चरण
तिमिर-तम हारी
...और पढ़ें
5 hours ago
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