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राजेन्द्र नाथ रहबर: आइना सामने रख्खोगे तो याद आऊँगा

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    आइना सामने रख्खोगे तो याद आऊँगा
अपनी ज़ुल्फ़ों को सँवारोगे तो याद आऊँगा

रंग कैसा हो ये सोचोगे तो याद आऊँगा
जब नया सूट ख़रीदोगे तो याद आऊँगा

भूल जाना मुझे आसान नहीं है इतना
जब मुझे भूलना चाहोगे तो याद...और पढ़ें
8 hours ago

आज का शब्द: धृति और अज्ञेय की कविता आज तुम शब्द न दो

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
                                                                
                                                    हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है धृति जिसका अर्थ है - 1. धारण करने का गुण 2. धैर्य। कवि अज्ञेय ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 

आज तुम शब्द न दो, न दो, कल भी मैं कहूँगा।

तुम पर्वत हो अभ्र-भेदी शिला...और पढ़ें
9 hours ago

ज़रूरत-ए-हक़

Anshika Raina

Mere Alfaz
                                                                
                                                    हमें आज के ज़माने में भी किरदार-पेशी की क्या ज़रूरत है भला...
हमने तो भरी जवानी में भी अपने जिस्म को उसकी ही ज़रूरत से महरूम रखा...
क्योंकि उस पर हक़ उनका था जिन्होंने हमारी ज़ुल्फ़ों को तक नहीं छुआ थाऔर पढ़ें
4 hours ago

बिछड़े अपने

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                                                
                                                    बिछड़े अपने,  रूह में मेरी समाते हैं
चाह कर भी हम भुला उनको न पाते हैं

आज तक भी हम बिछड़ कर उनसे ज़िंदा है
जिस्म का क्यूँ बोझ हम अब भी उठाते हैं

ख़ामुशी की इस ज़ुबाँ में यादें हैं उनकी
यादों के ग़म र...और पढ़ें
3 hours ago

सह लो यह संघर्ष ,यह कष्ट कुछ और दिन

Arvind Kumar Garg

Mere Alfaz
                                                                
                                                    हे मेरे उदास मन! मेरे कुछ सुझाव, कुछ यत्न सुन
सह ले यह संघर्ष ,कुछ और समय, कुछ और दिन
सह लो कुछ और कष्ट,
बिता लो कुछ और कष्टभरी रातें, तारे गिन-गिन
जल्दी ही बीत जायेंगे बुरे दिन,अच्छे दिनों का होगा आगमन
सह लो यह संघ...और पढ़ें
4 hours ago

भगवान प्रकट होते

Updesh Kumar

Mere Alfaz
                                                                
                                                    कहते है पाप के विनाश के लिए भगवान प्रकट होते।
इंसानियत कायम करने को 'उपदेश' आंदोलित होते।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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4 hours ago

पोवारी भाषा उत्कर्ष को एक संकल्प

Historian 0.C.

Mere Alfaz
                                                                
                                                    भाषा को सौंदर्य बढ़ावन
प्राण सींचित करके लिखू।
मातृभाषा को उत्कर्ष साती,
मी,समर्पण भाव लक लिखू।।

सागर ला गहराई मांगू।
बादलों ला ऊंचाई मांगू।
मातृभाषा को उत्कर्ष साती,
मी,बहारों ला सौंदर्य मांग...और पढ़ें
4 hours ago

डाॅ. पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु' के सामाजिक दोहे

Purshottam Shrivastava

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                                                    पशु पक्षी के झुंड से, गाँव, देश, परिवार।
एक स्वार्थ की डोर से, आज जुड़े हैं यार।
-पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु'...और पढ़ें
4 hours ago

जन्मदिन पर मन उदास क्यों है…

ANURADHA TYAGI

Mere Alfaz
                                                                
                                                    आज अपने जन्मदिन पर मन उदास क्यों है,
जो चला गया छोड़कर, उसकी तलाश क्यों है।
आज तो खुशियों का दिन है, फिर आँखें नम क्यों हैं,
दिल में दबी हुई यादें आज इतनी संग क्यों हैं।
उम्र का एक और पड़ाव पार कर लिया मैंने,
न जाने...और पढ़ें
3 hours ago

टूटे दिल का दर्द

Master Abhay

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                                                    हमदर्द समझा जिसे, आखिर दिल वही पत्थर हुआ,
फिर दर्द टूटे दिल का, मौत से बदतर हुआ।

वादे किए थे साथ चलने के, हर एक तूफान में,
तन्हा मुझे वो छोड़ आया, दर्द के वीरान में।

कागज के फूलों सा रहा, उसका हर एक इकरार भ...और पढ़ें
4 hours ago
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ख़्वाहिशों के शहर में एक ख़ास मिला...

hem priya

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                                                    ख़्वाहिशों के शहर में एक ख़ास मिला,
वो अजनबी था, फिर भी एक एहसास मिला।

न मिलने की होड़, न बिछड़ने का दुःख,
कुछ क्षणों के लिए ख़ुशियों का कारवाँ मिला…!!

-. हेमप्रिया...और पढ़ें
4 hours ago

संविधान के रक्षक

Updesh Kumar

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                                                    संविधान के रक्षक आदेश मानकर चिंतित नही।
चाहते जन ज़न माने 'उपदेश' मनमानी करे नही।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 ...और पढ़ें
4 hours ago

खुशियाँ तो मुझे भी प्यारी थी

Vipin Gaur

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                                                    खुशियाँ तो, मुझे भी प्यारी थी,
मगर मै क्या करता, बहुत जिम्मेदारी थी !!
मुस्कुराना-चहकना, किसे पसंद नहीं,
मगर मेरे हिस्से,रोने की बीमारी थी,
खुशियाँ तो, मुझे भी प्यारी थी,
मै क्या करता, बहुत जिम्मेदारी थी !!
ह...और पढ़ें
4 hours ago

बरना तुम्हारा दिल, हर किसी को,कहाँ नसीब होता है।

Amol Education

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                                                    हर कोई चाहता है तेरे दिल में रहना
पर तू, हर किसी को कहाँ नसीब होता है।।
जैसे हर गुलसिता चाहता है एक गुलाब
पर उसे गुलाब कहाँ नसीब होता है
दिल चाहता है तेरी मुस्कुराहट की वजह बनू
पर तेरी मुस्कुराहट के पीछे तो, एक राज...और पढ़ें
3 hours ago

माँ- पापा, आप बहुत याद आते हैं !

User

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                                                    माँ-पापा…
आप बहुत याद आते है,
काश! वक्त को थोड़ा पीछे ले जा पाता,
आपकी गोद में सिर रखकर
फिर से बच्चा बन पाता।
आज भी दिल आपको ही पुकारता है,
हर खुशी में आपका चेहरा नज़र आता है।
आप पास नहीं हैं, फिर भी द...और पढ़ें
3 hours ago

सुनहरे सपनों पर,वही स्वामित्व।

Bina Mishra

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                                                    यूंही भटकते जिंदगी की भूली बिसरी गलियों में,
खुद को पाया मैंने धुंधली यादों की देहरियों में।
सूनसान राह थी, था घनघोर अंधियारा
कोई जुगनू था, ना कोई टिमटिमाता तारा,
ना लालिमा थी भोर की, ना दिन का उजियारा।
बस सामने थी...और पढ़ें
3 hours ago

हुनर सीखना

Nathuram Kaswan

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                                                    फ़न और हुनर तो बस एक यही है सीखने का
कि क्या सीखना है और क्या नहीं है सीखने का
-एन. आर. कस्वाँ...और पढ़ें
4 hours ago

बड़ी घुटन सी है दिल में

Asha Singh

Mere Alfaz
                                                                
                                                    बड़ी घुटन सी है दिल में
कोई राब्ता निकले
दिल-ए-दर्द बयां करने का
कोई रास्ता निकले।
बेक़रार सी है रातें दिन
बेतरतीब हो चली
दिल का सुकून से कोई तो
कभी वास्ता निकले।
कभी ख़्वाबों के गलीचे कभी
...और पढ़ें
4 hours ago

शाम भी मुस्कुराकर कहती है:.......

Mamta Tiwari

Mere Alfaz
                                                                
                                                    न धूप की तेजी
न अंधेरे का साया
मैं वो रंग हूँ
जो सबके मन को भाया

शाम भी मुस्कुराकर कहती है
न दिन हूँ न रात हूँ
मैं सबसे खास हूँ
मैं शाम हूँ

न मैं अंधेरा हूँ
न मैं उजाला हू...और पढ़ें
4 hours ago

क्यूँ प्यार कर बैठे

Parul Bhaktani

Mere Alfaz
                                                                
                                                    यार क्यूँ हम भी प्यार कर बैठे
दिल तुम्हीं पर निसार कर बैठे

कुछ न हासिल हुआ मोहब्बत में
दिल ही अपना फ़िगार कर बैठे

तुम पे कितना यकीं था हमको तो
झूठ पर  ए'तिबार कर बैठे

तुम न अहद-ए-व...और पढ़ें
3 hours ago

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