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साहित्य

238 Followers 544 Poems

कबीर के 5 चुनिंदा दोहे जिनमें छुपा जीवन का मर्म

काव्य डेस्क

Sahitya
                                                                
                                                    मन के मते न चलिये, मन के मते अनेक 
जो मन पर असवार है, सो साधु कोई एक ।।

भावार्थ:- मन के मत में न चलो, क्योंकि मन के अनेको मत हैं। जो मन को सदैव अपने अधीन रखता है, वह साधु कोई विरला ही होता है। ...और पढ़ें
10 hours ago

Ramdhari Singh Dinkar:  सत्ता की महत्ता को चुनौती देने वाले कवि

काव्य डेस्क

Sahitya
                                                                
                                                    एक मनुज संचित करता है अर्थ पाप के बल से
और भोगता उसे दूसरा भाग्यवाद के छल से।

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता में ओज का स्वर ललकार में तब्दील होता है लेकिन उसमें विचार की सम्पदा है, वे श्रम के महत्व को स्वीकार करते हैं भा...और पढ़ें
3 days ago
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यदि हिन्दी ग़ज़ल कह रहे हैं तो उसमें हिन्दी के दर्शन हों- नवीन सी० चतुर्वेदी

काव्य डेस्क

Sahitya
                                                                
                                                    नवीन सी० चतुर्वेदी एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं। साहित्य-लेखन में चाहे विविध विधाओं का सृजन हो अथवा विभिन्न भाषाओं का, चतुर्वेदी जी की क़लम सबको साधती है। वे अलग-अलग भाषाओं-विधाओं में केवल लिखते भर नहीं, बल्कि पूर्ण अधिकार के साथ रचना करते हैं। हिन्दी क...और पढ़ें
                                                
1 week ago

सर्वेश्वर की कविताओं की एक विशेष पहचान उनमें कभी व्यक्त, कभी निहित व्यंग्य का स्वर भी है

Ratnesh Kumar Mishra

Sahitya
                                                                
                                                    क्या गजब का देश है यह क्या गजब का देश है
बिन अदालत औ मुवक्किल के मुकदमा पेश है
आँख में दरिया है सबके
दिल में है सबके पहाड़
आदमी भूगोल है जी चाहा नक्शा पेश है
क्या गजब का देश है यह क्या गजब का देश है।

...और पढ़ें
1 week ago
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भगवान कृष्ण के वात्सल्य का वर्णन करती सूरदास की चुनिंदा रचनाएं

काव्य डेस्क

Sahitya
                                                                
                                                    मैया मैं नहिं माखन खायौ।
ख्याल परैं ये सखा सबै मिलि, मेरैं मुख लपटायौ॥
देखि तुही सींके पर भाजन, ऊँचैं धरि लटकायौ।
हौं जु कहत नान्हे कर अपनै मैं कैसैं करि पायौ॥
मुख दधि पोंछि, बुद्धि इक कीन्ही, दोना पीठि दुरायौ।
डारि...और पढ़ें
3 weeks ago

Happy Shrikrishna Janmashtami 2026: कृष्ण प्रेम का पर्व हैं तो राधा महापर्व हैं

काव्य डेस्क

Sahitya
                                                                
                                                    कृष्ण निर्मोही हैं, इसीलिए कृष्ण से मोह हो जाता है। कृष्ण प्रेम की प्रवाहमान सरिता हैं। व्याकुल कंठों और तृषित उरों की सुध लेती संवेदना की सरिता। पर जैसा हर नदी की नियति है। उसे बहना है। यात्रा उसका धर्म है और प्यास मिटाना उसका कर्म। वैसा ही घटित होत...और पढ़ें
                                                
3 weeks ago

तुलसीदास के चुनिंदा दोहे

काव्य डेस्क

Sahitya
                                                                
                                                    आवत हिय हरषै नहीं, नैनन नहीं सनेह।
‘तुलसी’ तहाँ न जाइए, कंचन बरसे मेह॥

भावार्थ:- जिस घर में जाने पर घर वाले देखते ही प्रसन्न न हों और जिनकी आँखों में प्रेम न हो, उस घर में कभी न जाना चाहिए। उस घर से चाहे कितना ही लाभ क्यों न हो...और पढ़ें
1 month ago

वहाँ सब कुछ सदाचार की तरह सपाट और ईमानदारी की तरह असफल है

काव्य डेस्क

Sahitya
                                                                
                                                    वाराणसी के लोहता थाना क्षेत्र के विट्ठलपुर गांव में प्रख्यात हिंदी कवि सुदामा पांडेय 'धूमिल' की प्रतिमा को पिछले दिनों असामाजिक तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। घटना की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों, साहित्य प्रेमियों और धूमिल के शुभचिंतकों में...और पढ़ें
                                                
1 month ago

प्रेमचंद किसी एक पीढ़ी के नहीं, सभी पीढ़ियों के कथाकार हैं

डॉ. ओम निश्चल

Sahitya
                                                                
                                                    साहित्य को जिन मूल्यों के लिए जाना पहचाना जाता था, वे मूल्य धीरे धीरे जमींदोज़ हो रहे हैं। बाजार ने सारे मूल्यों को प्रभावित किया है; ऐसे में किसी साहित्यिक पत्रिका का संपादक यह कहे कि प्रेमचंद दोयम दर्जे के कथाकार थे, यह कोई अचरज की बात नहीं है । कि...और पढ़ें
                                                
1 month ago

Happy Sawan 2026: कवि रूपन की कजरी

काव्य डेस्क

Sahitya
                                                                
                                                    कवि रूपन जी बनारस के लोकप्रिय कजरी गायक थे। आपका समय 20वीं सदी का प्रारंभ था। आपकी बहुत सारी रचनाएँ अभी अप्राप्य हैं लेकिन जो मिली हैं उनमें प्रस्तुत है एक कजरी-  

पिया तजके हमें गइले परदेसवा ना
गए हमसे कर के घात, सुनऽ सौतिन के...और पढ़ें
1 month ago
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विशेष

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Anil Pandey

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