भारत — हर मिट्टी की अलग कहानी
कश्मीर की वादी मुस्काए,
डल झील मधुर तराने गाए।
लद्दाख़ के हिम-शिखरों पर,
नीला अम्बर शीश झुकाए॥
हिमाचल के देवदार महकें,
बर्फ़ीली राहें गीत सुनाएँ।
उत्तराखंड...और पढ़ें
कर बैठे
नादान थे हम,
अपने इश्क़ पर,
गुमान कर बैठे,
आइनों के शहर में,
धूप में शाम कर बैठे,
ख्वाब नीलाम हुए,
बज़्म-ए-इश्क़ कैसे,
हम अपने इश्क़ का
बाज़ार आम कर बैठे,
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योग — तन से चेतन तक
योग अगर बस आसन होता,
तन तक आकर रुक जाता।
साँस न जुड़ती अंतर्मन से,
मन को कौन सँभाल पाता?॥
मौन साधते ऋषियों ने जब,
भीतर अपना सत्य था पाया।
श्वास, ध्यान और संयम जोड़कर...और पढ़ें
"सड़क किनारे की वो बेंच"
नई नौकरी, थोड़ा वेतन, उम्मीदें बड़ी थीं,
बहनों की शादी कर्ज लेकर, पूरी कर दी थी।
रिश्तेदारों ने भाई को, भड़का कर माँग कराई,
कर्ज में था, न मना कर सका, न कर पाई।
पत्नी...और पढ़ें
पुष्प-गंध सी प्रीति हो, जीवन को महकाय।
करे किसी से द्वेष ना , ना कोई लिपटाय।
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तुझे गर्म हवाओं ने सताया है शायद,
मुरझाया चेहरा देखने की आदत नहीं मेरी।
कटीली आँखों में जो थकान के रेशे हैं,
बेवजह नहीं ये दर्द की लकीरें हैं।
रूखी-रूखी आवाज़ में नर्मियत खो गई,
लब खामोश हैं, आँखें मगर कहती...और पढ़ें
मछली कहती मल्लाह से,
फेंको रे जाल कोई उल्लास से,
उब चुकी हूँ इस खारे पानी से,
ले चल मुझे भी कहीं बाहर,
इस समंदर अथाह से।
कैद रहूँ समंदर में कब तक,
अब दुनिया की प्यास जगी है,
तोड़ दे आज हर बंदिश...और पढ़ें
बन ले नींव उपल रे बंदे
मुखड़ा
बन ले नींव उपल रे बंदे,
अनजाना-अज्ञात,
मत खो तू पहचान स्वयं की,
लेकर मान विसात।
बन ले नींव उपल रे बंदे,
अनजाना-अज्ञात।
अंतरा 1
खुशी-खुशी सह ल...और पढ़ें
बे वफा व्यक्ति से मिला न करो
भूल कर साथ में रहा न करो
फासला बीच में बपा ने करो
भाई को भाई से जुदा न करो
उसके असरात हों बुरे हर दम
यूँ बुरी बात को कहा न करो
बात कड़वी कर...और पढ़ें
तुम पढ़ लेते हो मेरा मौन,
आँखों में तैरता हर प्रश्न,
बातों में छुपे उस दर्द को,
कर लेते हो पल में ग्रहण।
मेरी कविता से पहचान लेते,
तुम मेरे अंतर्मन का कष्ट,
आहट पाकर मेरे कदमों की,
पीड़ा मेरी क...और पढ़ें