आज ख़ास

विज्ञापन

अपनी कविता साझा करें

भारत — हर मिट्टी की अलग कहानी

User

Mere Alfaz
                                                                
                                                    भारत — हर मिट्टी की अलग कहानी

कश्मीर की वादी मुस्काए,
डल झील मधुर तराने गाए।
लद्दाख़ के हिम-शिखरों पर,
नीला अम्बर शीश झुकाए॥

हिमाचल के देवदार महकें,
बर्फ़ीली राहें गीत सुनाएँ।
उत्तराखंड...और पढ़ें
6 hours ago

धूप में शाम कर बैठे

Sudhir Khatri

Mere Alfaz
                                                                
                                                    कर बैठे
नादान थे हम,
अपने इश्क़ पर,
गुमान कर बैठे,

आइनों के शहर में,
धूप में शाम कर बैठे,

ख्वाब नीलाम हुए,
बज़्म-ए-इश्क़ कैसे,
हम अपने इश्क़ का
बाज़ार आम कर बैठे,
...और पढ़ें
6 hours ago
विज्ञापन

योग — तन से चेतन तक

User

Mere Alfaz
                                                                
                                                    योग — तन से चेतन तक

योग अगर बस आसन होता,
तन तक आकर रुक जाता।
साँस न जुड़ती अंतर्मन से,
मन को कौन सँभाल पाता?॥

मौन साधते ऋषियों ने जब,
भीतर अपना सत्य था पाया।
श्वास, ध्यान और संयम जोड़कर...और पढ़ें
6 hours ago

सड़क किनारे की वो बेंच

Jagdish Prasad

Mere Alfaz
                                                                
                                                    "सड़क किनारे की वो बेंच"

नई नौकरी, थोड़ा वेतन, उम्मीदें बड़ी थीं,
बहनों की शादी कर्ज लेकर, पूरी कर दी थी।

रिश्तेदारों ने भाई को, भड़का कर माँग कराई,
कर्ज में था, न मना कर सका, न कर पाई।

पत्नी...और पढ़ें
6 hours ago
विज्ञापन

डाॅ. पुरुषोत्तम श्रीवास्तव 'पुरु' के दर्शन पर दोहे

Purshottam Shrivastava

Mere Alfaz
                                                                
                                                    पुष्प-गंध सी प्रीति हो, जीवन को महकाय।
करे  किसी से द्वेष ना , ना कोई  लिपटाय।
 ...और पढ़ें
6 hours ago

मखमली बिस्तर पर भी चैन कहाँ मिला, शायद राहों ने कोई पुराना दर्द जगा दिया।

Sooba Lal

Mere Alfaz
                                                                
                                                    तुझे गर्म हवाओं ने सताया है शायद,
मुरझाया चेहरा देखने की आदत नहीं मेरी।
कटीली आँखों में जो थकान के रेशे हैं,
बेवजह नहीं ये दर्द की लकीरें हैं।

रूखी-रूखी आवाज़ में नर्मियत खो गई,
लब खामोश हैं, आँखें मगर कहती...और पढ़ें
6 hours ago

मछली और मल्लाह

Rajeshwar Mandal

Mere Alfaz
                                                                
                                                    मछली कहती मल्लाह से,
फेंको रे जाल कोई उल्लास से,
उब चुकी हूँ इस खारे पानी से,
ले चल मुझे भी कहीं बाहर,
इस समंदर अथाह से।

कैद रहूँ समंदर में कब तक,
अब दुनिया की प्यास जगी है,
तोड़ दे आज हर बंदिश...और पढ़ें
6 hours ago

बन ले नींव उपल रे बंदे

Sanjay Nirala

Mere Alfaz
                                                                
                                                    बन ले नींव उपल रे बंदे

मुखड़ा
बन ले नींव उपल रे बंदे,
अनजाना-अज्ञात,
मत खो तू पहचान स्वयं की,
लेकर मान विसात।
बन ले नींव उपल रे बंदे,
अनजाना-अज्ञात।

अंतरा 1
खुशी-खुशी सह ल...और पढ़ें
6 hours ago

फासला  बीच  में  बपा  ने करो

Abdul Hameed

Mere Alfaz
                                                                
                                                    बे वफा व्यक्ति से मिला न करो
भूल कर साथ में रहा न करो

फासला  बीच  में  बपा  ने करो
भाई को  भाई  से जुदा  न करो

उसके असरात हों  बुरे  हर दम
यूँ  बुरी  बात को  कहा  न करो

बात  कड़वी   कर...और पढ़ें
6 hours ago

इतना प्रेम कहां से लाते हो

Rekha Mittal

Mere Alfaz
                                                                
                                                    तुम पढ़ लेते हो मेरा मौन,
आँखों में तैरता हर प्रश्न,
बातों में छुपे उस दर्द को,
कर लेते हो पल में ग्रहण।

मेरी कविता से पहचान लेते,
तुम मेरे अंतर्मन का कष्ट,
आहट पाकर मेरे कदमों की,
पीड़ा मेरी क...और पढ़ें
6 hours ago
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12570 कविताएं

View Profile

User

26 कविताएं

View Profile