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आज का शब्द: भनक और पाश की कविता- अब विदा लेता हूं मेरी दोस्त   

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
                                                                
                                                    भनक यानी धीमा शब्द, ध्वनि या उड़ती हुई खबर। अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- भनक। प्रस्तुत है अवतार सिंह संधू 'पाश' की कविता- अब विदा लेता हूं मेरी दोस्त  

अब विदा लेता हूँ
मेरी दोस्त, मै...और पढ़ें
6 hours ago

मोहब्बत मुकद्दर है

Mayuresh Deshpande

Mere Alfaz
                                                                
                                                    मोहब्बत मुकद्दर है, कोई ख्याब नही
ये वो अदा है, जिसमे हर कोई कामयाब नही
जिन्हें मिल गयी अपनी मंजिल वो तो खुश हैं
मगर जो पागल हुए उनका कोई हिसाब नही

मयूरेश देशपांडे
  - हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचि...और पढ़ें
8 hours ago

कौन कहता है कि

Shambhu Nath

Mere Alfaz
                                                                
                                                    कौन कहता है कि
प्यार अंधा नहीं होता
होता यदि ऐसा तो
अभी तक बंधा नहीं होता

शंभु नाथ "सुमन"
  - हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मान...और पढ़ें
10 hours ago

तुम नहीं जानते थे

Shambhu Nath

Mere Alfaz
                                                                
                                                    तुम नहीं जानते थे
मेरी बेचैनी मेरी मजबूरी को
तुमने मुझे झूठा समझा
बढ़ने ही दिया दूरी को

शंभु नाथ "सुमन"
  - हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। ह...और पढ़ें
10 hours ago

आज का विचार - जयशंकर प्रसाद

काव्य डेस्क

Aaj Ka Vichar
                                                                
                                                    सौभाग्य और दुर्भाग्य मनुष्य की दुर्बलता के नाम हैं। मैं तो पुरुषार्थ को ही सबका नियामक समझता हूं पुरुषार्थ ही सौभाग्य को सींचता है।
- जयशंकर प्रसाद ...और पढ़ें
11 hours ago

बीवी से नहीं निभी: ताउम्र एकांत में रहा ये शायर

काव्य डेस्क

Sahitya
                                                                
                                                    मशहूर शायर शहरयार की शायरी में चौंकानेवाली आतिशबाज़ी से दूर एक शाइस्तगी है। उनके शब्दों में कुछ अक्स उभरते हैं लेकिन वह सफर के उस पेड़ की तरह नहीं होते जो झट से गुज़र जाते हैं बल्कि उस पेड़ की तरह होते हैं जो दूर चलते हुए देर तक मुसाफ़िर का साथ देते...और पढ़ें
                                                
11 hours ago

दुनिया से, जिस से आगे का सोचा नहीं गया - राजेश रेड्डी

काव्य डेस्क

Urdu Adab
                                                                
                                                    दुनिया से, जिस से आगे का सोचा नहीं गया
हम से वहाँ पहुँच के भी ठहरा नहीं गया

आँखों पे ऐसा वक़्त भी गुज़रा है बार-हा
वो देखना पड़ा है जो देखा नहीं गया

पढ़वाना चाहते थे नुजूमी से हम वही
हम से क़दम ज़मीन...और पढ़ें
11 hours ago

वायरल शायरी : छोड़ दी हमने हमेशा के लिए उसकी आरज़ू करना...

काव्य डेस्क

Viral Kavya
                                                                
                                                    हम मेहमान नहीं रौनक़-ए-महफ़िल है
मुद्दतों याद रखोगे कि ज़िंदगी में आया था कोई...और पढ़ें
11 hours ago

नई क्रांति : समाज को आईना दिखाती गोपालप्रसाद व्यास की हास्य कविता

काव्य डेस्क

Hasya
                                                                
                                                    कल मुझसे मेरी 'वे' बोलीं
"क्योंजी, एक बात बताओगे?"
"हाँ-हाँ, क्यों नहीं!" जरा मुझको
इसका रहस्य समझाओगे?
देखो, सन् सत्तावन बीता,
सब-कुछ ठंडा, सब-कुछ रीता,
कहते थे लोग गदर होगा,
आदमी पुनः बंदर हो...और पढ़ें
11 hours ago

ओम निश्चल: फिर मेरे प्यार का पुनर्भव हो

काव्य डेस्क

Kavita
                                                                
                                                    यह असंभव भी कभी संभव हो
फिर मेरे प्यार का पुनर्भव हो।

जिंदगी साधना में ढल जाए
कामना कल्पना में ढल जाए
पांव रखूं धरा पे जब भी मैं
मंत्र होठों में कोई घुल जाए

कोई प्रतिफल हथेलियों में हो
...और पढ़ें
12 hours ago
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