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                                                                           शब्दों का मार्मिक जाल है ग़ज़ल
लफ़्ज़ों का सुंदर कमाल है ग़ज़ल

दिल को छूती इक पाती है
जो हमें सुनायी जाती है

दिल का पाकीजा ख्याल है ग़ज़ल
लफ़्ज़ों का सुंदर कमाल है ग़ज़ल...और पढ़ें
10 hours ago
                                                                           नाकामियों के खौफ ने दीवाना कर दिया,
मंजिल के सामने भी पहूँच के निराश हूँ।

ज़िंदा हूँ इस तरह कि ग़म-ए-ज़िंदगी नहीं 
जलता हुआ दिया हूँ मगर रौशनी नहीं। 

आता है जो तूफ़ाँ आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है ...और पढ़ें
2 days ago
                                                                           
अब तक जो सराब आए थे अनजाने में आए
पहचाने हुए रस्तों का धोका भी तो देखूँ 


कभी कभी वो हमें बे-सबब भी मिलता है
असर हुआ नहीं उस पर अभी ज़माने का ...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           
गली के मोड़ से घर तक अँधेरा क्यूँ है 'निज़ाम'
चराग़ याद का उस ने बुझा दिया होगा

मंज़िलें भर दे आँख में उस की
उस के पैरों में फिर सफ़र रख दे ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           कौन कहे मा'सूम हमारा बचपन था 
खेल में भी तो आधा आधा आँगन था 
~शारिक़ कैफ़ी
 ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           
ज़िंदगी मौत तेरी मंज़िल है
दूसरा कोई रस्ता ही नहीं 


अब तो ले दे के वही शख़्स बचा है मुझ में
मुझ को मुझ से जो जुदा कर के छुपा है मुझ में ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           मिलने से निगाहों के क्या फ़ाएदा होता है
ये बात मैं समझा दूँ तुम मेरी तरफ़ देखो


तुम ने छेड़ा तो कुछ खुले हम भी
बात पर बात याद आती है ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           तेरे पहलू से जो उठ्ठूँगा तो मुश्किल ये है
सिर्फ़ इक शख़्स को पाऊँगा जिधर जाऊँगा 


तुझ से किस तरह मैं इज़्हार-ए-तमन्ना करता
लफ़्ज़ सूझा तो मुआ'नी ने बग़ावत कर दी ...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           
मरूं तो मैं किसी चेहरे में रंग भर जाऊं
'नदीम' काश यही एक काम कर जाऊं
- अहमद नदीम क़ासमी 


मिलते हुए दिलों के बीच और था फ़ैसला कोई
उस ने मगर बिछड़ते वक़्त और सवाल कर दिया 
- परवीन शाकिर ...और पढ़ें
2 weeks ago
                                                                           
मोहब्बतों में अजब है दिलों को धड़का सा
कि जाने कौन कहाँ रास्ता बदल जाए 


अब वहम है ये दुनिया इस में
कुछ खोओ तो क्या और पाओ तो क्या ...और पढ़ें
2 weeks ago
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