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418 Poems

                                                                           पानी का अनुवाद करने पर उतारू बेसबरों से कोई कैसे कहे
पानी का अनुवाद तब तक नहीं हो सकता 
जब तक प्यास का अनुवाद न हो जाए 
आत्मा का अनुवाद असंभव है 
जैसे मौन का कोई अनुवाद नहीं हो सकता 

मेरे पिता एक जटिल वाक्य...और पढ़ें
3 hours ago
                                                                           मैं जीवन के गीत लिखूंगा, तुम प्राणों के साज साधना
मैं पनघट की प्यास लिखूंगा, तुम प्रीत के राग साधना।

मेरे मन के सूने आंगन में जब-जब सांझ उतरती है,
याद तुम्हारी तब-तब आती जब-जब बारिश होती है,
मैं मन के अहसास लिखूंगा...और पढ़ें
3 hours ago
                                                                           1
मुझे हर किसी को अपना बनाने का हुनर आता है
तभी मेरे बदन पर रोज़ एक घाव नया नज़र आता है             

2
ख़तरे के निशान से ऊपर बह रहा है उम्र का पानी
वक़्त की बरसात है कि थमने का नाम नहीं ले रही।     ...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           1
हमारे जीने का अलग अंदाज़ है
एक आंख में आंसू और दूसरे में ख़्वाब है

2
सख़्त रातों में आसान सफ़र लगता है
यह मेरी मां की दुआओं का असर लगता है
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2 days ago
                                                                           मैं स्त्री हूँ 
सृष्टि के आरंभ से ही जानती थी 
अकेले होकर भी
प्रेम का उत्सव मनाना हो तो 
इसे कला में ढाल दो

वह मानता था
प्रार्थना और प्रेम 
एक ही सिक्के के दो पहलू हैं,
एक ही क्षण में बी...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           खूबसूरत चेहरे पर नक़ाब है
क़िस्सा यह भी लाजवाब है।

बरसों, बरस बंद दरो-दीवार के
आशियाने में ग़ज़ब मेहराब है। 

पाहुन पहरे इंतजार में पथराई 
पलकों में पल रहे ख़्वाब है।

आइने की शक्ल से बेख़ब...और पढ़ें
2 weeks ago
                                                                           होली लेकर आई है सत्ता का उपहार
सबको मिलने से रहा मतदाता का प्यार।
मतदाता का प्यार, छिड़ी है जंग करारी
मीठे कड़वे बोल सुनाते खद्दरधारी।

राज्यों में अब चल रही जमकर देखो जंग
नेताजी बरसा रहे इक दूजे पर रंग
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2 weeks ago
                                                                           कहाँ गईं वे मस्तियाँ, कहाँ गई वह मौज ।
वे केशर की क्यारियाँ, गोबर वाले हौज ॥
गोबर वाले हौज बीच डुबकी लगवाना ।
कुर्ते पर ‘पागल’ वाली तख़्ती लटकाना ।
याद आ रहा है हम जो करते थे अक्सर ।
बीच सड़क पर एक रुपैया कील ठोंक कर...और पढ़ें
3 weeks ago
                                                                           मैं जो  महसूस  करती  हूं
वही कागज़ पर धरती  हूं
उमड़कर  आप  ही  आए 
बस वही मैं  कविता कहती हूं

 कभी  मैं  फूल  बिछती  हूं
कभी  मैं   कांटें  थिरती  हूं
बरसकर खुद ही थम जाएं
बस वही मैं  बादल सृज...और पढ़ें
3 weeks ago
                                                                           लिफ़ाफ़ों का दुःख
चिठ्ठियों के दुःख से कभी कम नहीं रहा 
डाकिए दो दुःखों के बीच पुल बनाते रहे सदा
और गांव की सरहद पर बैठा देवता 
एक हज़ार साल पहले किसी के प्रेम में फांसी पर लटक गया था

मेरे पास तुम्हारी दो ही...और पढ़ें
3 weeks ago
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