विज्ञापन

मेरे अल्फाज़

3269 Followers 10000 Poems

स्वदेश प्यार

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                                                
                                                    मन मंदिर में हैं घंटे हजार
इनमें गूंजा दो देश प्यार
झंकृत कर दो वीणा के तार
सुंदर सुंदर सपनों से सजाओ सारा संसार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'...और पढ़ें
18 hours ago

पहरे का दिखावा

kamal jha

Mere Alfaz
                                                                
                                                    जब लुट गया खज़ाना,
तो कड़ा पहरा क्यों है?
जब दीवारें ही नहीं रहीं,
तो चौखट पर पर्दा क्यों है?

सच सरेआम बिक रहा,
तो झूठ पर पर्दा क्यों है?
जब दोषी ही रखवाले हैं,
तो न्याय का दावा क्यों है?
...और पढ़ें
18 hours ago
विज्ञापन

कुंडलिया

Avinash Beohar

Mere Alfaz
                                                                
                                                    ठंडी का है आगमन, वर्षा का प्रस्थान।
मौसम को रहता सदा, है ऋतुओं का ज्ञान।।
है ऋतुओं का ज्ञान, समय पर सब है आतीं।
पहर हुआ है पेड़, डाल पर चिड़ियाँ गातीं।।
चली समय की रेल, हरी होती है झंडी।
नरम-मुलायम धूप, बताती आई ठंड...और पढ़ें
18 hours ago

यादों में जान

Master Abhay

Mere Alfaz
                                                                
                                                    इस दिल की ज़मीं पर कभी क्या गुलाब खिलेंगे?
या ताउम्र ये रास्ते बस वीरान ही मिलेंगे?
ये किस्मत न जाने कब हमारा साथ देगी,
कब छूटेगा अंधेरा, कब मेरी जान मेरे साथ होगी?
इश्क़ कब मेरा मुकम्मल होगा ऐ ख़ुदा...
या बस यादोंऔर पढ़ें
18 hours ago
विज्ञापन

अगरचे बज़्म-ए-तरब सजाना चाहे ये दिल।

Yunush khan

Mere Alfaz
                                                                
                                                    ग़म-ए-हिज़्र भी मिला,ग़म-ए-जुदाई के बाद।
क्या देखना यह गया, इस रूसवाई के बाद।।

अगरचे बज़्म-ए-तरब सजाना चाहे ये दिल।
महफ़िल अच्छी नहीं लगती,तन्हाई के बाद।।
-यूनुस खान...और पढ़ें
18 hours ago

इश्क़ मुकम्मल है बस ख़्वाबों में।

Master Abhay

Mere Alfaz
                                                                
                                                    दूरियाँ बहुत हैं, जो कटती नहीं,
यादें उसकी दिल में मेरे सिमटती नहीं।
मैं सोचता रहता हूँ तुझे ख़यालों में,
अब इश्क़ मुकम्मल है बस ख़्वाबों में।
राहें तो खुली हैं पर क़दम चलते नहीं,
अश्कों के ये मौसम कभी बदलते नहीं।...और पढ़ें
18 hours ago

खुली चुनौती

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                                                
                                                    खुले द्वन्द्व की खुली चुनौती,
कर्ण ने अर्जुन को बोला
भीष्म पितामह गुरु द्रोण,
सबका मन भीतर से डोला
-कुँवर...और पढ़ें
18 hours ago

रणकौशल की बात

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                                                
                                                    सूदपुत्र हो राजवंश से, कैसे यह द्वन्द्व करोगे तुम
शास्त्र नहीं अनुमति देता है,आगे कैसे बढ़ोगे तुम

रणकौशल की बात यहाँ, द्वन्द्व में जो विजयी होगा
सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी पद के, मुकुट का वही जयी होगा
-कुँवर...और पढ़ें
18 hours ago

ख्याति कर्म से

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                                                
                                                    ख्याति कर्म से बनती है,
कुल वंश नहीं उसमें आता
होता रणकौशल में श्रेष्ठ जो,
वही विजयश्री को पाता
-कुँवर...और पढ़ें
18 hours ago

रुको नहीं

Sandeep Singh

Mere Alfaz
                                                                
                                                    दायित्व में दिलेरी में,
रुको नहीं झुको नहीं
लक्ष्य पर निगाह रख,
प्रयत्न में चुको नहीं
-कुँवर...और पढ़ें
18 hours ago
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

kamal jha

90 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10985 कविताएं

View Profile