मन मंदिर में हैं घंटे हजार
इनमें गूंजा दो देश प्यार
झंकृत कर दो वीणा के तार
सुंदर सुंदर सपनों से सजाओ सारा संसार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'...और पढ़ें
जब लुट गया खज़ाना,
तो कड़ा पहरा क्यों है?
जब दीवारें ही नहीं रहीं,
तो चौखट पर पर्दा क्यों है?
सच सरेआम बिक रहा,
तो झूठ पर पर्दा क्यों है?
जब दोषी ही रखवाले हैं,
तो न्याय का दावा क्यों है?
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ठंडी का है आगमन, वर्षा का प्रस्थान।
मौसम को रहता सदा, है ऋतुओं का ज्ञान।।
है ऋतुओं का ज्ञान, समय पर सब है आतीं।
पहर हुआ है पेड़, डाल पर चिड़ियाँ गातीं।।
चली समय की रेल, हरी होती है झंडी।
नरम-मुलायम धूप, बताती आई ठंड...और पढ़ें
इस दिल की ज़मीं पर कभी क्या गुलाब खिलेंगे?
या ताउम्र ये रास्ते बस वीरान ही मिलेंगे?
ये किस्मत न जाने कब हमारा साथ देगी,
कब छूटेगा अंधेरा, कब मेरी जान मेरे साथ होगी?
इश्क़ कब मेरा मुकम्मल होगा ऐ ख़ुदा...
या बस यादोंऔर पढ़ें
ग़म-ए-हिज़्र भी मिला,ग़म-ए-जुदाई के बाद।
क्या देखना यह गया, इस रूसवाई के बाद।।
अगरचे बज़्म-ए-तरब सजाना चाहे ये दिल।
महफ़िल अच्छी नहीं लगती,तन्हाई के बाद।।
-यूनुस खान...और पढ़ें
दूरियाँ बहुत हैं, जो कटती नहीं,
यादें उसकी दिल में मेरे सिमटती नहीं।
मैं सोचता रहता हूँ तुझे ख़यालों में,
अब इश्क़ मुकम्मल है बस ख़्वाबों में।
राहें तो खुली हैं पर क़दम चलते नहीं,
अश्कों के ये मौसम कभी बदलते नहीं।...और पढ़ें
खुले द्वन्द्व की खुली चुनौती,
कर्ण ने अर्जुन को बोला
भीष्म पितामह गुरु द्रोण,
सबका मन भीतर से डोला
-कुँवर...और पढ़ें
सूदपुत्र हो राजवंश से, कैसे यह द्वन्द्व करोगे तुम
शास्त्र नहीं अनुमति देता है,आगे कैसे बढ़ोगे तुम
रणकौशल की बात यहाँ, द्वन्द्व में जो विजयी होगा
सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी पद के, मुकुट का वही जयी होगा
-कुँवर...और पढ़ें
ख्याति कर्म से बनती है,
कुल वंश नहीं उसमें आता
होता रणकौशल में श्रेष्ठ जो,
वही विजयश्री को पाता
-कुँवर...और पढ़ें
दायित्व में दिलेरी में,
रुको नहीं झुको नहीं
लक्ष्य पर निगाह रख,
प्रयत्न में चुको नहीं
-कुँवर...और पढ़ें