सच में ,
ये जिंदगी हमें - -
कदम - कदम पर,
अपना महत्व या - -
मोल (कीमत )से,
वाकिफ करवाती है - -
कभी तो ,
ये बरदान स्वरूप में - -
बहुत कुछ दे देती है ,
तो कभी - -
सब कुछ से ,
हमें बंचित कर - -
देती है ,
सचमुच - -
ये हमें ,
जीने की कला से - -
सिखाती है ,
या रूबरू - -
करवाती है l
सच में ,
यह जिंदगी ,
हमें बहुत कुछ - -
सिखाती है ,
ये कभी हंसाती है - -
कभी हमें ये,
रुलाती भी है - -
अर्थात् ,
एक सी - -
कहाँ रहती है ,
ये जिंदगी - -
सच कहा जाय तो - -
यह जिंदगी ,
सुख - दुःख का - -
संगम है l
अंततः ,
यह जिंदगी ,
कभी कठिन - -
तो कभी ,
सरल भी - -
बन जाती है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
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