विश्व काव्य

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                                                                           एक खगोलशास्त्री ने कहा -
"स्वामी हमें समय के बारे में कुछ बताइए।"
और उसने जवाब दिया -
"तुम समय को मापना चाहते हो जिसे बिल्कुल भी मापा नहीं जा सकता।
समय और ऋतु के अनुसार तुम अपने व्यवहार को निर्देशित करो और इसी के साथ अपनी...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           इक बात कहना चाहता हूँ तुमसे
तुम्हें पता है कैसे हैं हालात 

गर मैं देखता हूँ
चमकते चाँद को,
या खिड़की से झाँकती पतझड़ में
सुर्ख हो चली टहनियों को
अगर मैं छूता हूँ
आग के करीब
अदृश्य राख को...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           तब अलमित्रा बोली - 
"अब आप हमें मृत्यु के बारे में कुछ बताइए।"
फिर उसने बताया -
तुमको मृत्यु का रहस्य अवश्य ज्ञात हो जाएगा।
लेकिन तुम जीवन के अंतस में झांके बिना उसके बारे में कैसे जान पाओगे ?

एक उल्लू, जिसक...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           आकस्मिक मुलाकात - विस्लावा शिम्बोर्स्का

हम मिले बड़े सलीके और शिष्टाचार के साथ 
हमने कहा- कितनी खुशी हुई आपको इतने सालों बाद देखकर 
पर हमारे भीतर थककर सो गया था बहुत-कुछ 

घास खा रहा था शेर, बाज ने अपनी उड़ा...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           ढँक देता है प्रकाश अपनी मरणशील दीप्ति से तुम्हें
अनमने फीके दुख खड़े हैं उस राह
साँझ की झिलमिली के पुराने प्रेरकों के विरुद्ध
वे लगाते चक्कर तुम्हारे चारों तरफ़

वाणी रहित, मेरी दोस्त, मैं अकेला
अकर्मण्य समय...और पढ़ें
1 month ago
                                                                           दुख की लहर ने छेड़ा होगा 
याद ने कंकर फेंका होगा 

आज तो मेरा दिल कहता है 
तू इस वक़्त अकेला होगा 

मेरे चूमे हुए हाथों से 
औरों को ख़त लिखता होगा 

भीग चलीं अब रात की पलकें 
तू अब...और पढ़ें
2 months ago
                                                                           फिर कोई आया दिल-ए-ज़ार नहीं कोई नहीं 
राह-रौ होगा कहीं और चला जाएगा 

ढल चुकी रात बिखरने लगा तारों का ग़ुबार 
लड़खड़ाने लगे ऐवानों में ख़्वाबीदा चराग़ ...और पढ़ें
3 months ago
                                                                           हमारी सभी मुलाक़ातें
हमारी आपसी दोस्ती की
कोई गारण्टी नहीं करतीं
हालांकि हम
एक-दूसरे के बहुत क़रीब थे ।

जब एक-दूसरे को
अपनी-अपनी बाँहों में बान्धते थे हम
उस समय भी
एक-दूसरे से बहुत दूर थ...और पढ़ें
3 months ago
                                                                           हम मिले
बड़े सलीके और शिष्टाचार के साथ ।

हमने कहा- कितनी खुशी हुई
आपको इतने सालों बाद देखकर !
पर हमारे भीतर थककर सो गया था बहुत-कुछ ।
घास खा रहा था शेर,
बाज ने अपनी उड़ान छोड़ दी थी ।

म...और पढ़ें
3 months ago
                                                                           जाने और ठहरने के बीच
लड़खड़ाता है दिन,
अपनी ही पारदर्शिता के प्यार में डूबा हुआ।
चक्रीय दोपहर अब एक खाड़ी है
जहां अपने सन्नाटे में डोलती है दुनिया।

सब कुछ ज़ाहिर और सब ओझल,
सब कुछ पास और पहुँंच से बाह...और पढ़ें
3 months ago
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