'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- स्थूल, जिसका अर्थ है- मोटा, बिना परिश्रम के समझ में आनेवाला। प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता- मैं तुम्हें सम्पूर्णत: जान गया हूँ
मैं तुम्हें सम्पूर्णत: जान गया हूँ।
तुम क्षितिज क...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- विदीर्ण, जिसका अर्थ है- फाड़ा या फटा हुआ। प्रस्तुत है वीरेन डंगवाल की कविता- आएँगे, उजले दिन ज़रूर आएँगे
आएँगे, उजले दिन ज़रूर आएँगे
आतंक सरीखी बिछी हुई हर ओर बर्फ़...और पढ़ें
हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है धृति जिसका अर्थ है - 1. धारण करने का गुण 2. धैर्य। कवि अज्ञेय ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है।
आज तुम शब्द न दो, न दो, कल भी मैं कहूँगा।
तुम पर्वत हो अभ्र-भेदी शिला...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- निरावरण, जिसका अर्थ है- आवरणरहित, खुला हुआ। प्रस्तुत है नरेन्द्र शर्मा कविता- धरती पर धरो चरण
जीवन की अंधियारी
रात हो उजारी!
धरती पर धरो चरण
तिमिर-तम हारी
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'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- ऊर्ध्व, जिसका अर्थ है- सीधा ऊपर की ओर उठा हुआ, ऊँचा। प्रस्तुत है रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' की कविता- अधजला गीत
आओ लिख दूँ एक अधजला गीत
तुम्हारे अधरों पर
और त...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- घ्राण, जिसका अर्थ है- नाक, सूँघने की शक्ति या क्रिया। प्रस्तुत है रामकुमार कृषक की कविता- अपना ही मुँह रही खरोंच
अपना ही मुँह रही खरोंच
नाख़ूनी सभ्यता खड़ी !
स...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- दनुज, जिसका अर्थ है- असुर, राक्षस। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- सचमुच तेरी बड़ी निराशा
सचमुच तेरी बड़ी निराशा!
जल की धार पड़ी दिखलाई,
जिसने तेरी प्यास...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- तापस, जिसका अर्थ है- तप करनेवाला, तपस्वी। प्रस्तुत है अज्ञेय की कविता- आज थका हिय-हारिल मेरा!
इस सूखी दुनिया में प्रियतम मुझको और कहाँ रस होगा?
शुभे! तुम्हारी स्मृति के सुख स...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- निस्सार, जिसका अर्थ है- सार रहित, जिसमें काम की बात न हो। प्रस्तुत है गोपालदास नीरज की कविता- एक दिन मैंने कहा यूँ दीप से
एक दिन मैंने कहा यूँ दीप से
‘‘तू धरा पर सूर्य का अवत...और पढ़ें
हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है अपांग जिसका अर्थ है - आंख का कोना; तिरछी नज़र। कवि मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है।
दया भी करोगे? दया-धाम हो,
रमो चित्त में आप तो राम हो।
हमें शक्ति...और पढ़ें