उर्दू अदब

29 Poems

                                                                           शायद मैं ज़िंदगी की सहर ले के आ गया
क़ातिल को आज अपने ही घर ले के आ गया

ता-उम्र ढूंढ़ता रहा मंज़िल मैं इश्क़ की
अंजाम ये कि गर्द-ए-सफ़र ले के आ गयाॉ

नश्तर है मेरे हाथ में कांधों पे मय-कदा
लो मैं इलाज...और पढ़ें
1 hour ago
                                                                           रात के लम्हात ख़ूनी दास्तां लिखते रहे
सुब्ह के अख़बार में हालात बेहतर हो गए
- नुसरत ग्वालियारी


सुनाते हैं मुझे ख़्वाबों की दास्तां अक्सर
कहानियों के पुर-असरार लब तुम्हारी तरह
- बशीर बद्र...और पढ़ें
3 hours ago
                                                                           जानता हूं एक ऐसे शख़्स को मैं भी 'मुनीर'
ग़म से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं


किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते
सवाल सारे ग़लत थे जवाब क्या देते...और पढ़ें
5 hours ago
                                                                           यूँ तो वो हर किसी से मिलती है 
हम से अपनी ख़ुशी से मिलती है 

सेज महकी बदन से शर्मा कर 
ये अदा भी उसी से मिलती है 

वो अभी फूल से नहीं मिलती 
जूहिए की कली से मिलती है ...और पढ़ें
21 hours ago
                                                                           मिला कर ख़ाक में फिर ख़ाक को बर्बाद करते हैं
ग़रीबों पर सितम क्या किया सितम-ईजाद करते हैं

हज़ारों दिल जला कर ग़ैर का दिल शाद करते हैं
मिटा कर सैकड़ों शहर एक घर आबाद करते हैं

मोअज़्ज़िन को भी वो सुनते नहीं न...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           कब लौटा है बहता पानी बिछड़ा साजन रूठा दोस्त
हम ने उस को अपना जाना जब तक हाथ में दामां था


रात आ कर गुज़र भी जाती है
इक हमारी सहर नहीं होती...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           बहाना ढूँडते रहते हैं कोई रोने का 
हमें ये शौक़ है क्या आस्तीं भिगोने का 

अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं काफ़ी 
हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का 

जो फ़स्ल ख़्वाब की तय्यार है तो ये जानो 
कि वक़्त...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           ऐ इश्क़ ये सब दुनिया वाले बे-कार की बातें करते हैं
पायल के ग़मों का इल्म नहीं झंकार की बातें करते हैं

हर दिल में छुपा है तीर कोई हर पांव में है ज़ंजीर कोई
पूछे कोई इन से ग़म के मज़े जो प्यार की बातें करते हैं
...और पढ़ें
2 days ago
                                                                           मैं उस की आंखों से छलकी शराब पीता हूं
ग़रीब हो के भी महंगी शराब पीता हूं

मुझे नशे में बहकते कभी नहीं देखा
वो जानता है मैं कितनी शराब पीता हूं

उसे भी देखूं तो पहचानने में देर लगे
कभी कभी तो मैं इतनी श...और पढ़ें
2 days ago
                                                                           ऐ ग़म-ए-दुनिया तुझे क्या इल्म तेरे वास्ते
किन बहानों से तबीअ'त राह पर लाई गई


ये किस मक़ाम पे पहुंचा दिया ज़माने ने
कि अब हयात पे तेरा भी इख़्तियार नहीं...और पढ़ें
2 days ago
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