आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मुखौटे पहनें लोग

                
                                                         
                            हम थे नादान जो दुनिया पे एतबार किये।
                                                                 
                            
एक मासूम सा चेहरा, कई किरदार जिये।
सामने था कोई इंसान, जो हैवान भी था,
सबकी खातिर था वो भगवान का अवतार लिये।
उसके हाथों से जहर सबने पिया, हँसके पिया,
पी के कहते हैं सुधा हम सरेबाजार पिये।
मिली है जिन्दगी आखिर तो मौत आनी है,
तेरे खाते में नकद क्या है, क्या उधार किये।
फिर न कहना कि हमें होशियार क्यों न किया,
हर एक गुनाह पे आगाह बार बार किये।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
41 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर