आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

प्रेम चुनाव नहीं, विवशता है

                
                                                         
                            प्रेम चुनाव नहीं, विवशता है
                                                                 
                            

प्रेम कोई चुनाव नहीं होता,
कि चाहा तो कर लिया,
न चाहा तो छोड़ दिया।

अगर प्रेम सच्चा है,
तो वह तुम्हारी विवशता होगा—
तुम चाहकर भी उससे
दूर नहीं जा पाओगे।

जिस प्रेम के सामने
तुम्हारे पास
हाँ या ना कहने का विकल्प हो,
वह प्रेम नहीं,
सिर्फ़ एक पसंद है।

सच्चा प्रेम तो वह है
जो निर्णय नहीं माँगता,
बस भीतर उतर जाता है,
और फिर इंसान
चाहकर भी उसे
अपने भीतर से निकाल नहीं पाता।

जिसे तुम हाँ कह सको
और ना भी कह सको,
वह प्रेम हो ही नहीं सकता—
क्योंकि सच्चा प्रेम
इंसान की मर्ज़ी नहीं,
उसकी आत्मा की आवाज़ होता है।

— रजनी
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
17 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर