सम्मान अगर मैं तुमको दूं तो,
लौटकर मुझे सम्मान मिलेगा,
करूं नमन अगर तुमको मैं,
प्रभु प्रसाद आशीर्वाद मिलेगा।
ये रीति जगत की ऐंसी है
करनी का फल देती है,
करें कर्म हम जैसे आज,
कल वैंसा ही प्रतिफल देती है।
जैंसा बोया हमने पीछे,
हमको वैंसा अन्न मिले,
दान पुण्य प्रभु सेवा के,
अनुकूल हमें मृदु फल मिलें।
यह रीति कोई नई नहीं,
पुरखों से चली पुरानी है,
सदव्यवहार ईमान आचरण,
मनुजता की निशानी है।
सम्मान अगर मैं तुमको दूं तो,
लौटकर मुझे सम्मान मिलेगा,
-देव सिंह गढ़वाली
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