US-China: अमेरिका-चीन टैरिफ वार्ता में दिखी प्रगति, आज फिर होगी बातचीत: बाजार को राहत की आस
अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ विवाद पर जेनेवा में शनिवार को 10 घंटे चली अहम बातचीत के अब रविवार को फिर से वार्ता होगी। ट्रंप ने इस वार्ता को बेहद सफल बताया। अधिकारियों की माने तो दोनों पक्षों ने इस वार्ता में व्यापार संबंध सुधारने पर चर्चा की।
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अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ विवाद को लेकर हो रही गंभीर बातचीत शनिवार को 10 घंटे तक चली। साथ ही अब ये वार्ता रविवार को एक बार फिर शुरू होगी। अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी नाम नहीं बतना के शर्त पर यह जानकारी दी। शनिवार को बैठक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि चीन के साथ आज की बैठक बहुत अच्छी रही। कई मुद्दों पर बातचीत हुई और कई बातों पर सहमति बनी। हमने एक नए तरीके से, दोस्ताना माहौल में व्यापार संबंधों को रीसेट किया है।
बता दें कि इस बैठक में अमेरिका की ओर से ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीयर शामिल हुए, जबकि चीन का प्रतिनिधित्व वाइस प्रीमियर हे लिफेंग ने किया। ये बातचीत 18वीं सदी की एक ऐतिहासिक इमारत जेनेवा में स्विस यूएन राजदूत के निवास विला सलादिन में हुई।
बैठक के बाद भी बड़ी कामयाबी की उम्मीद कम
हालांकि किसी बड़ी सफलता की संभावना कम है, लेकिन यह उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों देश एक-दूसरे पर लगाए गए भारी टैक्स यानी टैरिफ को कम कर सकते हैं। इससे वैश्विक बाजारों को राहत मिल सकती है। बता दें कि टैरिफ को लेकर विविदा बढ़ने के बाद पिछले महीने ट्रंप ने चीन से आने वाले सामानों पर कुल 145% तक टैक्स बढ़ा दिया था, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी वस्तुओं पर 125% तक टैक्स लगा दिया।
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विवाद बढ़ा तो टैरिफ कम करने पर ट्रंप सहमत
वहीं दूसरी ओर बीते शुक्रवार को ट्रंप ने इशारा दिया था कि अमेरिका चीन पर लगे टैरिफ में कमी कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी लिखा कि 80% टैक्स सही रहेगा। मामले में विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहली बार है जब हे लिफेंग और स्कॉट बेसेंट आमने-सामने बातचीत कर रहे हैं। वॉशिंगटन स्थित स्टिमसन सेंटर की विशेषज्ञ सुन युन ने कहा कि इस बैठक से किसी बड़ी उपलब्धि की उम्मीद नहीं है, लेकिन अगर दोनों देश टैरिफ में थोड़ी भी नरमी दिखाते हैं, तो यह एक सकारात्मक संकेत होगा।
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ट्रंप और उनकी टैरिफ नीति
गौरतलब है कि ट्रंप ने राष्ट्रपति पद पर लौटने के बाद एक बार फिर टैरिफ को अपनी आर्थिक नीति का प्रमुख हथियार बना लिया है। उन्होंने लगभग हर देश से आने वाले सामानों पर 10% टैक्स लगाया है। लेकिन चीन के साथ उनका टकराव सबसे ज्यादा तीखा रहा है। चीन पर लगाए गए टैरिफ का एक हिस्सा फेंटानिल नामक मादक पदार्थ को अमेरिका लाने से रोकने के लिए लगाया गया है, जबकि बाकी पुराने व्यापार विवादों से जुड़े हैं, जिनमें तकनीकी चोरी और सब्सिडी जैसे मुद्दे शामिल हैं।
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