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तैयारी: मानव रोबोट करेंगे दुश्मन का सामना, जंगल-पहाड़ कहीं भी हो सकेंगे तैनात; डीआरडीओ कर रहा विकसित

Sun, 11 May 2025 05:07 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 11 May 2025 05:07 AM IST
सार

डीआरडीओ के वैज्ञानिक चार साल से ऐसे मानव रोबोट पर काम कर रहे हैं, जो सीधे इंसानी आदेश पर जटिल सैन्य कार्य कर सके। इसका उद्देश्य खतरनाक हालात में सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अब तक ऊपरी और निचले हिस्सों के अलग-अलग प्रोटोटाइप तैयार किए जा चुके हैं।

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Human robots will face the enemy DRDO is developing them News In Hindi
मानव रोबोट (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : MetaAI

विस्तार

भारत और पाकिस्तान में तनाव के बीच डीआरडीओ के वैज्ञानिक सैन्य अभियानों के लिए मानव रोबोट बनाने पर काम रहे हैं। भविष्य में सैनिकों की सुरक्षा की दृष्टि से मानव रोबोट काफी कारगर साबित होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डीआरडीओ के अंतर्गत आने वाली प्रमुख प्रयोगशाला अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (इंजीनियर्स) एक ऐसी मशीन विकसित कर रही है, जो सीधे इंसानों के आदेश के तहत जटिल कार्य कर सकेगी।
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चार साल से चल रहा है काम
इसका उद्देश्य खतरनाक वातावरण में सैनिकों के जोखिम को कम करना है। डीआरडीओ की इस प्रयोगशाला के अंतर्गत आने वाले सिस्टम एंड टेक्नोलॉजी फॉर एडवांस्ड रोबोटिक्स सेंटर के समूह निदेशक एसई तलोले ने कहा, टीम चार साल से इस परियोजना पर काम कर रही है। हमने ऊपरी और निचले हिस्से के लिए अलग-अलग प्रोटोटाइप विकसित किए हैं। 
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सैनिकों की मदद को तैयार होगा रोबोट
इसके साथ ही टालोले ने बताया कि यह ह्यूमनॉइड रोबोट मानव आदेशों के तहत जटिल कार्य कर सकेगा और सीधे सैनिकों की जगह लेकर उन्हें जोखिम भरे इलाकों में जाने से बचा सकेगा। इसका उद्देश्य है कि कमांड पर चलने वाला एक ऐसा रोबोट बनाया जाए जो उच्च खतरे वाले मिशनों में मददगार साबित हो।

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साल 2027 तक पूरी हो जाएगी परियोजना
तलोले ने कहा कि सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह सुनिश्चित करना है कि रोबोट कार्यों को सुचारू रूप से कर सके, जिसके लिए संतुलन, तेजी से डाटा प्रोसेसिंग और जमीनी स्तर पर कार्य में महारत हासिल करना आवश्यक है। गौरतलब है कि इस तरह का रोबोट भारतीय सेना के लिए आने वाले समय में गेमचेंजर साबित हो सकता है। इससे न केवल सैनिकों की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि तकनीक के मोर्चे पर भारत की आत्मनिर्भरता को भी बल मिलेगा।
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