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अमेरिका का मिसाइल स्टॉक खत्म होने की कगार पर?: ईरान पर 850 टॉमहॉक दागे जाने के बाद पेंटागन में हलचल, उठे सवाल

Sat, 28 Mar 2026 09:24 AM IST
Shivam Garg वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: Shivam Garg Updated Sat, 28 Mar 2026 09:24 AM IST
सार

अमेरिका ने ईरान पर चार हफ्तों में 850 टॉमहॉक मिसाइलें दागीं, लेकिन पेंटागन का दावा है कि स्टॉक पर्याप्त है। विशेषज्ञ और सैन्य विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं क्या अमेरिकी सेना सच में भविष्य के संघर्ष के लिए तैयार है या मिसाइल स्टॉक खतरे में है?

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West Asia Crisis: US Missile Stock Concern, Pentagon Faces Questions After Firing 850 Tomahawks in Iran
मिसाइल स्टॉक खत्म होने की कगार पर? - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में अमेरिकी सेना ने चार हफ्तों के भीतर 850 से अधिक टॉमहॉक मिसाइलें दागे हैं। पेंटागन के अधिकारियों ने इस तेजी से मिसाइल इस्तेमाल को अलार्मिंग बताते हुए चिंता जताई है।

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रिपोर्ट के अनुसार, टोमाहॉक मिसाइल बनाने में करीब 2 साल लग सकते हैं और एक मिसाइल की कीमत $3.6 मिलियन है। वहीं पिछले साल के बजट में केवल 57 मिसाइलों का प्रावधान था। कुछ अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम एशिया में टोमाहॉक की संख्या बेहद कम है और यदि कोई उपाय नहीं किया गया, तो मिसाइलों का स्टॉक जल्दी समाप्त हो सकता है।
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पेंटागन और ट्रंप प्रशासन ने किया खारिज
अमेरिकी मीडिया में यह खबर फैलने के बाद पेंटागन और ट्रंप प्रशासन ने चिंताओं को खारिज किया। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि अमेरिकी सेना के पास किसी भी मिशन को समय और स्थान के अनुसार अंजाम देने के लिए पर्याप्त हथियार और अम्यूनिशन मौजूद हैं। वहीं अमेरिका की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त गोला-बारूद, एमो और हथियारों का स्टॉक उपलब्ध हैं।
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मिसाइलों से दोबारा तैयार करने में लगेंगे कई साल
विशेषज्ञों का कहना है कि 800 से अधिक मिसाइलों के इस्तेमाल से पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में किसी भी संभावित संघर्ष के लिए बड़ी कमी बन गई है। मार्क कैनसियन के अनुसार, युद्ध की शुरुआत में नौसेना के पास लगभग 3,100 टोमाहॉक मिसाइलें थीं और इनको फिर से तैयार करने में कई साल लग सकते हैं।

गौरतलब है कि टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल पहली बार 1991 में पर्शियन गल्फ युद्ध में किया गया था। ये मिसाइलें 1,000 मील से अधिक दूरी तय कर सकती हैं और इन्हें नौसेना के सतही युद्धपोतों और पनडुब्बियों से लॉन्च किया जा सकता है। इससे पायलटों को खतरनाक हवाई क्षेत्रों में भेजने की आवश्यकता कम हो जाती है।


इस्राइली सेना प्रमुख ने भी बढ़ते दबाव पर जताई थी चिंता
इससे पहले इस्राइली रक्षा बल (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ, लेफ्टिनेंट जनरल आयल जमीर ने भी ईरान के साथ जंग के बीच चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण इस्राइली सेना को बड़े नुकसान की आशंका है। उन्होंने यह चेतावनी बढ़ते दबाव और सैनिकों की गंभीर कमी का जिक्र करते हुए दी। इस्राइली सेना के शीर्ष अफसर जमीर ने सेना में भर्ती को लेकर कानून, नागरिकों के कर्तव्य को स्पष्ट करने वाले कानून और अनिवार्य सैन्य सेवा का विस्तार किए जाने पर भी जोर दिया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, अगर ये कदम नहीं उठाए गए तो इस्राइल की सेना नियमित अभियान चलाने और अपनी आरक्षित प्रणाली को बरकरार रखने में संघर्ष कर सकती है। खास बात ये है कि जमीर पहले भी इन मुद्दों पर चिंता जता चुके हैं।


 

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