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म्यांमार कोर्ट ने रायटर्स के पत्रकार की अपील को किया खारिज
Fri, 11 Jan 2019 12:57 PM IST
संदीप भट्ट
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: संदीप भट्ट
Updated Fri, 11 Jan 2019 12:57 PM IST
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म्यांमार कोर्ट ने रायटर्स के पत्रकार की अपील को खारिज कर दिया और 7 साल की कैद की सजा बरकरार रखा है। बता दें कि देश में रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हुए अत्याचारों पर रिपोर्टिंग के दौरान गोपनीय सूचनाओं का उल्लंघन करने के लिए दिसंबर 2017 में 32 वर्षीय वा लोन और 28 वर्षीय क्यॉ सो को सात साल कैद की सजा सुनाई गई थी।
अभियोजक पक्ष का कहना है कि रखाइन प्रांत में सुरक्षा अभियानों के संबंध में उनके पास गोपनीय सूचना थी। सेना की अगुवाई में रोहिंग्या मुस्लिमों पर की गई दमनकारी कार्रवाई के बाद लाखों रोहिंग्या वहां से भाग गए थे।
गिरफ्तारी के वक्त वे 10 रोहिंग्या के नरसंहार के बारे में पता लगा रहे थे। दोनों पत्रकारों की दलील है कि वे पुलिस के बिछाए जाल के शिकार हुए हैं। उनकी इस दलील के समर्थन में एक सेवा अधिकारी ने गवाही भी दी है कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें फंसाने के लिए दूसरों को आदेश दिए थे।
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अदालत में इन दोनों का पक्ष रख रहे वकीलों का कहना है कि यांगून क्षेत्रीय उच्च न्यायालय शुक्रवार शाम तक आने वाले अपने फैसले में सजा बरकरार रख सकती है, सजा कम कर सकती है या उन पर लगे दोष को रद्द कर सकती है।
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अभियोजक पक्ष का कहना है कि रखाइन प्रांत में सुरक्षा अभियानों के संबंध में उनके पास गोपनीय सूचना थी। सेना की अगुवाई में रोहिंग्या मुस्लिमों पर की गई दमनकारी कार्रवाई के बाद लाखों रोहिंग्या वहां से भाग गए थे।
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गिरफ्तारी के वक्त वे 10 रोहिंग्या के नरसंहार के बारे में पता लगा रहे थे। दोनों पत्रकारों की दलील है कि वे पुलिस के बिछाए जाल के शिकार हुए हैं। उनकी इस दलील के समर्थन में एक सेवा अधिकारी ने गवाही भी दी है कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें फंसाने के लिए दूसरों को आदेश दिए थे।
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अदालत में इन दोनों का पक्ष रख रहे वकीलों का कहना है कि यांगून क्षेत्रीय उच्च न्यायालय शुक्रवार शाम तक आने वाले अपने फैसले में सजा बरकरार रख सकती है, सजा कम कर सकती है या उन पर लगे दोष को रद्द कर सकती है।