{"_id":"68bd7d670ed8dfe0380047c4","slug":"japan-pm-shigeru-ishiba-resignation-ldp-leadership-know-process-of-selecting-new-pm-and-contenders-explained-2025-09-07","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Japan: शिगेरु इशिबा ने क्यों छोड़ा प्रधानमंत्री पद, अब कैसे चुना जाएगा जापान का अगला पीएम, कौन-कौन दावेदार?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Japan: शिगेरु इशिबा ने क्यों छोड़ा प्रधानमंत्री पद, अब कैसे चुना जाएगा जापान का अगला पीएम, कौन-कौन दावेदार?
Sun, 07 Sep 2025 06:11 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 07 Sep 2025 06:11 PM IST
विज्ञापन
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
सार
Please wait...
जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के इस्तीफे के बाद नए पीएम की रेस शुरू।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था- जापान में राजनीतिक संकट लगातार जारी है। इस बीच देश के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने रविवार को अपने पद से इस्तीफा देने का एलान कर दिया। इशिबा ने अपनी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को टूट से बचाने के लिए पीएम पद छोड़ने की बात कही। गौरतलब है कि पार्टी सोमवार को नेतृत्व के लिए चुनाव कराने की तैयारी कर चुकी थी। ऐसे में अगर इस चुनाव को मंजूरी मिल जाती तो इसे इशिबा के नेतृत्व पर अविश्वास के तौर पर देखा जाता और पार्टी में ही सर्वसम्मति का नेतृत्व न होने की वजह से फूट पड़ सकती थी।ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर जापान में अब आगे क्या होगा? देश का अगला प्रधानमंत्री कैसे चुना जाएगा? इस पद के लिए कौन-कौन से नेता दावेदारी में हैं? आइये जानते हैं...
पहले जानें- क्यों इशिबा के हाथ से चली गई सत्ता?
जापान में प्रधानमंत्री चुने जाने की प्रक्रिया अन्य देशों के मुकाबले काफी जटिल है। इशिबा जिस लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हैं, उसने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अधिकतर वर्षों तक देश पर शासन किया है। हालांकि, पार्टी की अंदरूनी राजनीति के चलते प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बाद से देश में चार साल में लगातार चार पीएम बदल चुके हैं।
गौरतलब है कि जापान में पिछले साल ही प्रधानमंत्री पद के चुनाव हुए थे। इसमें शिगेरु इशिबा की एलडीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हालांकि, 465 सीट वाले संसद के निचले सदन- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए हुए चुनाव में इशिबा की पार्टी 233 सीटों के बहुमत से कुछ दूर रह गई। उसे 191 सीटें मिलीं। साथ ही उसकी गठबंधन की साथी पार्टी- कोमिएतो भी बहुमत तक पहुंचाने लायक सीटें नहीं ला पाई। जापान में यह 1955 के बाद पहली बार था, जब किसी भी दल को 200 सीटें नहीं मिलीं। हालांकि, इसके बावजूद इशिबा ने संसद में विश्वास मत के लिए हुई वोटिंग में 221 वोट हासिल कर लिए, जो कि बहुमत से महज 12 ही कम रहा। जापान की व्यवस्था के मुताबिक, उन्हें अल्पमत की सरकार में प्रधानमंत्री का पद मिला।
जापान में प्रधानमंत्री चुने जाने की प्रक्रिया अन्य देशों के मुकाबले काफी जटिल है। इशिबा जिस लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता हैं, उसने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अधिकतर वर्षों तक देश पर शासन किया है। हालांकि, पार्टी की अंदरूनी राजनीति के चलते प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बाद से देश में चार साल में लगातार चार पीएम बदल चुके हैं।
गौरतलब है कि जापान में पिछले साल ही प्रधानमंत्री पद के चुनाव हुए थे। इसमें शिगेरु इशिबा की एलडीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हालांकि, 465 सीट वाले संसद के निचले सदन- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के लिए हुए चुनाव में इशिबा की पार्टी 233 सीटों के बहुमत से कुछ दूर रह गई। उसे 191 सीटें मिलीं। साथ ही उसकी गठबंधन की साथी पार्टी- कोमिएतो भी बहुमत तक पहुंचाने लायक सीटें नहीं ला पाई। जापान में यह 1955 के बाद पहली बार था, जब किसी भी दल को 200 सीटें नहीं मिलीं। हालांकि, इसके बावजूद इशिबा ने संसद में विश्वास मत के लिए हुई वोटिंग में 221 वोट हासिल कर लिए, जो कि बहुमत से महज 12 ही कम रहा। जापान की व्यवस्था के मुताबिक, उन्हें अल्पमत की सरकार में प्रधानमंत्री का पद मिला।
इशिबा को उम्मीद थी कि उनकी पार्टी देश के उच्च सदन- हाउस ऑफ काउंसलर्स में बेहतर प्रदर्शन कर अल्पमत की सरकार को लेकर उठ रहे संदेह को दूर कर देंगे। हालांकि, लगातार भ्रष्टाचार में घिरते नेताओं, ट्रंप के टैरिफ और देश में बढ़ती महंगाई ने जुलाई में हुए उच्च सदन के चुनावों में इशिबा को बड़ा झटका दिया।
उच्च सदन के चुनाव नतीजों ने दिया इशिबा को बड़ा झटका?
248 सीटों वाले उच्च सदन की 124 सीटों पर जुलाई में चुनाव हुए। इशिबा की एलडीपी के पास पहले से ही इस सदन में 75 सांसद थे। यानी उच्च सदन में बहुमत के लिए उनकी पार्टी को 124 में से 50 सीटें ही जीतनी थीं। हालांकि, उनका और कोमिएतो पार्टी का गठबंधन 47 सीटों पर अटक गया और बहुमत के आंकड़े से तीन सीट कम यानी 122 पर फंस गया। इसके चलते पहली बार लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी संसद के दोनों सदनों में अल्पमत में आ गई। इसके बाद से ही शिगेरु इशिबा के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे थे। पार्टी के भीतर से भी उनका विरोध शुरू हो गया और उनसे इस्तीफे की मांग की जाने लगी।
Japan: पीएम इशिबा देंगे इस्तीफा, अपनों के विरोध के बीच फैसला; सत्ता पर काबिज पार्टी में फूट रोकने की कवायद
उच्च सदन के चुनाव नतीजों ने दिया इशिबा को बड़ा झटका?
248 सीटों वाले उच्च सदन की 124 सीटों पर जुलाई में चुनाव हुए। इशिबा की एलडीपी के पास पहले से ही इस सदन में 75 सांसद थे। यानी उच्च सदन में बहुमत के लिए उनकी पार्टी को 124 में से 50 सीटें ही जीतनी थीं। हालांकि, उनका और कोमिएतो पार्टी का गठबंधन 47 सीटों पर अटक गया और बहुमत के आंकड़े से तीन सीट कम यानी 122 पर फंस गया। इसके चलते पहली बार लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी संसद के दोनों सदनों में अल्पमत में आ गई। इसके बाद से ही शिगेरु इशिबा के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे थे। पार्टी के भीतर से भी उनका विरोध शुरू हो गया और उनसे इस्तीफे की मांग की जाने लगी।
Japan: पीएम इशिबा देंगे इस्तीफा, अपनों के विरोध के बीच फैसला; सत्ता पर काबिज पार्टी में फूट रोकने की कवायद
अब जानें- कैसे चुना जाता है जापान में प्रधानमंत्री?
जापान में पीएम पद अब तक लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के मुखिया शिगेरु इशिबा के पास था। हालांकि, पार्टी के प्रमुख का पद छोड़ने के बाद अब एलडीपी को अपना नया प्रमुख चुनना होगा।
जापान में पीएम पद अब तक लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के मुखिया शिगेरु इशिबा के पास था। हालांकि, पार्टी के प्रमुख का पद छोड़ने के बाद अब एलडीपी को अपना नया प्रमुख चुनना होगा।
सितंबर 2024 के चुनाव को देखा जाए तो सामने आता है कि एलडीपी में पार्टी मुखिया चुनने के लिए हर सांसद के पास एक वोट होता है। यह सभी पहले राउंड में वोटिंग में हिस्सा लेते हैं। इसमें साधारण बहुमत हासिल करने वाला उम्मीदवार पार्टी का मुखिया चुन लिया जाता है।
- अगर किसी भी उम्मीदवार को बहुमत नहीं मिलता तो अगले राउंड की रेस उन दो उम्मीदवारों के बीच होती है, जिन्हें पहले राउंड में सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं।
- दूसरे राउंड में एक बार फिर हर एक सांसद को एक वोट मिलता है। हालांकि, उनके वोटों की ताकत 47 प्रांतों को बराबर अधिकार देने के हिसाब से घट जाती है।
- यानी अगर किसी एक प्रांत में चार सांसद हैं और दूसरे प्रांत में 10 सांसद तो उनके वोटों की ताकत इस तरह बंट जाएगी कि दोनों प्रांत को बराबर अधिकार हो।
एलडीपी में नए पार्टी प्रमुख की नियुक्ति के बाद कैसे होगा नए पीएम का चुनाव
गौरतलब है कि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी संसद के दोनों सदनों में बहुमत खो चुकी है। ऐसे में यह तय नहीं है कि पार्टी का जो भी नया नेता चुना जाएगा, उसे संसद में अल्पमत का नेता बनने का मौका मिलेगा। यानी उसे बाहर से कुछ समर्थन जुटाने की जरूरत पड़ेगी। हालांकि, जापान में ट्रंप के टैरिफ और बढ़ती महंगाई की वजह से जिस तरह की स्थितियां पैदा हुई हैं, उससे एलडीपी के किसी नेता का अगला पीएम बनना काफी कठिन हो सकता है।
1994 में एलडीपी को कुछ इसी तरह की स्थिति से जूझना पड़ा था। हालांकि, तब पार्टी ने अपने प्रतिद्वंद्वी दल- जापान सोशलिस्ट पार्टी और एक छोटी पार्टी के साथ गठबंधन के जरिए अपनी सत्ता स्थापित कर ली थी। मजेदार बात यह है कि तब जापान का प्रधानमंत्री जेएसपी के मुखिया तोमिची मुरयामा को दिया गया था।
गौरतलब है कि लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी संसद के दोनों सदनों में बहुमत खो चुकी है। ऐसे में यह तय नहीं है कि पार्टी का जो भी नया नेता चुना जाएगा, उसे संसद में अल्पमत का नेता बनने का मौका मिलेगा। यानी उसे बाहर से कुछ समर्थन जुटाने की जरूरत पड़ेगी। हालांकि, जापान में ट्रंप के टैरिफ और बढ़ती महंगाई की वजह से जिस तरह की स्थितियां पैदा हुई हैं, उससे एलडीपी के किसी नेता का अगला पीएम बनना काफी कठिन हो सकता है।
1994 में एलडीपी को कुछ इसी तरह की स्थिति से जूझना पड़ा था। हालांकि, तब पार्टी ने अपने प्रतिद्वंद्वी दल- जापान सोशलिस्ट पार्टी और एक छोटी पार्टी के साथ गठबंधन के जरिए अपनी सत्ता स्थापित कर ली थी। मजेदार बात यह है कि तब जापान का प्रधानमंत्री जेएसपी के मुखिया तोमिची मुरयामा को दिया गया था।
ऐसे में जब एलडीपी अपना नेता चुन लेगी तो उसे संसद के निचले सदन में बहुमत हासिल करना होगा। हालांकि, यहां पार्टी को विपक्ष से चुनौती मिल सकती है, जो कि अपने नेता को पीएम पद का उम्मीदवार बनाकर उतार सकती है। इनमें जिस भी उम्मीदवार को ज्यादा वोट मिलते हैं, वह देश का अगला प्रधानमंत्री बन सकता है। ऐसे में अगर विपक्ष का नेता सदन में ज्यादा सांसदों के वोट हासिल कर लेता है तो इसे सत्तासीन पार्टी के लिए अविश्वास मत के तौर पर देखा जाता है।
Japan: जापानी प्रधानमंत्री ने ट्रंप के नए टैरिफ को बताया निराशाजनक, बोले- राष्ट्रीय हित से पीछे नहीं हटेंगे
हालांकि, अगर सत्तासीन दल और विपक्ष दोनों के ही उम्मीदवारों को बहुमत न मिले तो उच्च सदन में वोटिंग होती है। हालांकि, वोटिंग निचले सदन के नेताओं के नाम पर ही होती है। यानी जापान में पीएम पद पारंपरिक तौर पर निचले सदन के नेता के पास ही रहा है।
Japan: जापानी प्रधानमंत्री ने ट्रंप के नए टैरिफ को बताया निराशाजनक, बोले- राष्ट्रीय हित से पीछे नहीं हटेंगे
हालांकि, अगर सत्तासीन दल और विपक्ष दोनों के ही उम्मीदवारों को बहुमत न मिले तो उच्च सदन में वोटिंग होती है। हालांकि, वोटिंग निचले सदन के नेताओं के नाम पर ही होती है। यानी जापान में पीएम पद पारंपरिक तौर पर निचले सदन के नेता के पास ही रहा है।
एक स्थिति यह भी रही है कि अगर संसद का निचला सदन किसी एक दल के नेता को चुनता है और उच्च सदन किसी और दल के नेता को चुनता है तो आमतौर पर निचले सदन को प्राथमिकता दी जाती है। 2008 के चुनाव में कुछ ऐसा ही हुआ था, जब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचले सदन) में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी का नेता जीता था, वहीं उच्च सदन में विपक्ष के नेता की विजयी हुई थी। इसके बावजूद देश के पीएम पद पर एलडीपी नेता ही बैठे।
नए प्रधानमंत्री इन स्थितियों में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए मध्यावधि चुनाव का एलान कर सकते हैं।
नए प्रधानमंत्री इन स्थितियों में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए मध्यावधि चुनाव का एलान कर सकते हैं।
शिगेरु इशिबा के बाद कौन हो सकता है पीएम पद का दावेदार
चूंकि, एलडीपी के पास संसद के दोनों सदनों में बहुमत नहीं है, इसलिए संभावना है कि जापान में विपक्षी नेता प्रधानमंत्री पद हासिल कर लें। अब तक पीएम पद की रेस में तीन नाम सामने आए हैं।
चूंकि, एलडीपी के पास संसद के दोनों सदनों में बहुमत नहीं है, इसलिए संभावना है कि जापान में विपक्षी नेता प्रधानमंत्री पद हासिल कर लें। अब तक पीएम पद की रेस में तीन नाम सामने आए हैं।
1. सनाए तकाइची: सत्तासीन लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता सनाए तकाइची अगर अपनी प्रधानमंत्री बनती हैं तो वे इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला होंगी। इससे पहले तकाइची आर्थिक सुरक्षा और गृह मंत्रालय का जिम्मा संभाल चुकी हैं। बीते साल जब एलडीपी के प्रमुख पद के लिए वोटिंग हुई थी, तो शिगेरु इशिबा को तकाइची से ही चुनौती मिली थी। हालांकि, इसमें इशिबा विजेता रहे थे।
तकाइची को जापान में युद्ध के बाद से लागू संविधान में परिवर्तन की मांग करने वाली नेता के तौर पर जाना जाता है। हालांकि, कई विश्लेषक उनके विचारों को जापान के पुराने समय के सैन्यीकरण से जोड़कर देखते हैं।
2. शिनजिरो कोइजुमी: शिनजिरो का नाता जापान के राजनीतिक कोइजुमी परिवार से रहा है। अगर वे चुनाव जीतते हैं तो आधुनिक युग में जापान के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन सकते हैं। कोइजुमी पिछले साल भी पार्टी के नेतृत्व की रेस में थे। इस दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी पार्टी का चेहरा सुधारने का वादा किया था।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़े कोइजुमी पार्टी नेतृत्व की रेस में इशिबा से हारने के बाद भी उनके कैबिनेट में कृषि मंत्री के तौर पर शामिल रहे थे। इस दौरान उन पर लगातार कृषि क्षेत्र में बढ़ती महंगाई को कम करने की जिम्मेदारी थी। इससे पहले वे पर्यावरण मंत्री का पद भी संभाल चुके हैं। हालांकि, इस दौरान उन्होंने जापान में परमाणु ऊर्जा पैदा करने वाले परमाणु संयंत्रों को हटाने का प्रस्ताव आगे रख दिया था, जिसे लेकर उनकी आलोचना हुई थी।
तकाइची को जापान में युद्ध के बाद से लागू संविधान में परिवर्तन की मांग करने वाली नेता के तौर पर जाना जाता है। हालांकि, कई विश्लेषक उनके विचारों को जापान के पुराने समय के सैन्यीकरण से जोड़कर देखते हैं।
2. शिनजिरो कोइजुमी: शिनजिरो का नाता जापान के राजनीतिक कोइजुमी परिवार से रहा है। अगर वे चुनाव जीतते हैं तो आधुनिक युग में जापान के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन सकते हैं। कोइजुमी पिछले साल भी पार्टी के नेतृत्व की रेस में थे। इस दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरी पार्टी का चेहरा सुधारने का वादा किया था।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़े कोइजुमी पार्टी नेतृत्व की रेस में इशिबा से हारने के बाद भी उनके कैबिनेट में कृषि मंत्री के तौर पर शामिल रहे थे। इस दौरान उन पर लगातार कृषि क्षेत्र में बढ़ती महंगाई को कम करने की जिम्मेदारी थी। इससे पहले वे पर्यावरण मंत्री का पद भी संभाल चुके हैं। हालांकि, इस दौरान उन्होंने जापान में परमाणु ऊर्जा पैदा करने वाले परमाणु संयंत्रों को हटाने का प्रस्ताव आगे रख दिया था, जिसे लेकर उनकी आलोचना हुई थी।
3. योशिमासा हयाशी: हयाशी को दिसंबर 2023 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री फूमियो किशिदा ने मुख्य कैबिनेट सचिव नियुक्त किया था। इसके बाद वे इशिबा कैबिनेट का भी हिस्सा रहे। हयाशी का अनुभव उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया जाता है। वे रक्षा मंत्रालय से लेकर विदेश और कृषि मंत्रालय तक संभाल चुके हैं। वे अमेरिकी सांसद स्टीफन नील और सीनेटर विलियम रॉथ जूनियर के स्टाफ का हिस्सा रहे हैं और अंग्रेजी पर जबरदस्त पकड़ होने की वजह से उन्हें विदेश नीति के मामलों में भी मजबूत माना जाता है।
हयाशी इससे पहले 2012 और 2024 में पार्टी के नेतृत्व के लिए दावेदारी पेश कर चुके हैं।
4. योशिहिको नोदा: जापान के पूर्व प्रधानमंत्री और सेंटर-लेफ्ट कॉन्स्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के मुखिया नोदा को विपक्ष की ओर से पीएम पद का चेहरा घोषित किया जा सकता है। वे 2011 से 2012 के छोटे अंतराल में पीएम रहे। उन्होंने एक दौर में एलडीपी के साथ मिलकर जापान के उपभोक्ता कर को 10 फीसदी पहुंचाने का विधेयक बढ़ाया था, ताकि सार्वजनिक कर्ज को कम किया जा सके। इसके बाद से ही उन्हें वित्त मामलों में एक अलग पहचान मिली। 2019 में उनकी योजना के मुताबिक उपभोक्ता टैक्स को अधिकतर उत्पादों के लिए 10 फीसदी कर भी दिया गया।
हयाशी इससे पहले 2012 और 2024 में पार्टी के नेतृत्व के लिए दावेदारी पेश कर चुके हैं।
4. योशिहिको नोदा: जापान के पूर्व प्रधानमंत्री और सेंटर-लेफ्ट कॉन्स्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के मुखिया नोदा को विपक्ष की ओर से पीएम पद का चेहरा घोषित किया जा सकता है। वे 2011 से 2012 के छोटे अंतराल में पीएम रहे। उन्होंने एक दौर में एलडीपी के साथ मिलकर जापान के उपभोक्ता कर को 10 फीसदी पहुंचाने का विधेयक बढ़ाया था, ताकि सार्वजनिक कर्ज को कम किया जा सके। इसके बाद से ही उन्हें वित्त मामलों में एक अलग पहचान मिली। 2019 में उनकी योजना के मुताबिक उपभोक्ता टैक्स को अधिकतर उत्पादों के लिए 10 फीसदी कर भी दिया गया।
5. युइचिरो तमाकी: तमाकी की मध्यमार्गी-दक्षिणपंथी पार्टी हालिया चुनाव में सबसे तेजी से उभरी है। वित्त मंत्रालय में एक समय अफसर रहे तमाकी ने 2018 में ही डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ पीपल की नींव रखी। वे लगातार सरकारों से टैक्स कटौती को कम करने और लोगों के हाथ में आने वाले पैसे को बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। साथ ही उपभोक्ता टैक्स के खिलाफ भी रहे हैं। इतना ही नहीं तमाकी जापान की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और ज्यादा परमाणु पावर प्लांट्स की स्थापना के पक्ष में रहे हैं। हाल ही में चर्चा में तब आए थे, जब उन्होंने विदेशी नागरिकों के जमीन अधिग्रहण को लेकर सख्त नियम बनाने की मांग कर दी थी।
अन्य वीडियो
अन्य वीडियो