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US: अमेरिका में भारतीय छात्र सहित 4 छात्रों ने किया निर्वासन के खिलाफ मुकदमा, वीजा रद्द करने पर उठाए सवाल

Wed, 16 Apr 2025 04:26 PM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मिशिगन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मिशिगन Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 16 Apr 2025 04:26 PM IST
सार

अमेरिका के मिशिगन में पढ़ने गए एक भारतीय और तीन अन्य छात्रों ने अपने स्टूडेंट वीजा (F-1 स्टेटस) को बिना सूचना के अचानक रद्द किए जाने के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। छात्रों का कहना है कि उनका वीजा किसी उचित सूचना और कारण के अवैध रूप से रद्द कर दिया गया है।

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Indian student, three others file lawsuit against possible deportation from US News In Hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

विस्तार

अमेरिका के मिशिगन राज्य में एक भारतीय और तीन अन्य छात्रों ने अपने स्टूडेंट वीजा (F-1 स्टेटस) को बिना सूचना के अचानक रद्द किए जाने के खिलाफ संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। इन छात्रों में भारत के चिन्मय देवरे, चीन के दो छात्र जियांगयुन बु और क्यूई यांग और नेपाल के योगेश जोशी शामिल हैं। इन सभी छात्रों ने अमेरिका के होमलैंड सुरक्षा विभाग (डीएसएस) और आव्रजन विभाग (आईसीई) के खिलाफ यह मामला दायर किया है। उनका कहना है कि अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की निगरानी करने वाला SEVIS सिस्टम में उनका वीजा स्टेटस बिना किसी उचित सूचना और कारण के अवैध रूप से रद्द कर दिया गया।

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चारों छात्रों ने ठोका मुकदमा
अमेरिका में पढ़ने गए चारों चात्रों ने स्टूडेंट वीजा अचानक के रद्द करने के खिलाफ दायर मुकदमा में कहा है कि उन्हें वीजा रद्द होने से पहले कोई नोटिस या स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उनके ऊपर किसी भी प्रकार का अपराध या आव्रजन कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है। न ही वे किसी राजनीतिक गतिविधि में शामिल रहे हैं। साथ ही छात्रों ने ये भी कहा कि कुछ छात्रों को मामूली ट्रैफिक चालान या चेतावनी मिली थी, जिसे वीजा रद्द करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।

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छात्रों की मदद कर रही एसीएलयू का बयान
वहीं इन छात्रों की मदद कर रही संस्था अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन मिशिगन (एसीएलयू)  ने कहा कि यह कार्रवाई गैरकानूनी और अन्यायपूर्ण है। मामले में एसीएलयू की वकील रामिस वदूद ने कहा कि सरकार की ये कठोर और गलत नीतियां सिर्फ छात्रों के जीवन को ही प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि अमेरिका की शिक्षा प्रणाली की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिका आने से हिचक सकते हैं। बता दें कि अचनाक वीज रद्द करने का मामले में मिशिगन ही नहीं, न्यू हैम्पशायर, इंडियाना और कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में भी इसी तरह के केस दायर किए गए हैं।

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ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर सवाल

गौरतलब है कि यह मामला उस समय सामने आया है जब ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियों की वजह से अमेरिका में पढ़ रहे हजारों अंतरराष्ट्रीय छात्र प्रभावित हो रहे हैं। कई छात्रों को अचानक वीजा खत्म होने या डिपोर्टेशन का सामना करना पड़ा है, जिससे उनकी पढ़ाई अधूरी छूट जाने का डर है। साथ ही उन्हें किसी भी वक्त हिरासत में लिए जाने या निर्वासित किए जाने का भी डर है।

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