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ईरान में जंग: पाषाण युग में भेजने की धमकी से लेकर शांति वार्ता तक, 19 मिनट के संबोधन में ट्रंप क्या कुछ बोले?
Thu, 02 Apr 2026 10:02 AM IST
Devesh Tripathi
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Devesh Tripathi
Updated Thu, 02 Apr 2026 10:02 AM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में कई बड़ी बातें कहीं और कई बड़े दावे किए। उन्होंने अपने संबोधन में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा पर निशाना साधा। इतना ही नहीं उन्होंने ईरान युद्ध में अमेरिका का साथ न देने के लिए नाटो देशों को भी आड़े हाथ लिया।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने राष्ट्र संबोधन में पूर्व समकक्ष बराक ओबामा पर कटाक्ष किया। अमेरिकी राष्ट्रपति कहा, "उन्होंने ईरान के मामले में गलती की।" ओबामा प्रशासन के दौरान हुए ईरान परमाणु समझौते का जिक्र किए बिना ट्रंप ने कहा कि यह एक गलती थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान इसे सुधारने का उन्हें सम्मान मिला।
ट्रंप ने आगे कहा कि समझौते के बाद ईरान हम पर हंस रहा था। ट्रंप का इशारा ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते की ओर था, जबकि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिशें जारी रखे हुए था। उन्होंने कहा, "मैंने बराक हुसैन ओबामा के ईरान परमाणु समझौते को खत्म कर दिया। यह एक आपदा थी। ओबामा ने उन्हें 1.7 अरब डॉलर नकद दिए। उनका सम्मान और वफादारी खरीदने की कोशिश में, लेकिन यह काम नहीं आया। उन्होंने हमारे राष्ट्रपति का मजाक उड़ाया और परमाणु बम बनाने के अपने मिशन पर आगे बढ़ गए।"
ये भी पढ़ें: ट्रंप नाटो से नाराज: ईरान में जंग के बीच विदेश मंत्री रुबियो की पुरानी पोस्ट वायरल क्यों, किस बयान पर चर्चा?
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राष्ट्रपति ट्रंप के भाषण की 10 बड़ी बातें
निर्णायक जीत का दावा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अब एक अहम मोड़ पर पहुंच चुका है।
ईरान की सैन्य क्षमता नष्ट: उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमताएं लगभग खत्म कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी नौसेना समाप्त हो चुकी है, वायुसेना कमजोर पड़ गई है और मिसाइल भंडार को भारी नुकसान पहुंचा है।
ईरान में नेतृत्व परिवर्तन: ट्रंप ने कहा कि ईरान में नेतृत्व परिवर्तन हो चुका है। पुराना नेतृत्व काफी हद तक हट चुका है, जिसकी जगह एक कम कट्टरपंथी समूह ने ले ली है।
परमाणु बम नहीं बनाएगा ईरान: उन्होंने दोहराया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु बम हासिल करने से रोकना था और यह लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब परमाणु बम नहीं बनाएगा।
खाड़ी देशों और इस्राइल के साथ खड़ा रहेगा अमेरिका: व्हाइट हाउस से अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा, ''मैं मध्य पूर्व में हमारे सहयोगी देशों इस्राइल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत और बहरीन को धन्यवाद देना चाहता हूं। वे बहुत अच्छे रहे हैं और हम उन्हें किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचने देंगे या असफल नहीं होने देंगे।''
पाषाण युग में भेजने की धमकी: उन्होंने चेतावनी दी कि अगले दो-तीन हफ्तों तक अमेरिका ईरान पर और सख्त हमले जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने हमलों से ईरान के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह पंगु बना सकता है। उन्होंने कहा कि हम ईरान को पाषाण युग में वापस भेज देंगे, जहां वे असल में होने चाहिए।
अमेरिकी सेना की तारीफ: ट्रंप ने अमेरिकी सशस्त्र बलों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान की प्रॉक्सी ताकतों को समर्थन देने की क्षमता को कुचल दिया है।
समझौता न हुआ तो भीषण हमले: उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई अंतिम समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों जैसे ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाएगा। हालांकि, अपने संबोधन में उन्होंने किसी भी चल रही बातचीत, संभावित समझौते या युद्धविराम का कोई सीधा जिक्र नहीं किया।
47 साल के संघर्ष का जवाब: डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को पिछले 47 वर्षों से चले आ रहे संघर्ष का जवाब बताते हुए इसे एक अंतिम हिसाब करार दिया।
ये भी पढ़ें: 'टकराव और संवाद दोनों के रास्ते खुले': पेजेशकियन का अमेरिकी जनता से सवाल- क्या युद्ध आपके हित में है?
होर्मुज मामले से झाड़ा पल्ला: ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुलवाने को चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों की जिम्मेदारी बताया। ट्रंप ने सहयोगी नाटो देशों पर भी गुस्सा जताते हुए उन्हें कागजी शेर कहा।
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ट्रंप ने आगे कहा कि समझौते के बाद ईरान हम पर हंस रहा था। ट्रंप का इशारा ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते की ओर था, जबकि वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिशें जारी रखे हुए था। उन्होंने कहा, "मैंने बराक हुसैन ओबामा के ईरान परमाणु समझौते को खत्म कर दिया। यह एक आपदा थी। ओबामा ने उन्हें 1.7 अरब डॉलर नकद दिए। उनका सम्मान और वफादारी खरीदने की कोशिश में, लेकिन यह काम नहीं आया। उन्होंने हमारे राष्ट्रपति का मजाक उड़ाया और परमाणु बम बनाने के अपने मिशन पर आगे बढ़ गए।"
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निर्णायक जीत का दावा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष अब एक अहम मोड़ पर पहुंच चुका है।
ईरान की सैन्य क्षमता नष्ट: उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमताएं लगभग खत्म कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि ईरानी नौसेना समाप्त हो चुकी है, वायुसेना कमजोर पड़ गई है और मिसाइल भंडार को भारी नुकसान पहुंचा है।
ईरान में नेतृत्व परिवर्तन: ट्रंप ने कहा कि ईरान में नेतृत्व परिवर्तन हो चुका है। पुराना नेतृत्व काफी हद तक हट चुका है, जिसकी जगह एक कम कट्टरपंथी समूह ने ले ली है।
परमाणु बम नहीं बनाएगा ईरान: उन्होंने दोहराया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु बम हासिल करने से रोकना था और यह लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब परमाणु बम नहीं बनाएगा।
खाड़ी देशों और इस्राइल के साथ खड़ा रहेगा अमेरिका: व्हाइट हाउस से अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा, ''मैं मध्य पूर्व में हमारे सहयोगी देशों इस्राइल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत और बहरीन को धन्यवाद देना चाहता हूं। वे बहुत अच्छे रहे हैं और हम उन्हें किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचने देंगे या असफल नहीं होने देंगे।''
पाषाण युग में भेजने की धमकी: उन्होंने चेतावनी दी कि अगले दो-तीन हफ्तों तक अमेरिका ईरान पर और सख्त हमले जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने हमलों से ईरान के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह पंगु बना सकता है। उन्होंने कहा कि हम ईरान को पाषाण युग में वापस भेज देंगे, जहां वे असल में होने चाहिए।
अमेरिकी सेना की तारीफ: ट्रंप ने अमेरिकी सशस्त्र बलों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान की प्रॉक्सी ताकतों को समर्थन देने की क्षमता को कुचल दिया है।
समझौता न हुआ तो भीषण हमले: उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई अंतिम समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका ईरान के बिजली संयंत्रों जैसे ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाएगा। हालांकि, अपने संबोधन में उन्होंने किसी भी चल रही बातचीत, संभावित समझौते या युद्धविराम का कोई सीधा जिक्र नहीं किया।
47 साल के संघर्ष का जवाब: डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को पिछले 47 वर्षों से चले आ रहे संघर्ष का जवाब बताते हुए इसे एक अंतिम हिसाब करार दिया।
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