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UK: 'इस्लामोफोबिया की परिभाषा समानता कानून के अनुरूप नहीं'; सरकार के रुख से सिख संगठन के अभियान को मिला बल

Sun, 29 Sep 2024 07:55 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 29 Sep 2024 07:55 PM IST
सार

UK: इस्लामाफोबिया की गलत परिभाषा के खिलाफ अभियान चला रहे एक ब्रिटिश संगठन एनएसओ को हाल ही में सरकार का समर्थन मिला है। सरकार ने इस बात को माना है कि यह परिभाषा ब्रिटेन के समानता अधिनियम के अनुरूप नहीं है। कुछ साल पहले लेबर पार्टी ने इस परिभाषा को अपनाया था, जिसे संगठन ने चुनौती दी।

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Boost for British Sikh group’s campaign against flawed definition of Islamophobia
ब्रिटेन में इस्लामाफोबिया की परिभाषा को लेकर विवाद - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

इस्लामाफोबिया की गलत परिभाषा के खिलाफ अभियान चला रहे एक ब्रिटिश संगठन एनएसओ को हाल ही में सरकार का समर्थन मिला है। सरकार ने इस बात को माना है कि यह परिभाषा ब्रिटेन के समानता अधिनियम के अनुरूप नहीं है। कुछ साल पहले लेबर पार्टी ने इस परिभाषा को अपनाया था, जिसे संगठन ने चुनौती दी। संगठन के मुताबिक यह परिभाषा विवादास्पद है और इससे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने में मुश्किलें पैदा होंगी। 

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संगठन ने उप प्रधानमंत्री और अन्य सरकारी अधिकारियों को पत्र लिखा था और चेतावनी दी थी कि अगर यह परिभाषा कानून में शामिल की जाती है, तो इससे अभिव्यक्ति की आजादी पर गंभीर असर पड़ेगा। अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह परिभाषा समानता अधिनियम के अनुरूप नहीं है, जिससे संगठन के अभियान को बल मिला है। 
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सिख संगठनों का नेटवर्क (एनएसओ) ने इस महीने उप प्रधानमंत्री एंजेला रेयनेर और धर्म मंत्री लॉर्ड वाजिद खान को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने चेतावनी दी थी कि यह परिभाषा भारतीय महाद्वीप के इतिहास पर तथ्यात्मक चर्चा करने में मुश्किलें पैदा करेगी। 2018 में एपीपीजी (ब्रिटिश मुसलमानों पर एक संसदीय समूह) ने इस्लामाफोबिया को एक प्रकार का ऐसा नस्लवाद बताया था, जो मुसलमानों की पहचान को लक्षित करता है। 
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लॉर्ड खान ने इस हफ्ते एक बयान में कहा कि जो परिभाषा एपीपीजी ने इस्लामाफोबिया के लिए दी है, वह 2010 के समानता अधिनियम के अनुरूप नहीं है। इस अधिनियम में नस्लभेद और राष्ट्रीयता को परिभाषित किया गया है। उन्होंने यह भी माना कि इस्लामाफोबिया को परिभाषित करना एक जटिल मुद्दा है और इसे एक व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि कोई भी परिभाषा विभिन्न समुदायों के दृष्टिकोण को समग्र रूप से दर्शाए। 


यह मुद्दा तब सामने आया जब हाउस ऑफ कॉमन्स में उप प्रधानमंत्री रेयनेर से सवाल किया गया कि सरकार इस्लामाफोबिया से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है। हाल ही में हुए दंगों के कारण इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई। लॉर्ड खान ने कहा, हालिया हिंसा ने हमारे समाज की कमजोरियों को उजागर किया है। इस हिंसा के कई मामले मुसलमानों और आप्रवासियों के खिलाफ नफरत से जुड़े थे। सरकार इस तरह के  बंटवारे को बर्दाश्त नहीं करेगी। हम हर किसी को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार को बचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 

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